Tuesday, November 1, 2011

हाँ, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ.....

क्यूंकि तुम मुझे बदलना नहीं चाहते,
जैसी हूँ वैसा ही चाहते हो ,
उसी का सम्मान करते हो ,
खूबियों को देखते हो ,
कभी मुझे नीचा नहीं दिखाते,
मुझे भी इंसान समझते हो,
मुझ पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करते हो,
मुझ पर विश्वास करते हो,
मेरी भावनाओं का सम्मान करते हो,
बात-बात पर कमतर होने का एहसास नहीं दिलाते,
मेरा भी कोई वजूद है , ये समझाते हो,
मैं कुछ कर सकती हूँ , ये कहकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ाते हो,
गिर कर बिखर जाऊं , इससे पहले आगे बढ़कर तुम मुझे थाम लेते हो,
मुझे पढ़ाने वाले तो लाख मिले पर तुम अकेले हो जो मुझे पढना चाहता है,
आँसू देने वाले भी कम नहीं हैं , लेकिन उनके छलकने से पहले मुझे हंसाने वाले तुम अकेले हो,
रौंद कर कुचलने वालों के इस मेले में , मेरी राह प्रशस्त करने वाले सिर्फ तुम ही हो।
मेरी हस्ती मिटाने वालों की इस भीड़ में , इस अस्तित्व को बचाने वाले एक तुम ही तो हो।

सबने शब्दों को देखा, तुमने जज्बा देखा।
सब देखते हैं चेहरा, तुमने मन को देखा।
स्त्री-पुरुष की जंग में तुमने पौरुष देखा।
लिखे को पढ़ा सभी ने , तुमने तो अनकहा और बिन-लिखा देखा।

हाँ मैं तुम्हें प्यार करती हूँ , क्यूंकि तुमसे मिलने के बाद...
मैंने अपने अन्दर की स्त्री को पुनर्जीवित होते हुए देखा।

Zeal

51 comments:

mridula pradhan said...

har line par wah-wah kahne ko jee chahta hai......

प्रवीण पाण्डेय said...

बेहतरीन, सच को आगे बढ़ स्वीकार कर लें हम..

रचना said...

beautiful both the words , the expressions , the thought and the reason

ASHA BISHT said...

bahut sundar rachna...

Rakesh Kumar said...

ओह! सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.
आपकी काव्य प्रतिभा में दिव्यता का अहसास होता है,दिव्या जी.

Maheshwari kaneri said...

्बहुत सुन्दर और सशक्त भावो से ओत-प्रोत लाजवाब अभिव्यक्ति...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास को पिरोया है अपनी रचना में ..

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया प्रस्तुती

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...

ZEAL said...

.

@- Rachna ji -

Answer of the question you have asked in your second comment is....Yes, We all are fine by divine grace. Thanks for the concern.

.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

Beautiful Expressions!

regards.

आशा मिश्रा said...

bhut sunder bhawpurn poem

आशा मिश्रा said...

bhut hi sunder rachna hai

अरुण चन्द्र रॉय said...

आज एक अलग तेवर... कविता अच्छी है...

Mridula Harshvardhan said...

bhav vibhor ho gayi main padh kar
aur apne jeevan mei us shakhs ka aur bhi samman karne lagi hoon jisse main pyar karti hoon

itni sunder aur sashakt rachna ke liye hardik bhadhayi

Love

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ..।

Rajesh Kumari said...

bahut achcha ,laajabaab likha hai.sahi me pyaar usi se hota hai jo tumhe yeh sab ehsaas karaye.

mahendra verma said...

कविता में दिव्या की दिव्यता अपने पूर्ण आभामंडल के साथ दीप्तमान है ।
यह आभा कभी क्षीण न हो !

Vivek Rastogi said...

वाह बेहतरीन रचना, सत्य के सथ जीवन सुंदर बन जाता है ।

Bikramjit Singh Mann said...

beautiful .. and i pray each of us get that someone who treats us how we want ...

Bikram's

Sunil Kumar said...

बहुत खुबसूरत, क्या बात है, दिव्या जी आज तो नये रंग में ....

G Vishwanath said...

That was nice to read.
Best wishes.
GV

jksingh said...

