Wednesday, March 2, 2011

आरक्षण और देश का विकास

लोग दावा कर रहे हैं की भारत देश एक सुपर पावर बन कर उभरेगा सन २०२० तक जापान को पीछे छोड़ देगा और सन २०५० तक अमेरिका समेत पृथ्वी के सभी देशों को पीछे छोड़कर , सबसे ज्यादा Economically strong राष्ट्र बन जाएगा

लेकिन आरक्षण जैसी प्रथा का चलन अपने देश में होने के कारण , देश का विकास होना नामुमकिन सा लगता है आजादी के बाद नेहरु द्वारा शूद्रों तथा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करना तथा वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन जैसी योजनाओं ने देश को तकरीबन ३०-४० वर्ष पीछे धकेल दिया है आरक्षण द्वारा कभी भी , किसी भी देश का अथवा समुदाय का विकास नहीं हो सकता। आरक्षण देकर तत्कालीन सरकार अपने दायित्वों से भागती है और अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि के लिए एक समुदाय विशेष को प्रसन्न कर अपनी कुर्सी बचाए रखने की नाकाम कोशिश करती है उनका स्वार्थ तो सिद्ध हो जाता है , लेकिन देश का विकास रुक जाता है

पिछड़े वर्गों को आरक्षण - पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के कारण ही वो कभी आगे नहीं पाते उनके अन्दर एक अकर्मण्यता सी जाती है वो आरक्षित सीटों को बपौती समझते हैं और अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने से कतराते हैं। जिसके चलते पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्ति भी गर्व के साथ सर उठाकर नहीं चल पाते क्यूंकि उनके साथ 'आरक्षण' का तमगा जुडा होता है उनके स्वयं के प्रयासों को लोग आरक्षण द्वारा प्राप्त उपलब्धि कहकर नकार देते हैं , जिससे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कुंठा का शिकार होते हैं और बहुत सी जिल्लत सहन करते हैं। प्रतिभाएं किसी भी प्रकार के आरक्षण की मोहताज नहीं होतीं।

अल्पसंख्यकों को आरक्षण - रंगनाथ मिश्रा जैसी रिपोर्टों में, जिसमें १५ % में से , १० % मुस्लिम समुदाय के लिए और शेष % अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षण की माँग की गयी है , अत्यंत बचकानी लगती है अल्पसंख्यक होने के नाम पर आरक्षण को माँगना , भीख माँगने जैसा है सभी के साथ 'भारतीय' होने का गर्व जुड़ा हुआ है , फिर अपने को कमज़ोर बताकर और ज्यादा की माँग करना उचित नहीं है इस तरह से माँग करके हम हज़ारों अन्य प्रतिभाशाली भारतीयों का हक मारते हैं इनका देखा-देखी अब महाराष्ट्रियन समुदाय ने भी अपने लिए आरक्षण की माँग बुलंद कर दी है इस तरह हर समुदाय यदि माँग करेगा तब तो देश खंड-खंड में बँट जाएगा अखंड-भारत में आरक्षण की ये माँग उसकी गरिमा और वृहत दृष्टि को संकुचित करती है

महिलाओं के लिए आरक्षण - आरक्षण देने के साथ ही हम ये साबित कर देते हैं की ये वर्ग विशेष किसी किसी तरह से कमतर है किसी भी वर्ग विशेष को आरक्षण देना उसका सरासर अपमान है आज जो महिलाएं देश विदेश में , संसद में , अनेक संस्थानों में अपना परचम लहरा रही है वो किसी आरक्षण द्वारा नहीं आई हैं। प्रतिभाओं के विकास के लिए योजनायें बनानी चाहिए , लेकिन आरक्षण देकर किसी भी समुदाय को नाकारा बनाकर , तथा सब कुछ आसानी से सुलभ कराके , हम उसके जुझारू व्यक्तित्व को ही समाप्त कर देते हैं। महिलाएं भी आरक्षण की मोहताज नहीं करना ही है तो उनके सामने आने वाली समस्याओं के निदान पर सकारात्मक योजनाओं की जरूरत है

गरीबों को आरक्षण -- अक्सर लोग कहेंगे आरक्षण सिर्फ गरीबों को मिलना चाहिए नहीं , कतई नहीं मिलना चाहिए गरीब जनता को आरक्षण कुछ नहीं दे सकता अरबों का घोटाला रोककर , पूरे देश की गरीब जनता का आसानी से उद्धार किया जा सकता है गरीबों की जरूरतों को समझने की जरूरत है और उस दिशा में अविलम्ब क्रियान्वयन की उन्हें आरक्षण की भीख और सत्ता की सहानुभूति नहीं चाहिए। गाँव और कस्बे में अस्पताल , स्कूल और अच्छे शिक्षक चाहियें , आरक्षण नहीं।

आरक्षण द्वारा हम गरीब और अमीर के बीच के फर्क को और बड़ा करते हैं इसी प्रकार पिछड़ी जाति को और पीछे धकेलते हैं महिलाओं को आरक्षण देकर उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अल्पसंख्यकों के नाम पर आरक्षण माँगकर हम उस समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं।

आरक्षण मिलना भीख मिलने के समान है जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्व पर एक बदनुमा दाग है और लोगों को संघर्ष से विमुख करता है आरक्षण के कारण बहुत से सामान्य वर्ग वाले निर्दोष विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है , काबिल होते हुए भी कुछ हासिल करने से वंचित रह जाते हैं। बेरोजगारी और कुंठा का शिकार होते हैं। इसलिए आरक्षण का दानव देश के विकास में एक ग्रहण जैसा है जो उसे आगे ले जाने के बजाये कई दशक पीछे ले जाता है।

आभार

105 comments:

अजय कुमार said...

जातिगत नहीं ,गरीब को मुफ्त में अच्छी पढ़ाई की सुविधा मिले तो आरक्षण की जरूरत नही होगी ,गरीब जब पढ़ेगा ही नहीं तो क्या फायदा ,फिर तो उस तबके का सबल इसका लाभ लेगा ।

OM KASHYAP said...

JI AAPNE SAHI KAHA
PARTIBHAYE KISI KI MOHTAJ NAHI HOTI
BAKI SAB RAJNITI

: केवल राम : said...

आपका कहना सही है .....आरक्षण का लाभ सही व्यक्ति को मिलना चाहिए ..और यह तभी संभव है जब हम भ्रष्ट न हो ..और यह जातिगत आधार पर न होकर आर्थिक आधारों पर होना चाहिए

Sawai Singh Raj. said...

आदरणीय डॉ.दिव्याजी,
नमस्कार

आपका आलेख सराहनीय है
भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था इसलिए की गई ताकि सामाजिक,आर्थिक तथा राजनैतिक रूप से कमजोर पड़े दलित एवं पिछड़े समुदाय के लोगों का विकास हो सके तथा कमजोर पड़े ये लोग समाज की
मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें। लेकिन आरक्षण का कोई भी स्वरूप“महिलाओं के लिए फायदेमंद नहीं है यदि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं”
यदि समाज के गरीब वर्गों को वास्तव में आगे बढ़ाना है तो उन्हें और अधिक शिक्षा सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि वे आरक्षण लाभ ले सके!

दर्शन कौर धनोए said...

आरक्षण एक दानव के समान हे सबकुछ हजम ! यह सच हे की हमारे देश की प्रगति इसके कारण नही हो पा रही हे पर इन देश के कर्णधारो को कोन समझाए | कई प्रतिभावान छात्र गरीब हे और उच्च जाती के हे पर उनको अपनी प्रतिभा दिखने का मोका नही मिलता --आंसू बहाकर रह जाते हे
आज तो खुद को निम्न जाती का बतलाना गोरव की बात हो गई हे |

आशुतोष said...

