Monday, March 7, 2011

गजब की मानसिकता --The Indian crab mentality .

लेख के प्रारम्भ में एक छोटी सी कहानी है

एक बार १० ट्रक , अलग-अलग देशों के केंकड़ों से भरे हुए जा रहे थे सभी ट्रक ऊपर से बंद थे ताकि कोई केंकड़ा बाहर निकल जाए लेकिन भारतीय-केंकड़ों से भरा ट्रक खुला हुआ था मार्ग में इंस्पेक्टर ने जांच के दौरान पूछा , इसको खुला क्यूँ रखा है , कहीं कोई ऊपर से निकल गया तो ? ड्राईवर ने जवाब दिया - " नहीं जनाब , ऐसा नहीं हो सकता , ये भारतीय केंकड़े हैं जैसे ही कोई ऊंचाई तक पहुंचेगा , नीचे वाले उसकी टांग पकड़कर खींच लेंगे"

हर जगह ऐसा ही देखने को मिलता है अक्सर। आज बाबा रामदेव के पीछे पड़े हैं सभी क्यूँ ? यदि कोई इमानदारी के रास्ते पर चलकर , देश हित में कुछ करना चाहता है तो सारे असामाजिक तत्व इतना विचलित क्यूँ हो रहे हैं।क्या बाबा रामदेव ने कोई गुनाह किया है , घोटाला किया है , जो लोग उनके विरोध में सर उठा रहे हैं ?

सच तो ये है की लोग डरते हैं , सत्यवादियों से , इमानदार लोगों से , देश भक्तों से , अन्याय और अनाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों से ऐसा इसलिए है क्यूंकि उनकी बईमानी से चल रही दूकान बंद जो हो जायेगी।लोग स्वयं तो कुछ करना नहीं चाहते , लेकिन अच्छे लोगों की राह में रोड़ा अटकाना , निंदा करना आदि उनका प्रिय शगल बन जाता है ईर्ष्या का इलाज नहीं है

आज बाबा रामदेव के साथ करोड़ों लोग हैं इसका कारण है की करोड़ों लोगों के दिल में भ्रष्टाचार दूर करने की चाहत है लेकिन सबके पास इतना वक़्त , हिम्मत और परिस्थियाँ नहीं हैं लेकिन बाबा रामदेव सच्चे लोगों की एक बुलंद आवाज़ बन गए हैं , लोगों को उनमें एक आशा की किरण दिखने लगी है , इसीलिए करोड़ों लोग बाबा के साथ जुड़ गए हैं और जुड़ना चाहते हैं गुंडों के गिरोह में गुंडे जुड़ते चले जाते हैं , और इमानदार लोगों के साथ सच्चे और अच्छे लोग आज बाबा रामदेव के साथ , किरण बेदी , अन्ना हजारे और जेठमलानी जैसी हस्तियाँ जुड़ रही हैं

बाबा रामदेव का कहना है की काला धन वापस लाओ इसमें गलत क्या है ? अगर विदेशों में रखा काला धन वापस लाया जा सके तो इसमें देश की भलाई है इतनी बड़ी मात्रा में धनराशी विदेशों में क्यूँ है यदि इसे वापस लाया जा सके तो , आगामी ३० वर्षों तक भारतवासियों को टैक्स ही नहीं भरना पड़ेगा देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी तथा देश का काया-कल्प हो सकेगा

कुछ लोग डर क्यूँ रहे हैं ? क्या उनका नाम जाहिर हो जाएगा की काला धन उन्होंने जमा किया है ? पहले घर को लूटते हैं , फिर करोड़ों रूपए विदेशों में जमा करते हैं . चोरी करके डरने की क्या जरूरत है ? दिग्विजय सिंह जैसे लोगों को देश की फिकर कम , इसकी ज्यादा है की बाबा अमीर क्यूँ है , सशक्त क्यूँ है , लोकप्रिय क्यूँ है , देशभक्त क्यूँ है और लालू जी को तकलीफ है बाबा तो सन्यासी है फिर देशभक्ति क्यूँ कर रहे हैं बैमानों को चैन से जीने क्यूँ नहीं देते अरे ! देश के बारे में सोचना किसी की बपौती है क्या ? हर नागरिक को अधिकार है की वो देश के हित में सोचे देश के नाम पर कलंक तो वो लोग हैं , जिनकी विचारधारा अति संकुचित है , अपने परिवार के आगे कभी सोचते ही नहीं देश के हित में सोचने के लिए समय ही नहीं निकाल पाते

एक सार्वजनिक अपील -
  • एक बार सोचिये ये काला धन विदेशों में पहुँचता कैसे है
  • कितने लोग इस गिरोह में शामिल हैं
  • कैश जाता है या फिर किसी और तरह से
  • किसके मार्फ़त पहुँचता है
  • क्या कस्टम अधकारी सोते रहते हैं , जांच नहीं होती , या फिर ये भी मिले हुए हैं।
  • देश का एक पैसा भी विदेशों में आसानी से ट्रांसफर नहीं हो सकता पहचान बतानी होती है बैंक कार्यरत होते हैं
  • आखिर जाता कैसे है ये काला धन विदेशों में
  • इन सब में बड़ी-बड़ी हस्तियों की मिली-भगत है।

यदि सत्ता में बैठे लोग चाहें तो अन्य देश से बात करके , उन्हें हमारा पैसा वापस करने पर मजबूर कर सकते हैं विदेशों में जमा काला धन वापस आना ही चाहिए इस मुहीम में , मैं भी बाबा रामदेव के साथ हूँ। जो लोग भ्रष्ट हैं वो बाबा रामदेव से ईर्ष्या रखते हैं और ईर्ष्या का कोई इलाज नहीं है।

जय हिंद !