It is a beautiful poem

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

भावमयी सुन्दर प्रस्तुति...वाह!

G.N.SHAW said...

GOD is great.

A said...

Awesomeeeeeeeeeeee

Kajal Kumar said...

बल्ले बल्ले

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
छठपूजा की शुभकामनाएँ!

देवेन्द्र पाण्डेय said...

लाज़वाब।

Amit Chandra said...

बहुत खूब. शानदार. आपके आलेख की तरह आपकी कविता भी बहुत कुछ कहती है.

kshama said...

Wah! Kya baat hai!

अशोक कुमार शुक्ला said...

आदरणीय महोदय
मै आपकी यह पोस्ट सराहनीय है
शुभकामनाऐं!!
आपकी पोस्ट सराहनीय है शुभकामनाऐं!!

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

सच है, दोनों के अहसासात का मिलन ज़रूरी है, तभी तो प्रेम पगेगा॥

वन्दना said...

वाह दिव्या जी गज़ब के भाव भरे हैं आत्मविश्वास से लबरेज़ कविता………बधाई।

मनोज कुमार said...

इस पोस्ट में भवपूरित मन की अभिव्यक्ति मन को छूती है।

Atul Shrivastava said...

सही है। जो बदलने की कोशिश करे उससे दूर हो जाना ही बेहतर।
अच्‍छी रचना।

Vaanbhatt said...

ये हुई ना बात...अपनी क्रियेटिविटी दिखा दी आपने...बेहद ख़ूबसूरत भाव...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

प्रेम मिले तो जीवन सँवरे
प्रेम मिले तो मन हरषाये
प्रेम मिले तो जीवन सुख से
गंगा-यमुना सा लहराये.

निर्मल-निश्छल भावों की सरिता.

Bhushan said...

आपके लेखन का यह रंग बहुत प्यारा रहा. प्रेम का संपूर्ण भाव देदीप्यमान है.

Kunwar Kusumesh said...

beautifully expressed.

NISHA MAHARANA said...

excellent expression.

प्रतिभा सक्सेना said...

आपकी यह अभिव्यक्ति आपके लिये सम्मान बढ़ा रही है क्योंकि
इन शब्दों में मन की सुन्दरता छलक गई है .

DUSK-DRIZZLE said...

SANDAR PRASTUTI

SAJAN.AAWARA said...

sab sabdon ne man ko chu liya...
jai hind jai bharat

or ed mubarak advance me mam

कुश्वंश said...

"कितने सुन्दर भाव , व्यक्त की अंतरध्वनि
कोमल ह्रदय विराट, प्रेम की रेशम ध्वनि"

काव्य पंक्तियों में संवेदनाओं का बेहतरीन वर्णन , लौह शक्ति सी द्रढ़ता के साथ , प्र्गातिशील रहें शुभकामनाएं

देवेन्द्र said...

सुंदर, हृदय को छूती कविता।

nilesh mathur said...

बहुत सुंदर रचना, आपकी कविताएं कम ही पढ़ने को मिलती है।

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर रचना

aarkay said...

अपनी सारी अपेक्षाओं , आकाँक्षाओं की पूर्ति के चलते प्यार के लिए उपयुक्त पात्र मिलना कम सौभाग्य की बात नहीं . व्यक्ति के रूप में पहचान , individual space , जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करते हुए बदलने की कोई चेष्टा न करना- आपने कविता में सब बातों का समावेश या यों कहें, एक आदर्श स्थिति का वर्णन सुंदर शब्दों के माध्यम से किया है . केवल बाहर की सुन्दरता को न देख कर भीतर की सुन्दरता को पहचानना भी तो कम बुद्धि कौशल की बात नहीं. इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें .

शोभना चौरे said...

sampoorn

प्रतुल वशिष्ठ said...

आप अपनी ऎसी भाव-प्रवण रचनाओं से बार-बार आत्मीयजनों को अपने मन के दर्पण में झाँकने को बाध्य करते हो... 'कहीं मैं तो नहीं?'.. अरे नहीं ... मैं तो सुन्दर विचारों का एक उपासक मात्र ही हूँ... और आज भी आपकी भाव-सरिता में गोते लगाकर दर्शन सुख ले रहा हूँ.