विडंबना ये है की इस आरक्षण का फायदा समाज के जरूरतमंद तबके को नहीं होता है..
क्रिमिलयेर मलाई मार रहें है.
अल्पसंख्यक को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करतें है...और बहुसंख्यक होना इस आरक्षण कें कारन अपराध सा लगता है..
सामाजिक खायी बढती जा रही है ....हिंदी को मैकाले के गुर्गे हज़म कर रहें है..
एक और बात की हमारी जनसँख्या १३० करोड़ है.. हम विकसित देश कहलाने का लक्ष्य ३५ करोड़ मद्याम्वार्गीय परिवारों से पा सकतें है..भले ही बाकि १०० करोण रोज २०-२५ रूपये पर जियें हिन्दुथान विकसित कहलायेगा....
और नेता लोग आरक्षण का ढोल पिट कर वोट भी ले जायेंगे...

समय आ गया है जब हम कहें की..

याचना नहीं अब रण होगा
जीवन जय या की मरण होगा
................................................
आशुतोष

मनोज कुमार said...

संविधान निर्माताओं ने भारत की सामाजिक-अर्थिक परिस्थितिओं का अकलन कर यह प्रावधान किया था।
समय-समय पर इस पर विचार-विमर्श होते रहते हैं। हमें अपनी संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास है। उचित निर्णय लिया जाएगा।

सञ्जय झा said...

kalantar se prakarantren samaj me jo vishamta badhi hai..........uske liye 'aarakshan' ....
samanya nagrik bodh ke tahat 'swikarya' hone chahiye......

lekin....karya aur uske kriyanwayan ke liye jo imandari ki litmus chahiye hoti hai.....lok aur samaj me uska ksharan .....pratigami hue hain...

......sawal hai parinam kya mil raha hai.......

pranam.

निर्मला कपिला said...

हमने तो बाजपई जी को भी वोट इसी कारण डाला था मगर लगता है कोई पार्टी इस पर अपना मुँह नही खोलेगी। कुर्सी का मोह कहाँ कोई सुधार करने देता है। शुभकामनायें।

amit-nivedita said...

my views are stll the same:http://amit-nivedit.blogspot.com/2011/02/blog-post_19.html

Mukesh Kumar Sinha said...

agreed...........! agar sach me reservation jaisa kuchh dena hai to govt. ko sirf unhe padhai me suvidha dena chahiye..........ab kam marks pane wala agar doctor banta hai to pata nahi kya karega mareej ka...:(

par sarkar aisa kar nahi sakti, unhe to vote chahiye..

ashish said...

आरक्षण समाज को बांटता है , ज्रारुरत मंदों को उनके पढाई लिखाई के लिए सरकार को कुछ करने की जरुरत है . वैसे भी इसका मज़ा मलाई दार लोग ही उठाते है

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

इस पर टिप्पणी माडरेट मत कीजियेगा...

गिरधारी खंकरियाल said...

आरक्षण से दुश्वारियां ही बढ़ी हैं. सुधार नहीं . जब अयोग्य व्यक्ति सरकारी पद पर गरिमामय आसीन होंगे तो गुणात्मकता कहाँ रह जायेगी . पुनः शच विद्यार्थियों को इस दिशा में राष्ट्र व्यापी आन्दोलन करना चाहिए

Bhushan said...

ऊपर दिए गए कमेंट्स में काफी कुछ आ गया है. आपसे सहमत हूँ कि आरक्षण एक निकृष्टतम तरीका है. यदि हमारा राष्ट्रीय चरित्र सुदृढ़ होता तो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गाँवों में बिना जातिगत भेदभाव के अच्छी और मुफ्त शिक्षा दी जाती. अब तक तीसरी पढ़ी लिखी जागरूक पीढ़ी तैयार हो चुकी होती और भारत के गरीब की संतान को देश की अमानत समझ कर योजनाएँ बनाई जातीं. परंतु हमारा समाज तो आज भी जागरूक नहीं है. दिल्ली के कनॉट प्लेस में घूमते भिखारी बच्चे देश की अमानत हैं या नहीं, यह प्रश्न आप किसी से भी पूछिएगा और उत्तर देने वाले के चेहरे के उतरते चढ़ते भावों को पढ़िएगा और उत्तर भी सुन लीजिएगा.
बढ़िया पोस्ट. बधाई.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

आदरणीय दिव्या जी ,

बहुत ही सामयिक एवं ज्वलंत विषय पर आपने लिखा है |

संविधान निर्माताओं ने जिस उद्देश्य के तहत आरक्षण की व्यवस्था लागू की थी , वह उद्देश्य था-समाज के सभी जाति-वर्ग के लोगों को एक समान आर्थिक और सामाजिक धरातल पर लाना | मगर आज इसका एक मात्र उद्देश्य वोट हथियाना है | आरक्षण का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पा रहा है | वास्तविक आरक्षण , सभी जातियों-वर्गों के गरीब लोगों को मिलना चाहिए , वह भी आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने ,अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए | आज वोट की लालच में कोई भी राजनैतिक पार्टी सही कदम नहीं उठा सकती |

प्रवीण पाण्डेय said...

आरक्षण का स्वरूप ऐसा हो कि देश के विकास में बाधा न पहुँचे।

kamlesh jha said...

Divya ji,door desh mai baith kar comment karna bahoot aasan hai. aap kabhi Bundelkhand kai gaon main jakar dekhain, pichhdi aur nimn jation ki jo durdasha hai unhe dekhkar lagta hai ki reservation ki vastav mai aavashakta hai, bus jaroorat uske iemandaare se laagu karne ki hai.

G Vishwanath said...

I have always been against reservation.
I support reservation only for the physically handicapped.

What do you feel about the bill for reserving seats in parliament for women?

Regards
GV

अरविन्द जांगिड said...

बहुत ही गहनता से लिखा है आपने! जब तक जातिवाद समाप्त नहीं होगा आरक्षण जैसी समस्याओं का कोई हल नजर नहीं आता. राजनैतिक पार्टियों में इस समस्या का समाधान ढूंढना सही नहीं हैं, ये एक सामाजिक समस्या है जो व्यक्ति के मूलभूत ढांचे से जुडी है. ये हर्ष का विषय है की धीरे धीरे जातिवाद अपनी पकड़ खोता जा रहा है.

आभार.

********
कृपया नई पोस्ट पर पधारें साथ अँधेरों का निभाना.....

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (2-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

सदा said...

बहुत ही सटीक बात कही है आपने इस आलेख में ...आभार ।

गणेश जोशी said...

वास्तव में तब दिल में शूल जैसे चुभते है, जब जबरदस्ती का आरक्षण दिए जाने की राजनीति होती है, योग्यता को दरकिनार कर दिया जाता है. हमारा भारत कब विकसित होगा क्या हम केवल उम्मीद ही कर सकते है या फिर कुछ पहल भी करंगे. हमारा योगदान कितना होगा... हमें किस तरह आगे आना होगा, इस पर केवल विचार ही नहीं करना है बल्कि अमली जामा भी पहनाना होगा.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

कमज़ोर वर्ग को शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता देने की बात तो ठीक है मगर जाति और धर्म के आधार पर आरक्षण देकर किसी योग्य प्रतिभा से उसका हक़ छीन लेना सरासर गलत है !
आपका लेख विचारणीय है !
महाशिवरात्रि की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएं !

Kunwar Kusumesh said...

मनोज जी की बात से सहमत.

ADITI CHAUHAN said...

aapne bahut hi sahi likha hai.
hamaare samajh men aaj tak nahi aaya ki ye kaisi neeti hai ? agar kisi kamjor ko majboot banaana hai to usko doosre tareekon se majbut banayen lekin yogyta ko najar andaj karna kahan ka nyaay hai.