76 comments:

Sonal Rastogi said...

हर सच्चे भारतीय को बाबा रामदेव का साथ देना चाहिए

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ham sab unke saath hain...

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

विदेशों में काला धन रखने वाले देश द्रोही हैं! ऐसे काले लोगों का नाम उजागर करना सरकार का कर्तव्य है मगर सरकार ऐसा करने से क्यों कतरा रही है, यह सभी को मालूम है !
देश की संपत्ति वापस आनी ही चाहिए !
आपका लेख इस सच्चाई पर सोचने पर विवश करता है कि अगर इस धन का उपयोग देश के विकास में किया गया होता तो आज देश की स्थिति कुछ और ही होती !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
आपने तो भ्रष्टाचारियों के ढोल की पोल खोलकर सामने रख दी!

पी.एस .भाकुनी said...

समाज का एक खास तबका है जो अपने आदर्शों को ढोता फिर रहा है , और समाज मे फैले भ्रष्टाचार, बेईमानी,तानाशाही, असमानता,और तमाम बुराइयों को देखकर पल-पल घुट-घुट कर जी रहा है,जबकि दूसरी ओर उसी समाज में एक तबका ऐसा भी है जो पूरी आन-बान और शान से जी रहा है, उसके लिए कोई आदर्श मायने नहीं रखते हैं, अक्सर संसद या विधान सभाओं के आस-पास की गन्दगी हर किसी को नजर आती है जबकि अपने आस-पास की गंदगी को हम नजर अंदाज कर जाते हैं , काला धन वापस आना ही चाहिए लेकिन भ्रष्टाचार, बेईमानी,तानाशाही, असमानता,और तमाम बुराइयों के रूप में जो कालिख हमारे समाज में फैली हुई है उसका क्या किया जाय ? जहाँ तक मैं समझता हूँ काला धन से भी अहम् मुद्दा है हमारे दैनिक जीवन में घुल चुकी कालिख को कैसे साफ़ किया जाय ?

अच्छी पोस्ट हेतु आभार...................

Poorviya said...

sab ek thaili ke chatte batte hai....

jai baba banaras....

सदा said...

वाह ...बहुत ही सही कहा है आपने ..।

Rakesh Kumar said...

आप बाबा रामदेव के साथ इसलिए हैं क्यूंकि बाबा ने जो भी किया अब तक वह अपने लिए नहीं जन जागरण के लिए और देश हित में किया .उनका कोई निजी स्वार्थ नजर नहीं आता .उन्होंने पहले तो 'योग' प्राणायाम के माध्यम से शरीर और मन को स्वस्थ रखने की तरफ सबका ध्यान आकर्षित किया और इस प्रकार से जब जनता का साथ उन्हें मिलने लगा तो अन्य समस्याओं जैसे की 'काला धन'
आदि पर भी आवाज उठानी शुरू की है.वे ही नेता या लोग उनके खिलाफ है जिन्हें डर लगने लगा है अपने कुकर्मों से.हमे विवेकपूर्वक
हर अच्छे का साथ तो देना ही चाहिए .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अपनी पोल खुलने के डर से नेता बाबा रामदेव के विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं ...
बहुत सार्थक प्रश्न हैं कि आखिर देश का पैसा विदेशों में जमा कैसे होता है ?
अच्छी पोस्ट

Sawai Singh Rajpurohit said...

आदरणीय डॉ.दिव्याजी
प्रणाम
बहुत कम अनुभव है राजनीती का लेकीन बाबा राम देव एक समाज सुधारक बनने की कोसिस कर रहें है और हर एक वेक्ति को समाज सुधारक बन्ना चािहए!

अच्छा विषय आपने उठाया बधाई स्वीकारें! सवाई

Atul Shrivastava said...

बाबा रामदेव ने सही मुददे को उठाया है लेकिन जहां तक उन्‍हें राजनीति में जन समर्थन मिलने की बात है यह दूर की कौडी साबित हो सकता है।
बाबा के साथ किरण बेदी के जुडने की बात तो ठीक है लेकिन जेठमलानी के जुडने का बाबा को कोई फायदा होगा ऐसा नहीं लगता। जेठमलानी जी की सार्वजनिक छवि मुझे नहीं लगता कि पाक साफ है।
जहां तक बाबा के साथ लोगों के जुडने का सवाल है लोग बाबा को एक योग गुरू के रूप में पसंद करते हैं और उनका सम्‍मान भी करते हैं लेकिन यदि राजनीति के मैदान में बाबा आए तो भी क्‍या करोडो लोग उनका समर्थन करेंगे यह सोचने वाली बात है।
जहां तक विदेशों में जमा देश के काले धन को वापस लाने की बात है तो यह बात बाबा रामदेव से पहले भी होते रही है, यह मुददा कोई बाबा रामदेव का पैदा किया हुआ नहीं है।

Sawai Singh Rajpurohit said...

आदरणीय संगीता स्वरुपजी
प्रतिक्रिया एक दम सही है!

प्रतुल वशिष्ठ said...

एक प्रतिउत्तर शैली की कविता रामदेव जी के गाये गीत से प्रभावित होकर लिखी थी, जो उसी तर्ज में है जिसे वे पसंद करते हैं.

ऐसे सूरज की किरणों की... जाँच-परख करना होगा.
चाइनीज़ बैटरी संचालित... तारों को चुनना होगा.
और देश के पावर वाले... नेताओं पर नज़र बना
उनके संदेशों के सिग्नल... अर्थ सहित सुनना होगा.
उस दिन सूरज खुद-बा-खुद... भारत की भाषा बोलेगा.
उस दिन मानसरोवर भी... अपने दरवाजे खोलेगा.

