Friday, January 25, 2013

तेज तम अंश पर , कान्हा जिमी कंस पर..

इंद्र जिमि जृंभपर ! बाडव सुअंभपर ! रावण सदंभपर ! रघुकुल राज है … !
पौन वारिवाह पर ! संभु रतिनाह पर ! ज्यो सहसवाहु पर !राम द्विज राज है … !
दावा द्रुमदंड पर ! चिता मृगझुंड पर ! भूषण वितुंड पर ! जैसे मृगराज है … !
तेज तमंअंस पर ! कन्न्ह जिमि कंस पर ! त्यों म्लेंच्छ बंस पर ! सेर शिवराज है … !
कवि भूषण 

11 comments:

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

बहुत ही ओजमय ।.... लेकिन दिव्या जी वीर रस से आप्लावित यह छन्द भारतेन्दु का नही भूषण का है ।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

बहुत ही ओजमय ।.... लेकिन दिव्या जी वीर रस से आप्लावित यह छन्द भारतेन्दु का नही भूषण का है ।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

बहुत ही ओजमय ।.... लेकिन दिव्या जी वीर रस से आप्लावित यह छन्द भारतेन्दु का नही भूषण का है ।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

जहाँ तक मैंने पढा है , अर्थ को समझने के लिये इस छन्द का सही पाठ यह है---

इन्द्र जिमि जम्भ पर , बाडव सुअम्ब पर
रावण सदम्भ पर रघुकुल राज हैं ।
पौन वारिवाह पर सम्भु रतिनाह पर
ज्यों सहस्रबाहु पर राम द्विजराज हैं ।
दावा द्रुमदंड पर चीता मृगझुण्ड पर
भूषण वितुण्ड पर जैसे मृगराज हैं ।
तेज तम अंस पर ,कान्ह जिमि कंस पर
त्यों म्लेच्छ वंश पर सेर सिवराज हैं ।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अच्छे को आज नहीं हुये, वरना कोई न कोई मुकदमा कायम करा देता भारतेन्दु जी के खिलाफ.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अच्छे को आज नहीं हुये, वरना कोई न कोई मुकदमा कायम करा देता भारतेन्दु जी के खिलाफ.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अच्छे को आज नहीं हुये, वरना कोई न कोई मुकदमा कायम करा देता भारतेन्दु जी के खिलाफ.

प्रवीण पाण्डेय said...

सच ही कहें हैं भारतेन्दुजी।

रविकर said...

बहुत बढ़िया -

शुभकामनायें-
गणतंत्र दिवस की -

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

दिव्या जी, मैं दूसरी बार टिप्पणी कर रही हूँ । पहले वाली पता नहीं कहाँ हैं । यह ओजमय छन्द रीतिकालीन वीररस के कवि भूषण का है जो उन्होंने शिवाजी के शौर्य और वीरता के वर्णन के लिये लिखा था ।
छन्द की पहली पंक्ति मे बाडव सुअम्ब करलें ताकि अर्थ आसान हो । भूषण ने शिवा और छत्रसाल की वीरता में जो काव्य रचा है वह सचमुच साहित्य की अमूल्य निधि है ।

mridula pradhan said...

school me padhi kavita yaad kara di.....