Dilbag Virk said...

kaha to aapne theek hai lekin voton ki rajniti ke chlte aarkshn band kaun kre

yhi to bhart ka durbhagy hai

mahendra verma said...

आरक्षण नीति से देश का हित कम और अहित अधिक हुआ है।
आरक्षण के कारण बहुत से अयोग्य व्यक्ति शासकीय सेवाओं में चयनित हो जाते हैं और बहुत से योग्य उम्मीदवारों का चयन नहीं हो पाता।
लेकिन विडंबना तो यह है कि वोट की राजनीति के कारण कोई भी राजनैतिक दल आरक्षण को समाप्त करने का साहस नहीं कर पाएगा।

गौरव शर्मा "भारतीय" said...

आपकी बैटन से सहमत हूँ इस मामले में राजनैतिक लाभ हानी से परे हटकर न केवल विचार करने की वरन राष्ट्रहित में उचित निर्णय लेने की भी आवश्कता है |
सार्थक एवं प्रभावी पोस्ट के लिए आपको सादर साधुवाद...

smshindi By Sonu said...

आदरणीय दिव्या जी ,

आज की सर्कार के पास इतना समय भी नहीं कि आरक्षण विषय पर अधिक माथापच्ची कर पाएं ।

V!Vs said...

kya sahi h kya galat usko to mei nhi kah sakta hu, lekin 3000 saalon se kuchle gaye samudayo ke liye aarakshan sahi h. Ek baar mei CNBC par discussion dekh rha tha to uska conclusion nikla ki ek family se ek vyakti ko hi aarakshan dena chahiye, aur uske baad uski agli peediyo ko nhi dena chahiye. kyuki aarakshan paya vyakti apni family ki sthti bhi sudhar lega aur family ki aane bali peediyon ki bhi, aur mi is baat se poorntahaa sahmat hoon.

Patali-The-Village said...

आरक्षण का स्वरूप ऐसा हो कि देश के विकास में बाधा न पहुँचे।
आप को महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ|

डा० अमर कुमार said...

.
पोस्ट से सहमत
बहुत हो चुकी धूर्तता अब और सह + मत

राज भाटिय़ा said...

आरक्षण एक लानत हे देश पर, जब किसी को पकी पकाई मिलेगी तो कोई मेहनत क्यो करेगा? जिस मे योग्यता हो वो खुद ही आगे आयेगा,अगर सरकार अच्छा काम करना ही चाहती हे तो पढाई को मुफ़त कर दे, पढाई सब के लिये हो ओर जरुरी भी ओर बिलकुल मुफ़त, फ़िर देखे केसे भारत मे होनहार लोग आगे आते हे, ओर केसे नही देश तरक्की करता, यह आरक्षण सिर्फ़ एक लानत हे ओर कुछ नही, ओर हम इस झुनझुने को ले कर बहुत खुश होते हे.
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

डॉ टी एस दराल said...

अच्छे विचार प्रस्तुत किये हैं ।
लेकिन किस काम के !

शोभना चौरे said...

बिलकुल सही कहा है जब ईश्वर ने हर इन्सान को समान बनाया है शारीरिक क्षमता में , बौधिक क्षमता में फिर वर्गीकरण क्यों ?
योग्यता के बल पर ,मेहनत के बल पर पद मिले न की आरक्षण की बैसाखी लेकर |

madansharma said...

आपका कहना बिलकुल सही है आज देश की बर्बादी का कारण
सरकार की गलत नीतियाँ ही हैं जो की वह अपने वोट बैंक के
अनुसार बनाती है इन्हें देश से कोई भी मतलब नहीं है इन्हें सिर्फ
अपने वोट बैंक की चिंता है चाहे सरकार के रूप में कोई भी पार्टी हो
हर पार्टी इसमें शामिल है हम खुद को भी इस दोष से अलग नहीं
कर सकते. आखिर हम भी तो इस तरह की नकारा सरकार के
गठन में पूरा सहयोग देते हैं. लेकिन हम चुने तो चुने किसको?
एक तरफ नागनाथ है तो एक तरफ सापनाथ!

रचना दीक्षित said...

बहुत सटीक लेख. निर्णय यदि राष्ट्रहित में हो तभी लिया जाना चाहिए.

Rahul Singh said...

अपनी प्रतिभा, योग्‍यता और क्षमता का अधिकतम उपयोग स्‍वहित और राष्‍ट्रहित में होना ही चाहिए, लेकिन जन्‍मना या सामाजिक परिस्थितियों के कारण जिनके अवसर कम हो जाते हैं, उनको दृष्टिगत करते हुए आरक्षण की तार्किक और व्‍यावहारिक उपयोगिता का भी एक सबल पक्ष है.

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति|

महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ|

BK Chowla, said...

I am personally against any reservation in any category.It may be politically right, but it will destroy our social structure

Udan Tashtari said...

विचारणीय आलेख.

Atul Shrivastava said...

देश में जातिगत आरक्षण बंद होना चाहिए।
गरीबों को आरक्षण दिया जाए तो वे भी आगे आ सकते हैं, लेकिन इसमें भी लोचा है। अब तो सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए अमीर भी गरीबी रेखा के नीचे की सूची में नाम दर्ज करा रहे हैं।
कुल मिलाकर ये सब राजनीतिक फायदे के लिए ही है।
अच्‍छा लेख।

वाणी गीत said...

यदि सभी को निःशुल्क शिक्षा और निश्चित रोजगार के समान अवसर प्राप्त हों तो आरक्षण की आवश्यकता कहाँ है ...इस व्यवस्था ने देश का जो बंटाधार किया है , दिख ही रहा है ...
एक तरफ शोषितों और पीड़ितों को मुख्य धारा में शामिल करने की बात है , दूसरी और आरक्षण देकर उन्हें अलग- थलग करना ...दुःख ये है की वे खुद भी इस बात को नहीं समझते !

Deepak Saini said...

सरकार की आरक्षण निती के मै सैदव खिलाफ रहा हूँ इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा है। इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण देता हँू, मेरे गाँव मे लगभग 250 परिवार बीपीएल मे है जिनको सरकार द्वारा पेंशन, अनाज आदि सब कुछ लगभग फ्री मे दिया जाता है लेकिन उन की हालत और भी बदतर होती जा रही है क्योकि उन परिवारो मे से अधिंकाश परिवार के मुखिया कोई काम ही नही करते अनाज, दवा आदि तो मिल ही जाती है तो क्यों करे।
दूसरी ओर कुछ परिवार ऐसे है जिनको वाकई जरूरत है लेकिन किसी आरक्षण मे नही आते।
आभार

aarkay said...

सटीक ,सामायिक , तर्क की कसौटी पर खरा उतरने वाला पर शायद " politically
incorrect "
बधाई !

Sandeep said...

Reservation is the Representation of Unrepresented .
Persons who are against reservation are either too cunning or they must be unaware of the ground realities.
The day when no caste system would be there and uniform education system would be there unlike in present where some students study in convent schools and many in gov. schools will be the day when there will be no reservation system.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

आरक्षण शब्द ही अयोग्यता का पर्याय सा लगता है. सुन्दर सार्थक पोस्ट. हर आरक्षित वर्ग पर बारीक नज़र डाली है आपने.

Sandeep said...

There is nothing new in this post , the writer's psyche is the exact replica of the perception created by the biased mainstream media.Hence the post is itself a one sided game.

जयकृष्ण राय तुषार said...

डर दिव्या जी एक सुखद समाचार है की हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय ने प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगा दिया है इससे प्रतिभाशाली व्यक्तिओं को लाभ मिलेगा |भारतीय कानून में कोई खामी नहीं है उसे लागू करने वाले गैर जिम्मेदार हैं |यहाँ कानून १०० साल पीछे चलता है |बधाई |

Parashuram Rai said...