जिस दिन सत्ता में वोटों की... खेती पर अंकुश होगा.
जिस दिन वतन से गद्दारी की... एक सजा मृत्यु होगा.
जिस दिन छिपी हुई धन-दौलत... भारत लौटकर आयेगी.
जिस दिन भोग की कल्चर पर... योग-ध्वजा फहराएगी.
उस दिन स्वाभिमान भारत का... ओजस्वी भाषा बोलेगा.
उस दिन दुबला-पतला भी... बाहों में बल को तोलेगा.

सारे साथ चलेंगे मिलकर ... तब मुर्दा भी होलेगा.
संविधान में प्राण पड़ेंगे ... गूंगा भी तब बोलेगा.
इंतज़ार है कबसे सबको ... जड़ शासन अब डोलेगा.
लाल किला न बोले बेशक ... लाल चोला ही बोलेगा.

Aakshay thakur said...

कांग्रेस सोचती है कि वो इसी तरह अपनी गंदी राजनीति करती रहेगी. बड़े बड़े घोटाले करती रहेगी और मूर्ख जनता इसी तरह सब कुछ भूल कर उस को वोट देती रहेगी.
और ऐसा होता भी आया है
क्यो कि वोट देने वाली जनता के 60 प्रतिशत लोगो को तो ( देश मे क्या हो रहा है , कितने घोटाले हो रहे है )से कोई मतलब ही नही . वो तो बस चेहरा देख के वोट देती है.
ये सच है कि बाबा रामदेव के आने से इस देश की राजनीति मे एक नयी जान आ गयी है. लोगो को उम्मीद नजर आ रही है.
और ये भी सच है कि अगर बाबा रामदेव की पार्टी सत्ता मे आ जाये तो
इस देश की राजनीति मे वो चमत्कार हो सकता है जो अब तक नही हुआ
लेकिन मुख्य और दिलचस्प बात ये है कि क्या देश की जनता मे इतनी समझ है कि वो बाबा रामदेव की बातो को समझ कर उन्हे भारी बहुमत के साथ सत्ता मे पहुचायेगी. या फिर वो उसी चोर और चालाक पार्टी की गंदी राजनीति मे फसी रहेगी और सत्ता मे पहुचाती रहेगी जिसने 55 साल इस देश पे राज करके इस देश को ऐसे ऐसे जख्म दिये है जो अब नासूर बन चुके है

निर्मला कपिला said...

सब एक थाली के चट्टे बट्टे हैं बात तो गलत नही राजनिती के हमाम मे सभी नंगे हो जाते हैं। काली कमाई के बिना चुनाव नही लडा जा सकता इसे लिये सब कुछ बदलने से पहले चुनावी व्यवस्था बदलने की जरूरत है। फिर धर्म के नाम पर लिया गया धन चुनाव मे खर्च होगा तो जो स्वार्थी लोग बाबा बन कर लूटते हैं उनके लिये भी धन इकट्ठा करने की राह खुल जायेगी। अभी इसके बारे मे कुछ नही कहा जा सकता। धन्यवाद। जो देश भक्त हैं वो रहेंगे बेशक अपना ढिढोरा वो नहीं पीटें। क्या जो लोग बाबा का समर्थन नही करेंगे वो देश के गद्दार हैं? इस पोस्ट का यही अर्थ हुया। केवल किसी पार्टी विशेष से लगाव होने की वजह से ही सब लोग उसमे सही नही होते।ाखिर बाबा की पार्टी मे लोग तो इसी समाज से जायेंगे जिनकी रग रग मे भ्रशःटाचार का खून लग चुका है? उन पर कैसे लगाम कसी जायेगी? फिर भी बाबा रामदेव जो प्रयास कर रहे हैं जनता को जगाने का वो प्रशंस्नीय है। अस पास उनके चेलों पर नज़र डालते हैं तो उनमे सेहत का लाभे लेने के सिवा कोई परिवर्तन आया हो दिखता नही।
जरा नज़र डालिये उनमे से कितने लोगों ने बेईमानी छोडी है? एक नही कई को जानती हूँ। एक का उदाहरण दे रही हूँ जो योग गुरू बन कर अपने लिन्क बना रही हैं और अस्पताल की दवा चोरी करके घर आये मरीजों का ईलाज भी कर रही हैं। पहले बाबा समाज का कूडा साफ करें तब कोई क्रांति ला सकते हैं। धन्यवाद।

ehsas said...

मैं निर्मला जी बातों से पुरी तरह सहमत हुॅ। समाज को बदलना इतना आसान नहीं है। बेईमानी और भ्रष्टाचार समाज में घुन की तरह लग चुका है। समाज बनता है हम जैसे इंसानों से और जबतक हम नहीं बदलेगें चाहे कितने भी बाबा आ जाए इसे बदल नहीं सकते। हर कोई जानता है चोरी करना गलत है। किसी को सताना पाप है। लेकिन मौका मिलते ही सभी लोग ये कर गुजरते है।

सम्वेदना के स्वर said...

इस देश को कोई नगां फकीर ही समझायेंगा, तो ही इसकी अक्ल में कुछ आयेगा!

