Wednesday, August 1, 2012

मुझे चिंता है आपकी...


भारत देश में लोगों को इंसान और इंसानियत की परख नहीं है। जो राष्ट्र हित में अपनी शान-शौकत वाली नौकरी को तिलांजलि दे देते हैं और अपनी जान की परवाह किये बगैर देश के लिए लडाई लड़ते हैं , उनके त्याग को भी लोग समझ नहीं पा रहे। सरकार तो कसाई, क्रूर और असंवेदनशील है ही, लेकिन हम लोग तो ऐसे नहीं हो सकते। मुझे चिंता है भाई केजरीवाल की। अनशन का आठवां दिन और मधुमेह का रोगी होते भी लडाई जारी रखी है। ईश्वर इस देशभक्त की रक्षा करें और दुर्बुद्धि, घटिया सरकार को सद्बुद्धि दें। -- वन्दे मातरम !

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5 comments:

Bharat Bhushan said...

सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और बातचीत का माहौल बनाना चाहिए. इतना भी नहीं कर सकती सरकार तो और क्या उम्मीद की जाएगी उससे.

expression said...

सभी चिंतित हैं....बस कुछ सकारात्मक नतीजा निकले ये दुआ है ईश्वर से.

अनु

Sunil Kumar said...

सरकार को कुछ सोंचना चाहिए

veerubhai said...

मौन सिंह इस मर्तबा १५ अगस्त को लाल किले पर नहीं चढ़ पायेंगे .आठ अगस्त को ही बाबा रामदेव को दिल्ली पहुँचने से पहले गिरिफ्तार कर लिया जाएगा /मरवाया भी जा सकता है .लाखों समर्थक ९ अगस्त को दिल्ली पहुँच नहीं पायेंगे .इससे पहले देश में साम्प्रदायिक झगडे करवा दिए जायेंगे .उसी में कुछ होगा .मौन साधे बैठी साम्राज्ञी पुणे के बम विस्फोट पे शांत है इस आतंकी हरकत को इन्डियन मुजाहिदीन की करतूत बतलाने से अकलियत के वोट जो कट जायेंगें .
करेंगे मिलकर भ्रष्टाचार ,
क्या कर लेंगे भकुवा वोटर ,
जन गन मन भी है लाचार .

सलमान खुर्शीद कहतें हैं देश रमजान में व्यस्त है .पुणे के धमाके क्या नव नियुक्त गृह मंत्री के स्वागत में किए गए हैं .कितना महान है देखो भारत देश ये तो साइकिल बम ही हैं यहाँ आके तो आतंकी भी शहीद हो जातें हैं .शहीद पद पा जाते हैं .आतंकी दस्ते .शहीद होने ही आतें हैं इस महान देश में .
नौ अगस्त से पहले राम देव जी के दिल्ली आवाहन से पहले दिल्ली पुलिस फिर उन्हें दिल्ली के बाहर ही सलवार पहन वायेगी .

वह महारानी जिसने पूडल पाल रखे हैं यह नहीं समझती देश पहले ही एक बार धर्म के आधार पर बंट चुका है .चुप्पी साधे बैठी है .और ये मौन सिंह इन महाशय के नामकरण में गलती हो गई ग्रंथि से ,राशि वही रही मनमोहन सिंह नहीं यह मौन सिंह हैं .

देश की बे -इज्ज़ती होने के बाद भी यह कहतें हैं : देश की नहीं मन मोहन सिंह की तौहीन हुई है ब्रिटेन में .
अरे भाई पुणे के विस्फोटों को लोकल इफेक्ट क्यों नहीं बतलाते ?

लोकल सबोतेज़ को क्यों नहीं मानते आप ?

कहीं अकलियत का वोट न चला जाए ?

और ये चैनालिए कहतें हैं पांच ब्लास्ट हुए हैं लोग महाराष्ट्र में खुशियाँ मना रहें हैं नव -नियुक्त गृह मंत्री का स्वागत कर रहें हैं .

हाय हाय वोट !अकलियत का वोट .अल्पसंख्यकों का वोट .
आई एम् में नहीं है खोट .
आई एम् बोले तो -इन्डियन मुजाहीदीन .

veerubhai said...

इधर अपने कुछ ब्लोगिये इस बात पे ही भड़के हुएँ हैं कि अपने भाई केजरीवाल नरेंद्र मोदी से क्यों मिले .क्यों नहीं मिल सकते भाई साहब जब लालू जैसों से मिल सकतें हैं ,अन्य राज्यों के मुख्य मंत्रियों से वह मिल सकतें हैं तो नरेंद्र भाई मोदी से क्यों नहीं मिल सकते .यदि जन समाज के कार्यक्रम में वह मोदी साहब से मिल लिए तो इसमें हर्ज़ क्या है बुरा क्या है ?कौन किस्से मिल रहा है यह मुद्दा बन रहा है .
कजरी वाल साहब हमारे लिए बेहद कीमती हैं .