इतिहास में मैं काफी कमजोर रहा। इसलिए इस पक्ष पर बात करना मेरे लिए उचित नहीं होगा। पर इतना तय है कि हमारे देश में आरक्षण मात्र एक राजनीतिक मुद्दा रहा है, विशेषकर सत्तर के दशक से। जिन्हे आरक्षण का लाभ लगभग 1965 तक मिला, आज भी वे ही लोग उसका लाभ उठा रहे हैं। इस आरक्षण-नीति की आड़ में राजनीतिज्ञों ने आरक्षित वर्ग का जितना शोषण किया है, शायद उतना और किसी ने नहीं। बिना किसी लाभ के समाज में विभाजन और वर्ग-संघर्ष की स्थिति जितना इस नीति ने किया, उतना अंग्रेज भी नहीं कर पाये। इस प्रकार का मुद्दा उठाने के लिए आभार।

सम्वेदना के स्वर said...

जब तक देश की व्यव्स्था सभी को मूलभूत जरुरते (रोटी,कपड़ा,मकान,शिक्षा और स्वास्थ)उपलब्ध नहीं कराती आरक्षण जैसे खेल होते रहेंगे।

हमें नहीं भूलना चाहिये कि जिसे हम प्रतिभा कह रहें है वह हम में से अधिकांश को, एक सुविधा सम्पन्न घर में पैदा होने के कारण सहज ही मिल गयी है।

अवसरों की समानता बहुत जरुरी है, प्रत्येक भारतवासी के लिये!

Rakesh Kumar said...

आरक्षण केवल तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम है.प्रजातंत्र में जीत वोटो की संख्या पर आधारित है .हर कोई प्रेय मार्ग को अपनाना चाहता है फिर चाहे वो नेता हो और चाहे वो आरक्षित वर्ग बिना दूरगामी परिणाम पर ध्यान दिए.पढ़ेलिखे लोग तक भी राजनीति में आकर खुल कर नहीं बोल पाते .यह देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है.धर्म और जातियों में होड लगी हुई आरक्षण की मांग को लेकर .गुर्जर आरक्षण ,जाट आरक्षण,मुस्लिम आरक्षण ,जैन आरक्षण और न जाने क्या क्या. काश! सभी मिल-जुल कर अपने और देश की खातिर ईमानदारी से सोच पाते और आरक्षण के धीमे विष से निजात पाने का कुछ सार्थक प्रयास कर पाते .
अति सुंदर और सार्थक आलेख,बहुत बहुत आभार .

manav vikash vigyan aur adytam said...

achhi prastuti

Sunil Kumar said...

आरक्षण एक बैसाखी जैसी है जो किसी अपाहिज के हाथ में तो ठीक लगती है मगर दुसरे के हाथ में भद्दी लगती है

भारत said...

बाते भाव्तान्मक और एक तरफ़ा है पहले आप को ये सोचना चाहिए ,एसे हालत ही क्यों है की किसी को आरक्षण दिया ही क्यों गया
एसे हालत क्यों आये की आरक्षण की जरुरत करनी पड़े ,
ये सब किया कराया तो उच्च वेर्ग का ही है
एकलव्य के कोई नाक नही बहती थी ,न ही उसके सर पर शीग नही निकले थे ,जो उसको शिक्छा नही दी गयी
वो जो था अपने दम पर था
यही हालत पर सब शुद्रो की थी ,ना तो पढने का अधिकार था ना राजकाज ने हिस्सा था ...
इस लिए वो पिछड़े ,गरीब ,अनपद ,दुसरो से कम जानने वाले थे
समाज की खराब स्तिथि का यह सबसे बड़ा कारण था ,
आरक्षण से कुछ को फायदा और नुक्सान भी है ,मैंने देखा अपने आस पास
आरक्षण सही और गरीब को मिले ,चाहे वो किसी वेर्ग का हो

mridula pradhan said...

arakchchan shabd hi to unhen baki logon se alag kar deta hai....saath-saath nahin chalne deta hai.

prritiy---------sneh said...

bahut sahi kaha aapne, aarakshan na dekar protsahan va sahuliyat deni chahiye, lekin kamjor arthat garibon, sadhan heen ko. jab ek tathakathit swarn lipik apna pariwar paal sakta hai to tathakathit aarakshit varg ka lipik kyu nahi?

bahut hi achha likha hai aapne.

shubhkamnayen

कुश्वंश said...

दिव्या जी , एक सही समय पर ज्वलंत विषय पर लिखा है आपने, विषय हलाकि पुराना है लेकिन देश की economically स्ट्रोंग होने के परिपेक्च में इसे देखना एक सही दिशा में सही कदम है आपका और एक सही वश्लेषण, अगर आज सर्वेक्चन कराया जाये तो कम से कम , साठ प्रतिशत लोग आरक्षण के विरोध में रहेगे, सुविधाओ का आरक्षण होना चाहिए और सख्ती से लागू होना चाहिए बिना बीच से भ्रस्ताचार के, जिससे सही अर्थो में ऊपर उठेंगे लोग और एक दिन एषा आयेगा की किसी भी आरक्षण की जरुरत ही नहीं होगी, हमें बताये की देश सम्रध देश में आरक्षण लागू hai , फिर कई हम विकसित देश है

nnayarasta said...

जाति आधारित आरक्षण नहीं लेकिन आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए| हालाँकि ये बातें पहले भी आ चुकी हैं लेकिन फिर भी मैं कह रहा हूँ| मैं नहीं मानता की आरक्षण से विकास पर कोई फर्क पड़ता है| इसके वर्तमान स्वरुप पर सवाल ज़रूर खड़े हो सकते हैं लेकिन समाज में आरक्षण मिलना चाहिए|

मुनव्वर सुल्ताना said...

एक बार मनीषा दीदी ने आरक्षण के बारे में लिखा था लेकिन वह लैंगिक विकलांगता के चलते विषय से संबद्ध था। क्या आपको लगता है कि इस आधार पर आरक्षण के विषय में विचार विमर्श हो सकता है?
सस्नेह
मुनव्वर सुल्ताना

sanjay said...

आरक्षण से लेकर पुनर्जन्म तक के मुद्दे पर लिख कर आपने जिस तरह से भारतीय समाज के सुधार का बीड़ा उठाया है उसके लिये सादर आभार। क्या संजय कटारनवरे के सवालों के जवाब देना उचित नहीं हैं या उन उत्तरों से समाज में बिगाड़ आ जाएगा। आपने कहा था इसलिये बिना शर्माए और गंगाजल लिए आपके चिट्ठे पर आ गया। कमेंट प्रकाशित न करके आप अपने लौहत्त्व को और ज़ंग लगा लेंगी।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

pahla hee comment sat pratishat meri baat kehta hai... आरक्षण की जरूरत नहीं इस देश को... अपंग और निट्ठल्ला बनाए रखने की योजना है ये ... सिर्फ जो जरूरत है वो है हर गरीब को रोटी कपडा मकान के साथ साथ शिक्षा और स्वस्थ की सुविधा मिले ...लेकिन आरक्षण तो वह भी ना हो...

ZEAL said...