कई मायनों में महात्मा गाधीं से बढकर हैं स्वामी रामदेव! अपने पेट और लंगोट पर विजय प्राप्त कर चुके इस असली नगें फकीर की आग उगलती जुबान में, अधिकांश देशवासीयों को अपना राष्ट्रीय स्वभिमान जागता दिख रहा है।

बहुत हिम्मत का काम किया है बाबा रामदेव ने, आजादी की असली लड़ाई तो अब शुरु हुयी है। हालाकि इतना आसान भी नहीं है "ताकतवर और शक्तिशाली माफिया" के खिलाफ छेड़ी इस लड़ाई में जीतना!

Aakshay thakur said...

अब देश का भविष्य देश की जनता के हाथ मे है . अब वो ये बहाना नही कर सकती कि सब चोर है तो किसको वोट दे ? या कोई विकल्प नही है.
अब उनके सामने एक बहुत शक्तिशाली विकल्प है. बाबा रामदेव मे हर वो गुण है जो एक नेता मे होना चाहिये. जैसे आक्रामकता , इमानदारी, दूरदर्शिता , और सबसे बड़ी चीज है अपने देश के लिये तड़प . अब
देश की जनता के पास एक सुनहरा मौका है . और अगर ये मौका उसने खो दिया तो लानत है ऐसी जनता पर .

वन्दना said...

अपनी पोल खुलने के डर से नेता बाबा रामदेव के विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं ...
बहुत सार्थक प्रश्न हैं……………सही कहा संगीता जी ने।

Voice of youths said...

बिल्कुल सहमत हूँ आपसे| दरअसल राजनीतिक क्षेत्र में चोरों की जमात शामिल है| चाहें वह केन्द्र की राजनीति हो या राज्य की\ ऐसे में जब उनके खिलाफ कोई मोर्चा खोलेगा तो उसके दुश्मन तो खड़े होंगे ही| देश की जनता इसलिए तो आज मजबूर है| सबकुछ देखकर भी कुछ करने में असमर्थ है| बाबा रामदेव के साथ हजारों लोग हैं, उनके व्यक्तित्व की लोग इज्ज़त करते हैं इसलिए सरकारी हुक्मरान और राजनेताओं की घिघ्घी बंधी हुई है| बहरहाल हमें नैतिक समर्थन बाबा रामदेव को देना चाहिए|

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

दिव्या जी । दिल की बात । आज आपका लेख ज्यादा
अच्छा लगा । केकङा स्टोरी अच्छी लगी ।
काला धन बाहर कैसे जाता है ?
इसका उत्तर -- हवाला कारोबार के जरिये ।
भारत में किसी को पैसा दे दिया जाता है । उसी इंसान
के पास विदेशों में पैसा होता है । वह अपना कमीशन
लेकर उसका पैसा काले धन स्वामी को विदेश में दे देता
है । क्योंकि विदेशी बैंकिग के नियम कुछ अलग है । इसलिये
थोङा इधर उधर करके वो पैसा न सिर्फ़ जमा हो जाता है ।
बल्कि जुगाङ से वाइट मनी भी हो जाता है । ये लम्बा विषय
है । जिसको संक्षेप में समझाना संभव नहीं है ।

प्रतुल वशिष्ठ said...

लालू जी हैं सोचते, सारे भ्रष्ट दलाल.
राजनीति में आयेगा, रामदेव भूचाल.
रामदेव भूचाल, गिरेंगे नकली गांधी.
लेंगे कपाल भाति, चलेगी कपली आँधी.

कपली से मतलब = कपिला, मटमैली, गेरुआ रंग की.

लाल वसन को देखकर, भड़का लालू सांड.
बाबा को फँसवाऊँगा, औषध-हड्डी कांड.
औषध-हड्डी कांड, जाऊँगा वृंदा-वन में.
हिस्सा दूँगा बड़-बिंदी को काले-धन में.

बड़-बिंदी से मतलब = वृंदा कारत.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

दिव्या जी ,

हिंदी गज़ल के जनक दुष्यंत कुमार जी के शेर बहुत सटीक बैठते हैं आपके लेख की विषय वस्तु पर.........

'पीर पर्वत हो गयी अब तो पिघलनी चाहिए |

फिर हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए |



माना मेरे दिल में नहीं आप के दिल में सही

हो किसी भी दिल में लेकिन आग जलनी चाहिए |



सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं

पर किसी भी हाल में सूरत बदलनी चाहिए |



यही तो कर रहे हैं बाबा रामदेव ! आज देश के शीर्ष पर विराजमान राजनेता जिस तरह से भ्रष्टाचार को सरकारी मान्यता दिलाने पर तुले हुए है ,उसे बेशर्मी की हद ही कहा जा सकता है | भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे देश की पूर्व प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना करने का बाबा काअभियान, उनकी सच्ची देशभक्ति और देशवासियों के प्रति कल्याण की पवित्र भावना को ही दर्शाता है | फिर,इसके समर्थन की उम्मीद भ्रष्ट नेताओं से कैसे की सकती है | बाबा का आन्दोलन राष्ट्र उत्थान के लिए है वह भी पूरी ईमानदारी के साथ | इसीलिए सम्माननीया किरण बेदी जी, अन्ना हजारे और राम जेठ मलानी जैसी स्वच्छ छवि वाली शख्सियतें उनके इस अभियान से जुडी हुई हैं | जनता का अपार समर्थन उनके साथ है हम सब को इससे जुड़कर अपने राष्ट्र धर्म का paalan करना चाहिए |

mridula pradhan said...

ek bahut hi kadve sach ki ore ingit karti hui yah lekh....dekhiye shayad kuch fark pade....ise padhkar.

kaafir said...

