Saturday, May 12, 2012

इतना हो हल्ला और बवाला क्यों ?


इसमें आपको अपमान किसका दिख रहा है ? नेहरू का अथवा आंबेडकर का ? अथवा सत्य को बेहद ज़हीन तरीके से दर्शाया गया है ?

नज़र अपनी- अपनी ! किसी को गिलास आधा भरा दीखता है तो किसी को आधा खाली। मुझे तो गिलास की पारदर्शिता और पानी की कल-कल करती तरंगें दिखती हैं।

मेरे नज़रिए से उपरोक्त कार्टून में , कार्टूनिस्ट ने सत्यता को बखूबी दिखाया है। नेहरू की तानाशाही दिखाई है जबकि आंबेडकर द्वारा उस तानाशाही को रोकने का अथक प्रयास दिख रहा है। जिस गति से नेहरू हांकना चाहते थे सभी उच्च पदस्थ लोगों को, उसका पुरजोर विरोध दिखाया गया है , बुद्धिमानों द्वारा घोंघों पर सवार होकर , जिस पर नेहरू की चाबुक कारगर नहीं हो रही थी...

इस कार्टून में आंबेडकर का अपमान तो कतई नहीं दिख रहा हाँ, नेहरू का असली चेहरा ज़रूर सामने रहा है।

Hats off to the great Cartoonist.

Zeal

21 comments:

Rajesh Kumari said...

nice cartoon without speaking telling every things thanks to that cartoonist and you too to share it with us.

अजय कुमार झा said...

दिव्या जी ,
इस प्रकरण पर जब खबर पढी तो मुझे यही लगा कि

ई देस का अजबे ट्रेजडी , एक तरफ़ तो दावा कि पहुंचेंगे अपना राकेट लेके MOON
आ दूसरी तरफ़ है मचा बवेला , साठ साल में भी समझ ना आए इन्हें कार्टून

दिवस said...

बिलकुल सटीक पकड़ा है आपने। बहुत सी बातों के लिए अम्बेडकर को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि उसकी असली जड़ नेहरु है। कार्टूनिस्ट ने ठीक इसी बात को पकड़ा है और इसे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आधार पर उकेरा है। वरना क्या वजह थी कि सारी मलाई खाने की फिराक में बैठा नेहरु अम्बेडकर के खाते में मलाई जाने देता?
बिलकुल सही है कि इस चित्र में अम्बेडकर का अपमान तो कतई नहीं है। यह तो सरासर नेहरु के कारनामे उजागर करता कार्टून है।

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

bina soche samjhe karte hai bawal
cartoon hi karte cartoon pe sawal

रविकर फैजाबादी said...

जनता खड़ी निहारती, चाचा चाबुक तान |
हैं घोंघे को ठेलते, बाबा बड़े महान |

बाबा बड़े महान, लीक पर चलना चाहें |
नेहरु तानाशाह, भरे है घोंघा आहें |

मजेदार है बात, विमोचन इस पुस्तक का |
ईस्वी सन उनचास, किये खुद नेहरु कब का ||

सुबीर रावत said...

Great. आपकी पैनी नजर को सलाम.
जो पूरा देश नहीं देख पाया वह आपने समझा दिया. आभार !

gagan parashar said...

aaj ramdev ko kya hua.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

शिवम् मिश्रा said...

आज एक बच्चा अपने मित्रो से कह रहा था, "बड़ो को कार्टून देखने / पढ़ने ही नहीं चाहिए ... समझ पाते है नहीं फिर बेवजह बवाल खड़ा कर देते है !"


इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - सेहत के दुश्मन चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थ - ब्लॉग बुलेटिन

expression said...

टाइम पास कर रहे हैं लगता है......
कोई मुद्दा तो चाहिए ही....

सादर.

आकाश सिंह said...

आपकी लेखनी को सलाम | बहुत ही संजीदगी से लिखी हुई पन्तियाँ | धन्यवाद यहाँ भी आयें - www.akashsingh307.blogspot.in

वन्दना said...

बिल्कुल सही आकलन

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

ई कार्टुनवा की समझ बच्चवन के कुछ जियादा ही होखै सयनके त खाली पीली मुहै बिचकावत हैं

Bharat Bhushan said...

आपकी नज़र ने एक और तरह की बारीक सच्चाई को देखा है. इस कार्टून में अंबेडकर का अपमान तो कतई नहीं है. यह हंगामा बेकार का बवाल था. मैं चाहता हूँ कि आपका आलेख संसद में राहुल द्वारा पढ़ा जाए और फिर उस पर नेहरूवादी बवाल करें :))

रचना दीक्षित said...

अब ये कौन समझाए.

Bikramjit said...

well WE CHOSE THOSE ministers who created the rucus in both the houses ..

so we are at fault ..

so much is going on in the nation and they are more interested in this cartoon ... what about the children who will be reading those books , they getting abused and raped or killed .. do they think of that

Bikram's

Ankit.....................the real scholar said...

अभी आप लोग मामला समझे नहीं ; इन गोंग्रेसियों ने "आंबेडकरवादी" के पद पर भी कब्ज़ा कर लिया है और वो लोग नेहरू का अपमान स्वीकार नहीं कर पा रहे थे तो बाब साहबके नाम पर बवाल मचा दिया

Vineet Singh said...

सही कहा अपने इन लोगो को कार्टून से नफरत है जिनके नाम पर ये अपने दलाली का धंधा चला सके....लेकिन जब देवी देवताओ की नंगी चित्रे बनती हैं तो इन दलालों को अभिव्यक्ति दिखती है

Vineet Singh said...

सही कहा अपने इन लोगो को कार्टून से नफरत है जिनके नाम पर ये अपने दलाली का धंधा चला सके....लेकिन जब देवी देवताओ की नंगी चित्रे बनती हैं तो इन दलालों को अभिव्यक्ति दिखती है

Alok Agrawal said...

Very good,but this discussion will be incomplete unless not jointly read with one another took ground upon Samajwadi's Party profile;
https://fbcdn-sphotos-a.akamaihd.net/hphotos-ak-ash3/581690_325758394159107_100001748469964_698643_155559869_n.jpg