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प्रिय मुनव्वर सुल्ताना ,

सस्नेह अपने विचार रख रही हूँ यहाँ ।

किसी भी प्रकार के आरक्षण की मांग स्वयं को विकलांग साबित करना हुआ । लैंगिक विकलांगता की मांग तब होती है जब ये समुदाय विशेष , समाज में उनके प्रति हो रहे भेद-भाव से पीड़ित होता है । इस पीड़ा को आरक्षण से कम नहीं किया जा सकता । न ही समाज का नजरिया आरक्षण द्वारा बदला जा सकता है । व्यक्ति यदि लैंगिक रूप से विकलांग है तब भी वो एक सामान्य व्यक्ति की तरह समाज के विभिन्न कार्य-क्षत्रों में अपना योगदान दे सकता है । जिसके लिए समाज को उनके प्रति अच्छा रवैय्या रखने की जरूरत है और उनकी भी प्रतिभा को सराहने की। लेकिन आरक्षण द्वारा इस मानसिकता को नहीं बदला जा सकता बल्कि इस खायी को बड़ा ही किया जा सकता है । इसलिए मेरी समझ से हर विकासशील व्यक्ति को खुद से ही ज्यादा काबिल बनना होगा और अपनी काबिलियत के सहारे , स्वाभिमान के साथ ऊपर उठना होगा । और सरकार को चाहिए की आरक्षण के टुकड़े फेंककर , जनता को रिझाने के बजाये हर समुदाय की जरूरतों को समझकर त्वरित सुविधायें एवं संरक्षण प्रदान करे।

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ZEAL said...

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* सत्ता में बैठे लोग खुद तो सुविधाओं का लाभ लेते हैं और कमज़ोर वर्ग को 'आरक्षण' के नाम का 'लौलिपौप' थमा देतेहैं ।
* कमज़ोर तबके को सुविधायें दो , आरक्षण के नाम पर मूर्ख मत बनाओ । भूखे को मुफ्त भोजन दो , जब पेट भरा रहेगा तो मुफ्त की शिक्षा मुहैय्या कराओ ताकि वो वो शिक्षित होकर अपने उत्थान के बारे में सोच सके।
* किसी का हक मारकर किसी को हक देना आपस में फूट डालता है । आरक्षण भेद-भाव को जन्म देता है । अंग्रेजों की divide and rule policy है ये।
* हजारों किसान ख़ुदकुशी कर रहे हैं , बचा पायेगा इन्हें आरक्षण ? नहीं !!, इनको खाद- पानी जैसी सुविधायें मिलनी चाहियें । फसल अच्छी न होने पर सरकार की तरफ से इन्हें पूरा सहयोग मिलना चाहिए । गरीबी के कारण इन पर चढ़े हुए कर्ज माफ़ करने चाहिए।
* स्विस बैंक में जमा कला धन यदि वापस आ जाये तो भारत देश को तकरीबन २० वर्षों तक टैक्स ही नहीं देना पड़ेगा । इतनी प्रचुर मात्रा में हमारे पास धन और संसाधन है की हम आसानी से जरूरतमंदों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ सकते हैं।
* सत्ता के लालची लोग आरक्षण जैसी राजनीति करते हुए गरीब अमीर का फासला बड़ा करते हैं । उन्हें कभी जागरूक करना ही नहीं चाहते । वे तो चाहते ही हैं की ये लोग 'आरक्षण' के लिए लड़ते मरते रहे और कभी भी स्वाभिमान से जीने की बात ही न सोचें।
* यदि सरकार आदेश करे तो चंद महीनों में ही एक-एक गाँव का स्वरुप बदल कर रख सकती है । स्कूल , अस्पताल , भोजन व्यवस्था चकाचक कर सकती है । हर गरीब , भरे-पेट मुस्कुरा सकता है । लेकिन नहीं , यही आरक्षण तो सरकार के लिए कुर्सी बचाए रखने के लिए तुरुप का पत्ता है ।
* यदि गरीब और दलित भी स्वाभिमान से जीना सीख जाएगा तो इन्हें वोट कौन देगा ? मिस्र जैसी क्रान्ति नहीं आ जायेगी ?
* समाज में समानता लानी है तो आरक्षण जैसे 'कोढ़' से दूर ही रहना होगा ।
* जो लोग एक वर्ग विशेष के आरक्षण की बात करते हैं , वो अपने निजी विकास के बारे में सोचते हैं , देश के विकास के बारे में नहीं ।
* ज़रूरी है देश में काबिल लोग पदस्थ हों , इसलिए विद्यार्थियों में बिना भेद-भाव और आरक्षण के , चयन प्रक्रिया होनी चाहिए । जहाँ जाति-भेद , लिंग-भेद , धार्मिक -भेद नहीं होना चाहिए।
* यदि स्वाभिमान से जीना है तो आरक्षण के नासूर से बचना होगा ।
* गरीब और पिछड़े वर्ग को सुविधायें मिलनी चाहिए । मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्राथमिकता पर मिलनी चाहिए । इसके बाद वे स्वयं ही अपनी प्रतिभा साबित कर लेंगे , बिना आरक्षण की बैसाखी के ।

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Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

Divyajee you are absolutely right. The problem is that no body wants to actually change the system. The politicians arenot to be blamed. They are just trying be in power. They are getting what they want.
But the Indian public is to blame for being spineless, shortsighted and illogically selfish. Why do we vote for people who promise and enact such kind of divisive and opprtunistic policies?
Some people declare that they do not believe in caste system by removing their surnames. They are the first people to take advantage of such reservation policies. They do not feel any shame when they enlist themselves as backwards and then take advantage of the quota to get into premier institutions. We get substandard, corrupt and incompetent doctors, engineers, lawyers, technicians who stay in the country to reck havoc with the country's economy.
Why not give the reservation only to poor people and that too only for education, and then let the candidates for a job vacancy fight it out among themselves in level playing field?

एस.एम.मासूम said...

आरक्षण भी कोई मुद्दा है? खुलेआम वोट बैंक का मामला है. शिक्षा फ्री कर दो सभी के लिए और नौकरी मैं आरक्षण बंद और तब देखो देश कि तरक्की. लेकिन यह कैगा कौन, हमारे आप के पास ताक़त नहीं और जो वोट कि ताक़त थी ग़लत लोगों को दे दी. अब चिल्ला के क्या फायदा?

Kailash C Sharma said...

आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ. आरक्षण आज हमारे देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है. जब योग्यता की वजाय जाति आदि के आधार पर अयोग्य व्यक्तियों को जबरदस्ती आगे बढाने की कोशिश की जायेगी तो देश की उन्नति कभी नहीं हो सकती. इससे योग्य व्यक्तियों में असंतोष बढता है. अगर कमजोर वर्ग को सहायता देनी है तो उन्हें अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में सरकार सहायता करे और बाद में उन्हें अपनी योग्यता से ही नौकर पाने और आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए. आरक्षण केवल वोट बैंक की राजनीति है जिसका दुष्परिणाम योग्य व्यक्तियों और देश को भुगतना पड रहा है.

Pratik Maheshwari said...

आपने दिल की बात लिख दी.
आरक्षण का खेल हमारे आई.आई.टी. देते वक़्त शुरू हुआ और आज तक उससे हालात सुधरे नहीं हैं..
पर उस समय भी पिछड़ा वर्ग का एक ऐसा ग्रुप था जो आरक्षण के पक्ष में नहीं था..
और ऐसी घटनाएं भी कम नहीं हैं जहाँ आरक्षित सीटों से आने वाले बच्चों को कॉलेज ने उनके पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण निकाल दिया हो..
पर सब वोट बैंक की माया है.. पढ़े लिखे वोट करते नहीं हैं और अनपढ़ आरक्षण के चक्कर के मारे हुए हैं..

और महिला आरक्षण के खिलाफ किसी महिला की तरफ से सुनकर अच्छा लगा..
मैं भी यही मानता हूँ कि जब पुरुष-महिला की बराबरी की बात बड़े ज़ोरों-शोरों से की जा रही है तो आरक्षण के खिलाफ महिलाएं रैली क्यों नहीं करती हैं?

खैर काफी शोचनीय विषय है.. इसपर आमने-सामने चर्चा की जाए तो बेहतर निष्कर्ष निकलेंगे...

आभार

STRANGER said...

You misunderstood them totally.