अक्षय ठाकुर जी ने मेरी बात पहले ही लिख दी ...
उसमे बस इतना और जोड़ना चाहूँगा की किसी देश को वैसी ही सरकार मिलती है जैसा उस देश का समाज होता है

मुझे तो लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर अविश्वास है...
भारत में ये माडल १९४७ में ठीक था.. पर आज ये देश की मजबूरी बन गया है |

एक बार संसद में बहुमत साबित कर लो तो बस पांच सालो तक संसद ही ताना शाह की तरह लोगो को नचाती रहेगी..हर बार उलटे सीधे दाव-पेंच लगाकर कांग्रेस सत्ता में आ जाती है..और फिर वोही कहानी.. पिछले पचपन सालो से यही हो रहा है आज भी देश में एक मजबूत आधारित विपक्ष नहीं है जो है उनका पूरी तरह कांग्रेसीकरण हो चूका है (भाजपा आदि)

हमें चीन की तरह द्वी-दलीय प्रणाली अपनानी चाहिए जहा पढ़े-लिखे प्रतिभा संपन्न लोगो को पदोन्नति आधार पर सर्वोच्च बनाया जाता है ...
हमें सयुक्त राज्य अमरीका की तरह एकल खिड़की व्यवस्था बनानी चाहिए जहा सारे प्रमुख निर्णय एक राष्ट्रपति करता है |
असल में जितनी लम्बी श्रुंखला होती है भ्रष्टाचार भी उतना ही होता है |

आप का कहना उचित है.. बाबा राम देव जी का समर्थन करना ही चाहिए |

वाणी गीत said...

कितने अधिकार से लोग बाबा रामदेव जी को सन्देश दे रहे हैं की
वे योग सिखाएं , मलाई तो हम मिल- बाँट कर खाएं...
वे सुबह जल्दी उठे , लोगों को योग सिखाएं , स्वस्थ रहने के गुर बताएं बस देश के स्वाभिमान को ना जगाये ...हद है !
दरअसल बाबा रामदेव जैसे प्रश्न पूछने और जवाब देने की इनकी काबिलियत ही नहीं है !

Suman said...

divya ji, post acchi hai.........
sahamat hon aapse.....

aarkay said...

राम देव जी कहें या कोई और, काला धन तो देश में वापिस आना ही चाहिए !
आप के विचारों से पूर्ण सहमति है .

अन्तर सोहिल said...

सत्ता में बैठे लोग चाहें तो……………
लेकिन क्यों चाहेंगें? अपने पैर पर खुद कुल्हाडी मारेंगें क्या?
इतने सालों तक इसीलिये जनता को मूर्ख बनाकर, गालियां खा-खाकर, घोटाले करके विदेशों में जमा किया है।
हाँ ये बात अलग है कि कहती कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी हैं कि धन वापिस लाया जाना चाहिये। लेकिन करना नहीं चाहते।
वही बात तो बाबा रामदेव कह रहे हैं।
अब बाबा ने कहा है तो कहीं कर ही ना दे, इसलिये विरोध है।

वैसे बाबाओं के बारे में भी पूज्या निर्मला कपिला जी से सहमति है। हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ में वही आदमी रुककर (रहकर) इलाज करवा सकता है, जिसकी जेब भरी है। गरीब आदमी को वहां भी रहने की जगह और दवायें नहीं मिलती।
कमरों के किराये इतने ज्यादा हैं कि होटल में ठहरना सस्ता पडेगा।

प्रणाम स्वीकार करें

दिगम्बर नासवा said...

जो लोग किसी मुकाम तक पहुँच जाते हैं उन्हें लगता है की वो बस अब उनकी जागीर है ... नेताओं को ख़ास कर ऐसा लगता है ... यही कारण है बाबा के पीछे पढ़े हैं सब ... .

दर्शन लाल बवेजा said...

अच्छा विषय आपने उठाया बधाई स्वीकारें!

Kunwar Kusumesh said...

आपका प्रश्न सही है.अक्षय ठाकुर और काफ़िर जी की बातों से सहमत.
लेकिन क्या बाबा रामदेव को अब राजनीति में कूदने और चुनाव लड़ने की ज़रुरत है ?

Rajey Sha राजे_शा said...

बाबा रामदेव हों या और कोई, जि‍स पर भी भरोसा करो...कोई और ही रंग दि‍खा देता है।

Deepak Saini said...

बाबा रामदेव ने सारे भ्रष्ट नेताओ की जडे हिला दी है इसलिए सब डर रहे है
मै तो बहुत पहले से उनके साथ हूँ

ADITI CHAUHAN said...

baba ramdev se aaj bahut se log dare huye hain. baba ramdev ki pahunch aaj ghar-ghar men hai. unki baaten prabhavit karti hain, unhone ek nayi disha dikhayi hai lekin hamen nahi lagta ki ek baba ko log raajniti men dekhna pasand karenge.

thanks

गिरधारी खंकरियाल said...

कहते हैं की अकेला चना भाड़ नहीं झोंक सकता है बाबा का साथ देना ही होगा . इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी बारी आये बिना जल्दी काम करवाने की, सुविधा शुल्क देने, की आदत छोडनी पड़ेगी, सेल्स टैक्स, आयकर विभाग, एक्सैज़ , कस्टम आदि विभागों में इतनी रिश्वत चढ़ती है जितना कि इन विभागों का अपना कुल वजट भी नहीं होता है, रामदेव जी तो सिर्फ प्रेरित कर सकते हैं, प्रेरित हो आप स्वस्थ्य लाभ करते हैं तो भ्रस्टाचार को छोड़ने, रोकने के लिए क्यों नहीं प्रेरित होते ?

यादें said...

