Thursday, July 11, 2013

भारत का बेटा भारत पर शासन करे

एक किताब यूरोप में जले तो - मुस्लिम प्रदर्शन भारत में !

एक कार्टून डेनमार्क में बने तो - मुस्लिम भड़के हिंदुस्तान में !

एक किताब छपे लन्दन में रुश्दी की तो - मुस्लिम दंगे भारत में !

एक फ़तवा ईरान में जारी तो - मुस्लिम जलूस हिन्दुस्तान में !

एक मस्जिद टूटे काठमांडू में तो - मुस्लिम एतराज हिंदुस्तान में !

इसराइल करे फिलिस्तीन पर हमला तो - जवाब सडको पर देते मुस्लिम हिन्दुस्तान में !

बौध और मुस्लिम के लड़ाई का म्यांमार में झगडा तो - मुस्लिमो से पिटे हिन्दू हिंदुस्तान में !

क्या हिंदुस्तान में पागल कुत्ते यूँ ही हिंदुस्तान की जनता को काटते रहेंगे ?

या इनका कुछ इलाज भी है ??

एक ही विकल्प - भारत का बेटा भारत पर शासन करे और भारत की आत्मा को प्रतिष्ठत करे !

Saturday, July 6, 2013

देशभक्ति और धर्मनिरपेक्षता से कोई वास्ता नहीं है इनका


जागो हिन्दू जागो

दोहरे मापदंड अपनाने वाली कांग्रेस सरकार को 'लश्कर-आतंकी' इशरत जहां की बहुत परवाह है , नितीश कुमार तो उसे अपनी बेटी बता रहे हैं , लेकिन नर्क से बद्तर ज़िन्दगी जी रही 'प्रज्ञा सिंह ठाकुर' की कोई परवाह नहीं है ! 

Wednesday, July 3, 2013

आजकल लापता हैं ये लोग ..


इशरत को आतंकी नहीं बताएगी सीबीआई

इशरत को आतंकी नहीं बताएगी सीबीआई

गुजरात हाई कोर्ट के निर्देश पर इशरत जहां एनकाउंटर केस में आज दाखिल होने वाली चार्जशीट में सीबीआई इशरत को लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी नहीं करार देगी। सीबीआई अदालत को सिर्फ इतना बताएगी कि इशरत के साथ मारे गए दो पाकिस्तानी तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की हिरासत में थे और फिर गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। इसके बाद गुजरात पुलिस ने चारों को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया।

सीबीआई चार्जशीट में यह नहीं बताएगी कि दोनों पाकिस्तानी भारत में क्या करने आए थे और उन्हें आईबी ने किस आरोप में पकड़ा था। जांच एजेंसी इस बात का उल्लेख भी चार्जशीट में नहीं करेगी कि इशरत, प्रणेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख और दो पाकिस्तानियों को कैसे जानती थी। इस बारे में सीबीआई के डायरेक्टर रंजीत सिन्हा ने बताया, 'हम इस बात की जांच नहीं कर रहे हैं कि मारे गए चारों लोग आतंकवादी थे या नहीं। हमें हाई कोर्ट से जांच का दायरा सिर्फ इस बात तक सीमित रखने के लिए कहा गया है कि मुठभेड़ फर्जी थी या नहीं।'

गौरतलब है कि सीबीआई की शुरुआती चार्जशीट में इशरत और उसके साथियों को आतंकी बताया गया था, लेकिन अब इसे हटाया जा रहा है। इससे पहले 6 अगस्त 2009 में गुजरात हाई कोर्ट के सामने अपने पहले हलफनामे में गृह मंत्रालय ने भी इशरत और उसके साथियों को लश्कर का सक्रिय आतंकी बताते हुए मुठभेड़ की सीबीआई जांच का विरोध किया था।
Courtesy facebook

Tuesday, July 2, 2013

अपने स्वार्थ से परे ..

ना देश की परवाह , ना ही प्रकृति की ! फिर मरने वाले श्रद्धालुओं , हिन्दू धर्म और उनके मंदिरों की क्यों होगी ? पहाड़ों पर पेड़ लगाने के बजाये डायनामाईट से पहाड़ों को चिटका रहे हैं ! उत्तराखंड में इतनी अधिक संख्या में बाँध बनेंगे तो वो दिन दूर नहीं पूरा उत्तराखंड ही बह जाएगा , और यही तो चाहती है कांग्रेस-- धीरे-धीरे करके भारत को समूल नष्ट करना। चाईना से सावधान रहने की ज़रुरत है। दुश्मन पडोसी मुल्कों से न हाथ मिलाने की ज़रुरत है , ना ही किसी प्रकार के दबाव में आने की ज़रुरत है। सरकार को अपने स्वार्थ से परे , धन का लालच छोड़कर , देश के विकास के लिए सोचना होगा।