With "reservation" , India will be what it was some thousand years back !

STRANGER said...

Can we award Ist Prize to someone who gets 3rd position in a competition ?

If yes, this is Reservation ! !

STRANGER said...

Can we have Hospital with Doctors, Surgeons technicians only from reserved community to treat ppl of their community ?

Sounds funny but we must give it a try.

सुधीर said...

आरक्षण नहीं प्रतिभा भक्षण कहिए...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

आपका यह लेख विचारोत्तेजक ही नहीं संकलक भी है ... यहाँ आये विचार जनभावनाओं को दिखाते हैं... और ज्यादा आवाज यही कहती है कि आरक्षण किसी भी तरह का नहीं होना चाहिए...
ना ही महिला का भी...
सीधी तौर पर जो लोग जरूरत मंद है ( आर्थिक तंगी की वजह से ) चाहे किसी भी जाती का हो, उसे को मदद मिलनी चाहिए ... विद्यालय शिक्षा किताबे ...और जीने की मूल जरूरते - जैसे रोटी कपडा और मकान ... किन्तु आरक्षण कताई नहीं ...

क्यूंकि आरक्षण पंगु बनाता है
प्रतिभा का हनन करता है |
योग्य और महनती इंसान भी कुंठाओ से ग्रसित हो जाता है
गरीब ज्यू के त्यू बिना मदद के ..
ये जातिगत वेइमन्स्यता को बढाता है ..... यह ना तो आपसी प्रेम को बढाता है .. ना दूरियों को पाटता है ...बल्कि दूरियों को और बड़ा रहा है ...
अयोग्य लोग भी ऊंचे औहदे पर होते है - तब उस तंत्र का क्या हाल ...
योग्यता / स्किल पैदाइसी होती है और मेहनत से भी हासिल की जाती है ... आरक्षण मेहनत से योग्यता हासिल करने के आड़े आता है ...

यह सिर्फ फूट डालो और राज करो जैसी ही नीति है...

राकेश कौशिक said...

अधिकतर टिप्पणियां यही दर्शाती हैं कि बहुत हो गया अब "आरक्षण" नहीं - इसके कई दुस्परिणाम सामने आ चुके है तथा आ रहे हैं - उपरोक्त टिप्पणियों और सुझावों में कही गई बातों के साथ-साथ मुझे लगता है कि जन-मानस में पनप रही जातिगत वैमनस्यता भी इसी की एक देन है - काश कोई इन आवाजों को सुने इसी उम्मीद के साथ - प्रेरक आलेख के लिए साधुवाद - आभार

Sandeep said...

Reservation is just 60 yrs old , why our country was under the rule of invaders from last 1000 yrs. Where that "merit" was then ? Tel lene gayi hogi shayad :)

I will again repeat again :-

Reservation is the REPRESENTATION of Unrepresented.It is NOT a poverty alleviation program , it not a political gimmick , it is a constitutional obligation which government has to follow.

Sensible people will understand this and Hypocrites and Propaganda specialist will discard it.

Sandeep said...

@ राकेश कौशिक said...

अधिकतर टिप्पणियां यही दर्शाती हैं कि बहुत हो गया अब "आरक्षण" नही
---------------
ahiktar tipaniyon mein se kitni SC/ST/OBC ki hai ..... hahaha

STRANGER said...

@ Sandeep,

Let me clear your doubts :-

Our country was under the rule of invaders for some 1000 yrs....correct but do you know who ruled us.........brilliant, excellent and intelligent people who came from different parts of the world. You will agree that none of them were weak, they were strong in all spheres of life, and this is what you and me want today - capable person to rule us, good engineers, doctors, surgeons, technocrats, scientists etc. etc. and by Reservation we are picking up the "worst" from the good lot available.

Can we expect better result from incapable person......Never. There is no reservation even in country like Pakistan......just think over it.

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

दिव्या जी!
पूर्णतयः सहमत हूँ आपके विचारों से... बहुत अच्छे से आपने विश्लेषण किया है, आदमी की आम जरूरतों का और उन्हें किस प्रकार पूरा किया जा सकता है.

शुभकामनाएँ... सार्थक लेखन के लिए.

धीरेन्द्र सिंह said...

कलम की धार क्या होती है इसका अनुभव इस लेख को पढकर स्वतः हो जाता है. Iron Lady.

ZEAL said...

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@ Stranger --

जो मैं कहना चाहती थी आपने बखूबी कह दिया । आज किसी भी विकसित देश में आरक्षण जैसी व्यवस्था नहीं है । न ही जातिवाद। आरक्षण जैसी व्यवस्था देश को टुकड़ों में बाँट रही है ।

जब खुद को बेहतर करना हो तो अपने से बेहतर की तरफ देखना चाहिए । क्यूँ अमेरिका इतना विकसित है , और आर्थिक रूप से शक्तिशाली है ?

किसी को उठाने के लिए , किसी को कुचलना कोई विकल्प नहीं है।

.

Ankit.....................the real scholar said...

आरक्षण हो या अनुदान , इन सब का प्रारंभ ही इसी लिए किया गया था की भारतवासी स्वाभिमान के साथ जीना ही छोड़ दें

Sandeep said...

@ STRANGER said...

@ Sandeep,

Let me clear your doubts :-

Our country was under the rule of invaders for some 1000 yrs....correct but do you know who ruled us.........brilliant, excellent and intelligent people who came from different parts of the world. You will agree that none of them were weak, they were strong in all spheres of life, and this is what you and me want today - capable person to rule us, good engineers, doctors, surgeons, technocrats, scientists etc. etc. and by Reservation we are picking up the "worst" from the good lot available.

Can we expect better result from incapable person......Never. There is no reservation even in country like Pakistan......just think over it.

--------------------------

Hahahahaha... what a childish comment to make .
I wonder what would have been the reaction of so called Nationalist RSS organisation employees after listening that people who ruled us were more meritorious , i always heard from them they ruled by treachery .

What about the condition of Muslims today in our country who ruled India for 700 yrs. It concludes that conditions and situations have big role to play in the progress and development of any community . Merit is nothing but a social construct.

One more thing some one has said reservation was given , it is absolutely non sense to make this statement that reservation was given . Reservation was not given , reservation was taken,snatch or won by us. This was the deal of poona pact when Dr. Ambedkar in lieu of separate electorates agreed to take the reservation and other benefits.

So, the correct statement is that we have won the Reservation by diplomacy.
Invaders won by wars and we won by diplomacy , which is better war or diplomacy ?
And there is no time limit for the reservations , we will take it for as long as we feel that we are not having enough share in the assets and progress on India.

If you people had enough power , then reservation would have not continued for so long.I think you are utterly failed in your vendetta against reservation.Those who fails are merit less people and as reservation is there for atleast 2018 so till then you people will be meritless !!!!... hahaha.

And about reservation in other countries , this is sheer lack of information which you have , give some pain to your fingers and google it .
For your help take these links -

http://en.wikipedia.org/wiki/Affirmative_action
http://en.wikipedia.org/wiki/Affirmative_action_in_the_United_States
http://www.dol.gov/dol/topic/hiring/affirmativeact.htm
http://www.understandingprejudice.org/readroom/articles/affirm.htm
http://www.affirmativeaction.org/resources.html
http://www.affirmativeaction.org/

Don't compare India with USA , USA has given the reservation even in private sector and in many government contracts , and also produced a black president , which India is not capable of doing even after the 60 yrs of so called Independence.

I will again repeat again :-

Reservation is the REPRESENTATION of Unrepresented.It is NOT a poverty alleviation program , it not a political gimmick , it is a constitutional obligation which government has to follow.

Understand the above lines very clearly , if you understand the meaning of each and every word then you will be able to understand the technicalities associated with the reservation.