ZIAL अपने नाम के अनुरूप अपनी लेखनी से ऐसे लेख लिखती रहिये |
चला था अकेला अपनी मंजिल की और
लौग मिलते गये,कारवां बनता गया ||
शुभकामनायें !
खुश और स्वस्थ रहें !

अशोक सलूजा |

ashish said...

आप लेख के एक एक शब्द से सहमत . राजनीतिज्ञों को अपना पेट छुपाने के लिए बाबा के पीछे तो पड़ना ही पड़ेगा ना .

G Vishwanath said...

I am also with Baba Ramdev on the issue of Corruption. I salute him for bringing Yog to the common man.

Last year (March 2010) my wife and I went to Haridwar from Bangalore and spent a week at Baba Ramdev's Yog Gram. It was a nice experience.

I had written a very long report on my visit about the facilities and my experiences there.
The report is in English and I had circulated it among my friends and relatives in South India who were interested.

If anybody is interested I will make it available.
It is not a political report.
It gives information on the facilities, treatment at Yog Graam and my impressions after spending 7 days with them.
Of course some of this information is available at their web site but this report gives my actual experiences.


Regards
GV

vijaymaudgill said...

divya ji, main aap ki baat se poora sehmat hu. par kya mujhe koi ye bata sakta hai ki news shapne se, blogs par likhne se, tv par news dikhane matr se paisa vapis aa jayega. ya bharashtachar khatam ho jayega? mujhe nahi lagta. agar hum log sach main badlaw chahte hain to hume iski shuruat ghar se karni hogi. khuki bharashtachar shuru hi ghar se hota hai. for example : aapka bacha apse 2 rupya mangta hai aap use 1 rupya dete ho. kyuki ye uski umr k hisaab se theek hai aur sehat k hisaab se bhi lekin bache ko santusti nahi hoti vo apne pita k paas jata hai aur unse bhi 2 rupye mangta hai pita bhi use 1 rupya de dete hain uske to 2 rupye poore ho gaye aur aap logo ko bhi pata chal jata hai ki usne hoshiari se 2 rupye le liye hain. aap kehte ho shoro koi baat nahi bacha hai. shuru ho gaya silsila. hum log jitne bhi yaha likhne parhne wale hain ek aadmi bhi kya ye bata sakta hai jisne kisi bhi sarkari office main apni jaan pehchaan k bal par apna koi kaam na karvaya ho. fir vo rashan card banvana ho ya gas connection lena ho. dost mere sabhi se guzarish hai agar sach main kush badlaw chahte ho to pehle ghar se shuruat karo. change khud b khud nazar ayega.

shukriya divya ji ek acchi post parahne k liye.

arvind said...

aapka post padhakar majaa aa gayaa....main bhi baabaa raamdev ke saath hun.....desh our duniya kaa har imaandaar vyakti baabaa raamdev ke saath hona chaahiye...aisaa hoga bhi......shukriya.

Bhushan said...

बहुत सटीक बातें आपने कह दी हैं. काला धन वापस आना ही चाहिए.

Rahul Singh said...

विश्‍लेषण तो ईश्‍वर और अवतारों के काम का भी होता है, प्रत्‍येक चर्चित और प्रसिद्ध पर चर्चा तो होती ही है, अंधानुकरण के बजाय विचार-समीक्षा आवश्‍यक है, फिर बाबा रामदेव के विश्‍लेषण को ईर्ष्‍या मान लेना कहां तक उचित है.

उस्ताद जी said...

हम अधिनायकवाद में आस्था रखने वाले लोग हैं. दिन-रात बस यही आशा करते हैं कि कोई अवतार...कोई पैगम्बर आएगा और हमें सारी तकलीफों से निजात दिला देगा. जैसे ही कहीं कोई अलग सा दिखता है...या अलग सा बोलता है.. हम उसके पैर पकड़ कर बैठ जाते हैं.

कभी भी किसी की कही या लिखी हुयी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए. जीवन में बहुत से लम्पटबाज और धूर्त देखे हैं. जिनका लिखा हुआ पढ़ लो तो लगता है इससे बड़ा संत पैदा ही नहीं हुआ. इतना मीठा बोलने वाले देखे कि सुन लो तो शुगर की बीमारी पैदा हो जाए. हम हद से ज्यादा भावुक लोग हैं ... हमारी भावुकता का दोहन करके ही आज तक लोग सत्ता की सीढियां चढ़ते रहे.

कहने का तात्पर्य महज इतना ही है कि जो भी आरोप बाबा रामदेव पर लग रहे हैं, वो बहुत गंभीर किस्म के हैं. ऐसे बाबा से आप देश के उद्धार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ? उन्हें अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप का जवाब देना होगा. बाबा रामदेव को अगर करोड़ों देशवासियों का विश्वास जीतना है तो अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए.

G.N.SHAW said...

हर ब्लोगेर से दूर ..आप की सोंच और जुगाड़ का जबाब नहीं ! धन्यवाद ! रचना काबिले तारीफ है !

mahendra verma said...

हजारों वर्षों से लुप्तप्राय भारतीय विद्या, योग और आयुर्वेद, को पूरी दुनिया में प्रचारित करने वाले व्यक्तित्व की मंशा पर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

दशकों के बाद बाबा रामदेव जैसा व्यक्तित्व भारत में पैदा हुआ है। भ्रष्टाचार संबंधी उनकी मुहिम देशहित में है। देश के करोड़ों जन उनके इस मुहिम में साथ दे रहे हैं। केवल भ्रष्टाचारियों को कष्ट हो रहा है।

मैं कामना करता हूं कि उनकी यह मुहिम सफल हो।

Dilbag Virk said...

बिलकुल ठीक कहा आपने .
सच बोलने वालों का और सच्चाई का समर्थन जरूरी है . एक हाइकु के रूप में मैं तो सबसे यही कहूँगा
सच के लिए
नहीं बोलोगे तुम
पछताओगे

ZEAL said...

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Vishwanath ji ,

Please give the link of your report regarding your experiences during the stay in his yog-gram . I'm sure the report will benefit us .

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Kailash C Sharma said...

बहुत सार्थक प्रश्न उठाया है...सत्ता मिलाने से पहले सभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं,लेकिन बाद में सभी बदल जाते हैं..इनका इरादा भी कितना सही है यह भी देख लिया जाए..

गौरव शर्मा "भारतीय" said...

जिस देश में लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती, जहाँ आज भी अधिकाधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं, उस देश का अरबों रुपया विदेशी बैंक में पड़ा है | उसे वापस तो लाना ही होगा चाहे वह बाबा रामदेव लेकर आयें या और कोई जिससे कम से कम हमारे देश के लोगों को दो वक्त का खाना तो नसीब हो सके |
रहा सवाल बाबा रामदेव जी का तो वर्तमान में उनके द्वारा किया जाने वाला प्रयास स्वागत योग्य है |

madansharma said...

बिल्कुल सहमत हूँ आपसे दिव्या जी! उस्ताद जी का ये कहना की
@जो भी आरोप बाबा रामदेव पर लग रहे हैं, वो बहुत गंभीर किस्म के हैं. ऐसे बाबा से आप देश के उद्धार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ? उन्हें अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप का जवाब देना होगा. बाबा रामदेव को अगर करोड़ों देशवासियों का विश्वास जीतना है तो अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए.

ये पुराना घिसा पिटा सत्ता के दलालों द्वारा दिया जाने वाला कुटिल जबाब था
पर्तुल वशिष्ठ जी ने बिलकुल सही कहा है
जिस दिन सत्ता में वोटों की... खेती पर अंकुश होगा.
जिस दिन वतन से गद्दारी की... एक सजा मृत्यु होगा.
जिस दिन छिपी हुई धन-दौलत... भारत लौटकर आयेगी.
जिस दिन भोग की कल्चर पर... योग-ध्वजा फहराएगी.
उस दिन स्वाभिमान भारत का... ओजस्वी भाषा बोलेगा.
उस दिन दुबला-पतला भी... बाहों में बल को तोलेगा.
इंतज़ार है कबसे सबको ... जड़ शासन अब डोलेगा.
लाल किला न बोले बेशक ... लाल चोला ही बोलेगा
लगे रहिये आप! , हमारी हार्दिक शुभ कामनाएं .........

घनश्याम मौर्य said...

कहानी के माध्‍यम से भारतीय लोगों की मानसिकता पर करारा व्‍यंग्‍य किया है आपने। हमारे सामने केवल रामदेव का ही उदाहरण नहीं है। देश के कई आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्‍या केवल इसलिए कर दी गई कि वे भ्रष्‍टाचार को उजागर करने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन हम भारतीय दरअसल उस नाली के कीड़े की तरह हैं, जिसे कितनी बार भी नाली से बाहर निकालो, वह वापस रेंगकर नाली में पहुँच जाता हैा बदबू और गंदगी के बगैर उसका सांस लेना दूभर हो जाता है। हम भी सडे गले सिस्‍टम में रहने के आदी हो गए हैं। इसलिए जो भी इस सिस्‍टम को सुधारने की बात करता है, वह हमें अपना दुश्‍मन लगता है। यही वजह है कि हमारे यहां कभी मिस्र या लीबिया जैसी क्रान्ति नहीं हो सकती।

Rakesh Kumar said...

एक सुव्यवस्थित 'वाद' के दर्शन कर रहा हूँ आपकी पोस्टों पर .मुझे तो आनन्द आ रहा है. इसके लिए आपको और सभी टिपण्णी कर्ताओं को हार्दिक बधाई.'ऐसी वाणी बोलिए' पर भी आपका इंतजार है.

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

सटीक , सार्थक और समसामयिक मुद्दा जिससे शयद हर सामान्य भारतीय की भावनायें जुड़ी है क ह्ल निकलना ही चाहिये और इसमें बाबा रमदेव सारथी बनें हैं तो इस देश के हित में होगा। विचार मंथन के लिये आपके ज़ज़्बे को सलाम।

राज भाटिय़ा said...

बाबा राम देव जी के संग सारा देश उठेगा, आप देखती रहे, ओर यह सब चोर उचक्के अपना काला मुंह कर के कहां भागेगे?वो चाहे लाळू हो या कालू हो....इस सुंदर लेख के लिये आप का धन्यवाद

एस.एम.मासूम said...
This comment has been removed by the author.
एस.एम.मासूम said...

अपनी रोटी पे मौक़ा देख के सभी दाल खींचने मैं लगे हैं.
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विवाह से पूर्व लड़की से राय अवश्य लें. Womens Day special

मनोज कुमार said...

हम आपसे बिल्कुल सहमत हैं।
इस मुहिम में हम सबको साथ होना चाहिए।

प्रवीण पाण्डेय said...

जो भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़ा हो, मैं उसके साथ हूँ।

आशुतोष said...

Ramdev un sabhi hindusthaniyon ke nayak hai jo is brast system kae khilaf kahden hai..
aap ki kriti ko badhaiyan..

सञ्जय झा said...

is santulit vimarsha pe ustadji ji tippani samuchit lagi........

filwaqt tak 'bawa par bharosha' hai lekin itihas
ko dekhte hue 'vhavishya ke liye sakansh' rahne
ki jaroorat hai.........

pranam.

anand said...