Reservation (better to use word
" Representation ") is like a pressure valve which releases the pressure from Oppressed communities , the day when reservation removed will make the very next day conditions like of Egypt and Libya .

Sandeep said...
This comment has been removed by the author.
Sandeep said...

Madam please allow my post to display here. I hope you will not be biased.

thnx.

ZEAL said...

.

@ Sandeep ,

There is no bias in publishing people's opinion on a general topic in nation's interest . Your comment was too long so it automatically went in span . After seeing your request , I checked it and now it is here . Sorry for inadvertent delay.

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ZEAL said...

.

@ Sandeep ,

Your voice is very clear and loud in favor of reservation. The pain can be very well felt . But the reservation is not the solution. It brings dis-satisfaction among the unreserved category.

Can you understand the frustration of deserving , brilliant candidates who cannot secure a seat even after achieving high percentages in academics? But unfortunately the unworthy lot with their poor performance and low grades are given opportunities. In this highly populated country with cut throat competition , don't you think that reservation is too cruel and unjust with the deserving lot ?

If we talk about the progress of India , do we need to deprive the intelligent folk from such opportunities.

As far as the poor and downtrodden are concerned , they genuinely deserve good food, free education and free health services.

Govt. must think in this direction of improving the general condition of needy. But 'reservation' is not a solution in any case. It is clear cut discrimination among different gender , different religion , different caste and people with different socio-economic level.

Reservation results in frustration , depression, anxiety , unemployment and violence as well .

.

.

Sandeep said...

@ zeal

Madam , problem is that when you talk about the frustration and dis-satisfaction then you consider yourself only , you conveniently forget the pain of bahujan castes , what about the bahujan castes who are deprived of their identity and social respect and are discriminated on the basis of caste and are not having the same facilities which you people have . Why bahujans are not in the main field , what is your reasoning behind this , they don't want to study or they don't have the caliber for the same . How many of bahujans are in the private sector and how many private companies are owned by them , how many business entrepreneurs are from bahujan castes , how many of them are in media , how many of them are in entertainment , how many of them are at top position in the government and private secttor , how many of them are brigadiers and generals in the army when it is a fact that they form the majority of the foot soldiers, Why they are nowhere inspite of the fact that they form more than 70% of the total population of the India.
Why it is so ? first analyze these .

Sandeep said...

Regarding india's development and progress , the point is that if there is no inclusive growth , there is no need of such nation which will be controlled by the handful people and majority will be living under their slavery.
For the REAL development of india , INCLUSIVE GROWTH is needed .

One more point is that you presume that people who go with lower marks compared to open category are not suitable for the jobs or for the seats awarded to them , then i would like to say that gov. decides the min. cutoff for the reserved category which gov. thinks that that much is required for that particular course or job , that's why some of the seats go vacant.
Once , they are admitted in the colleges they too undergo the same process of evaluation , and they too get the same degree from the same university which other's get , doubting even on their degree is doubting on the credibility of the university itself.

Sandeep said...

And I agree that government should provide the QUALITY education at the par of the convent schools or either they should ban the private schools , ban the the private coachings and tuitions , we must learn something from china where the student in a remote village get the same quality of education and teachers which a student gets in the city of shanghai..... bottomline is that make a uniform education system then talk about the reservation free india.

Sandeep said...

Reservation results in frustration , depression, anxiety , unemployment and violence as well .
-----------------

Bahujan castes feel the same , but so called mainstream does not report the same and that's why you don't know about their grief and pain and why they don't report it , can be understood by this link

--- http://www.hindu.com/2006/06/05/stories/2006060504981400.htm

ZEAL said...

.

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Reservation itself is discrimination . So inclusive growth is not at all possible this way. Reservation takes away dignity and self respect from the people of reserved category.Their basic needs should be attended and allow them to struggle as much as a general candidate fights for his survival.

Opportunities must be given to the deserving only.

I have compassion for the downtrodden but I cannot compromise with merits. Depriving a meritorious student from reaching his goal is unfair. Being born in general category seems to be a curse .

Now a days people are reluctant to struggle . They feel more proud in declaring themselves as backward , just to avail the facilities for reserved category.

Above all , thinking in nation's interest is a lot bigger than thinking about any community in particular.

A nation can never prosper with any kind of reservation imposed.


.

Sandeep said...
This comment has been removed by the author.
Sandeep said...

[Reservation itself is discrimination] .-> It is a reaction against the action of

discrimination caused by the caste system .

[ So inclusive growth is not at all possible this way.]-> Then apply your way for

the inclusive growth and if it works then show it to us and if we find that

good then can reservation can be ended.

[Reservation takes away dignity and self respect from the people of reserved

category.]->
It is a manuwadi propaganda and perception created by the media but it is not a

fact and many of my relatives are working very fine and infact very efficiently

then many others.Manuwadis want to create the perception in the minds of

Bahujan castes that reservation is not a good thing , recent try is a program

on Imagine TV against the reservation which is written and directed by

brahmins. Manuwadis are failed in the direct battle with the bahujans that's

why now they have started back channels to propagate their agenda.



[Their basic needs should be attended ]-> correct but not just the basic but

exactly the same facilities which are given to open category aspirants .



[and allow them to struggle as much as a general candidate fights for his

survival.]->Reserved category struggle very hard to compete with in their

respective categories,

Sandeep said...

[Opportunities must be given to the deserving only.]-> Yes , opportunities are

given to the deserving in their respective categories.


[I have compassion for the downtrodden] -> Nice to hear that


[but I cannot compromise with merits. Depriving a meritorious student from

reaching his goal is unfair. Being born in general category seems to be a curse

.]->What is merit ? A soical construct , first let get all the same facilities

then we will talk about the merit.And we believe in Representative society not

in the so called Meritorious society . And if you are so fond of merit then

please give the Muslims and Britishers right to rule the India because they

have already ruled india on their merit.In this way your desire for merit will

be fulfilled.


[Now a days people are reluctant to struggle] .-> Its not like that nowdays

people have become reluctant to struggle , it is so from long time in the

history that they get their position without struggle just on the basis of

their birth. Many people become the priests in the temple without facing any

competition and enjoy the luxury life of 5 star temple residents good example

is swaminarayan temples.


[ They feel more proud in declaring themselves as backward]-> You are welcome to

come and join them and experience the proud of their backwardness.



, [just to avail the facilities for reserved category.]-> They don't decide to

born in the backward caste ,its the destiny which decides , reservation they

get after 20 but get discriminated from the birth , and miniscules percentage

of bahujans are able to qualify for the reservations on the very first hand ,

majority works as day-labourer.


[Above all , thinking in nation's interest is a lot bigger than thinking about

any community in particular.]-> Yes nation's interest is bigger than the profits

of 15%percent people.

[A nation can never prosper with any kind of reservation imposed.]->Yes it was a

very prosperous nation in the last 1000 yrs when there was no reservation.

Dinesh pareek said...

बहुत सुन्दर | आपकी हर पोस्ट पढ़ कर बहुत अच्छा लगा |
आप मेरे ब्लॉग पे भी आइये आपको अपने पसंद की कुछ रचनाये मिलेंगी
दिनेश पारीक
http://vangaydinesh.blogspot.com/

anand said...

Reservations according to me is a wonderful ploy adopted by the great politicians to appease their vote banks and cling to power by hook or by crook and we lesser mortals fall prey to their ulterior motives so innocently .
The dire need of the hour is education ,we must know wot we want to lead a quality life ,irrespective of the caste and religion or gender ..for an ignorant soul these populist schemes are like dog biscuits ..
indubitably we are all equal ,its ok if our great grandparents dint think on these lines ,,its their problem not ours ..caste system i think came into force those days on the grounds of delineation of different professions ,while some great people tactfully misused this to prove their supremacy et al ,and in the process subjected certain class of people to utter humiliation .
how funny it is when a son of an ias /ips officer calls himself backward and stands in a different queue when it comes to procurement of a seat in a seat ,college or a job ..
reservation as a term according to me is an act of belittling an individual morale and self respect ...how dare anyone calls us backward or untouchables just because we are born in so called ...castes ...wot a fall my country men ..
did we ever think the serious repurcussions of this nasty system ...firstly people start taking things for granted ..they know pretty well that they can walk away scot free literally doing anything ,as they are always protected by someone in the name of caste and religion ...
This according to me is anything but the concept of equality ..
we are human beings first ...if some one is backward with respect to social status ,education ,fiscally et al ,they must be brought at par with his co citizen of this world ...this should be the attitude of the ruler ....
how cruel it is when a 90 % student is denied of a seat somewhere while a 36% fella bags it ,,just because he is so n so ....
aint we rearing resentment and hatred ?firstly there is no control over this population explotion and secondly these funny tactics to appease a certain group of people ...pretty evident that we are just digging our own grave ...
lets rise bravely and wisely to start thinking beyong these socials stigmas and be exemplary to the rest of the world ...
we are all one ,we have enough space for all of us and we deserve a dignified life ....come lets all march forward to acheive a brighter india ..jai hind

anand said...

when someone so vehemently decided to stay backward for a life time ,,even god also cannot help him ..
its indeed so amusing to see people deeming mendicancy as a right more than a hapless situation ...
if a grandpa was an idiot ,,would the grandchild love to step into his shoes in the name of inheritance ...funnily our indians seem to be liking this notion to the hilt .
too much independance has spoiled all of us ..we have become incorrigible .
god should take a new avtar to change our mindsets ...or may be HE will also start taking the reference of the constitution et al ...poor god ,,lol

anand said...

This vindictive attitude must end before we kill each other ..rational thinking is the order of the day ..lets start in beleiving in the concept of equality .
the worst outcome of this reservation system is majority of the poor people remain poor and some of the lucky ones enjoy the enrichment and affluence for generations together ,taking the poor and the downtrodden as reference ....smart guys indeed ...luks like a civil war is just round the corner ...

ZEAL said...

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@-the worst outcome of this reservation system is majority of the poor people remain poor and some of the lucky ones enjoy the enrichment and affluence for generations together ,taking the poor and the downtrodden as reference ...

Anand ji ,

So true !....People need to understand this fact . Poor and downtrodden are taken for a ride by their own folk even.

.

STRANGER said...

@ Sandeep

I'd like to conclude that "RESERVATION WILL CONTINUE NOT BECAUSE YOU NEED IT BUT BECAUSE POLITICIANS NEED IT" that's all.

दिवस said...

सबसे बड़ी समस्या ही यही है। यहाँ प्रतिभा कर्म के आधार पर नहीं, जाति के आधार पर निर्धारित की जाती है। पिछड़ों को आगे लाना है तो आर्थिक आधार पर मूल्यांकन होना चाहिए। यदि जातिगत भी है तो जीवन में एक बार। ऐसे नहीं कि पहले स्कूल में, फिर कॉलेज में एडमिशन के लिए कम्पीटीशन में, फिर कॉलेज के बाद नौकरी में और नौकरी के बाद तराकी में भी आरक्षण। अब भी पेट न भरे तो इस भूतपूर्व पिछड़े की औलादों को भी आरक्षण। अब इनके बच्चे कहाँ पिछड़े हैं? फिर इनके लिए आरक्षण की क्या दरकार? प्रतिभाशालियों की प्रतिभा दरकिनार होगी तो देश का विकास क्या इन मुफ्त की नौकरी पाने वालों से होगा? चलिए एक बार एक सवर्ण जाति का व्यक्ति खुद को ठगा भी ले, किन्तु कदम-कदम पर वह कब तक आहत होगा? एक समय आएगा जब वह पिछड़े की श्रेणी में आएगा और आरक्षण की मांग करेगा।
एक बात आपने बहुत सही कही कि ऐसे में आरक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली भी खुद को हीन समझने लगते हैं, क्योंकि आरक्षण का तमगा उनसे जुड़ गया है। दरअसल उन्हें आरक्षण की कोई जरूरत ही नहीं थी। वे तो अपनी योग्यता के बल पर ही आगे बढ़ सकते थे, किन्तु उन्ही के साथियों ने आरक्षण की मांग कर उनके हुनर को छुपा दिया और जाति को आभार दिया।
आरक्षण का लाभ भी दरअसल उस वर्ग तक पहुँच ही नहीं पाया जिसके लिए इसकी अवधारणा रखी गयी थी। कुछ गिने-चुने लोगों ने ही इस व्यवस्था पर कब्ज़ा कर रखा है। यदि आरक्षण इतना ही फायदे का सौदा होता तो 64 वर्षों में भी इसका कोई लाभ क्यों नहीं दिल्खाई देता?
गाँव का गरीब तबका तो आज भी वैसा ही है, बल्कि पहले से भी अधिक पिछड़ गया है।
जातिगत आधार पर आरक्षण समाज में भी वैमनस्य व द्वेष को बढ़ावा देता है। जात-पांत के चक्कर में पहले ही हिन्दू बनता हुआ है, ऊपर से आरक्षण आग में घासलेट डाल रहा है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण भी दरअसल एक गलत अवधारणा है। हाँ इतना किया जा सकता है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को फोकट की नौकरी के स्थान पर फोकट की शिक्षा दे दी जाए।

विनीत कुमार सिंह said...

आरक्षण की बात करने वाले आरक्षण की तरफदारी करने वाले २ उदहारण देते हैं की पहला गरीबों का उत्थान होगा....सच्चाई ये है की गरीब आज भी झोपड़े में रहने को मजबूर है और आरक्षण के नाम पर कुछ स्कोलरशिप मिल जाती है बाकि कुछ नहीं....दूसरा दलितों को समानता का अधिकार मिलेगा और ऐसा अम्बेडकर चाहते थे....पर असमानता का ही द्योतक है ये आरक्षण और इस आरक्षण के चलते जितनी असमानता फैलती है देश में वो शायद किसी और से नहीं फैलती है....दिव्या दी अपने सही कहा की आरक्षण अकर्मण्यता फैलाती है लोगों के अन्दर इसके चलते लोग कार्य करने से मुकरते ही नहीं बल्कि उसे टालते जाते हैं और अपना कर्त्तव्य तक भूल जाते हैं| आरक्षण से फ़ायदा हुआ है मै भी मानता हूँ पर केवल उन्हें हुआ है जिन्हें आरक्षण चाहिए ही नहीं था| अब तो ये आरक्षण गाँव के प्रधान तक के चुनाव में पहुँच चूका है की पहले ५ साल सवर्ण, दूसरा ५ साल महिला तीसरा ५ साल दलित का| ये आरक्षण एक ऐसा दंश है जो भारत को प्रगति के पथ पर नहीं बल्कि देश को एक ऐसे अँधेरे कुंवे में धकेल रहा है जिसके अन्दर आरा मशीन चल रही है उस अँधेरे कुंवे में गिर रहे देश और देशवासियों के पता नहीं कितने टुकड़े करने के लिए

Yogesh Shah said...

Arakshan ki vajah se desh ka vikas kabhi nahi ho sakta kyon ki arkshan ki vajah se kam karne vale logo me itni pratibha nahi hoti.aur jo pratibhashali hai unhe arakshan ki vajah se kam nahi milta aur desh un logo ki pratibha se vanchit reh jata hai.

Anonymous said...

A motivating discussion is worth comment. I
do believe that you ought to write more about this subject matter, it may not be a taboo matter but typically
folks don't speak about such subjects. To the next! Many thanks!!

My web site: http://www.erovilla.com/