Well written dr divya .albeit its a lil tough to comment on my fellow indians ,but indeed apparently we refuse to grow ,get educated and upgrade ourselves ..
the matter of shame and gloom is all of us ,,,singling out a few odd men and women ,we r self centred ,ego centric and innocently ignorant ...we indeed dont know wot we want ,nor we have the audacity to call a spade a spade ..
how many are the politicians when compared to the subjects ,,,,gosh its just like a bucket of water against an ocean and yet we love to be taken for a ride by these selfish clan ..
wot r these black money holders acheive or derive pleasure at the end of the day ...for a brief time can just afford to make tall claims that they are millionaires and trillionaires ,and they will not get an oppurtunity to use that money in their life time too ...thanks to their perpetual pursuit of making money by hook or by crook and evade taxes the cash bells keep ringing in their vaults ....
according to me the blackmoney hidden in the swiss banks if just paper currency for them and a wastage of space may be (forgive my ignorance ,am not too adept with the top level banking transactions) while the same money in india could be a real life saver for so many of our fellow beings and the harbinger of a new dawn for a new india ....
why dont we atleast dream of seeing india emerging as a super power when we are very much alive ...
ram dev baba and his likes will have my support allways ..i am proud of his humble and integrated effort in this cleansing operation ...may god be with him in this noble pursuit .......jai hind
ty divya for initiating such a wonderful topic ....these real life heroes are bound to attract so many bad friends for sure ,lol

शोभना चौरे said...

दिव्याजी
आपकी इस मुहीम में मै आपके साथ हूँ |
हम तो कुछ करते नहीं ?और करने वालो की तंग खींचने के काम को अपनी बुद्धिमता समझते है |
विश्वनाथ जी बात से भी पूर्णत सहमत |

anand said...

i write so much and none even bother to comment on my views ...wot a fall my countrymen ...wot a fall :(:(

Rakesh Kumar said...

आप ने 'ऐसी वाणी बोलिए' पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाया है.आपसे मेरा पुन: निवेदन है की आप अपनी पोस्ट द्वारा भी हमारा ज्ञानवर्धन कीजिये.एक सुंदर गाने के बोल भी तो है "मिले सुर मेरा तुम्हारा ..
तो सुर बने न्यारा "

Sawai Singh Rajpurohit said...

आज मंगलवार 8 मार्च 2011 के
महत्वपूर्ण दिन "अन्त रार्ष्ट्रीय महिला दिवस" के मोके पर देश व दुनिया की समस्त महिला ब्लोगर्स को "सुगना फाऊंडेशन जोधपुर "और "आज का आगरा" की ओर हार्दिक शुभकामनाएँ.. आपका आपना

ZEAL said...

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Anand ji ,

Please do not feel bad . We all are reading you . Your views are very strong , effective and expressed beautifully. I appreciate your thinking and contribution here.

As you rightly stated , at the end of the day we all need just two breads and a space of 3 by 6 ft only. I wonder , why some people need so much of money , which they can never use in one life time. When this avarice will end ?

One must support to the selfless lot who are dedicating their lives for the sake of their motherland.

We are indeed fortunate to have people like Baba Ramdev and Kiran Bedi in this ERA .

They are a perfect blend of Gandhi and Bose .We need them.

Thanks for your valuable comment.

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STRANGER said...

ha ha ha......ये भारतीय केंकड़े हैं । जैसे ही कोई ऊंचाई तक पहुंचेगा, नीचे वाले उसकी टांग पकड़कर खींच लेंगे

True....I am regularly watching "Astha Channel". Baba Ramdev is doing finest job. He is not only teaching Yog and thereby increasing health awareness among people but also giving a "wake-up-call" against corruption despite barriers.

In my earlier posting, I had requested religious Gurus to take up such issues and I find Baba Ramdevji doing exactly what I had wished. I hope many more Gurus will join the fray. We must strengthen his hands by joining his mission.

Jai Shri Krishna

ZEAL said...

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प्रत्येक टिप्पणीकार का जवाब देना मेरे लिए संभव नहीं है , लेकिन यकीन जानिये , प्रत्येक टिपण्णी में कुछ नए विचार होते हैं , जिसे मैं गंभीरता से पढ़ती हूँ , मनन करती हूँ और यथावश्यक आत्मसात करती हूँ।

आनंद जी मेरे ब्लॉग पर नए हैं, निवेदन है कृपया बुरा न मानें । आप सभी के बहुमूल्य विचारों से हम सभी का लाभ होता है और विचारों को आयाम मिलता है ।

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Abnish Singh Chauhan said...

मैं आपकी बात का पूर्ण समर्थन करता हूँ. सराहनीय.

smshindi By Sonu said...

"समस हिंदी" ब्लॉग की तरफ से सभी मित्रो{महिला } और पाठको को "महिला दिवस" की बहुत बहुत शुभकामनाये !


.~~~ महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें .~~~

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
लिंक है http://smshindi-smshindi.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

आपका कीमती सुझाव और मार्गदर्शन अगली पोस्ट को और अच्छा बनाने में मेरी मदद करेंगे . धन्यवाद

G Vishwanath said...

Divyaji,

I will email the report to you privately.
I don't think any body else is interested.
It is a long report in 5 parts and it also contains links to some pictures that I captured using my cell phone camera.
Regards
GV

राजेश सिंह said...

बेबाक,साहसिक और सर्तक विचार

एक लौह युवती सचमुच बधाई

राजेश सिंह said...

बेबाक,साहसिक और सार्थक विचार

ऍन आयरन लेडी सचमुच

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