Tuesday, April 26, 2011

क्या मच्छर के काटने से एड्स हो सकता है ?

प्रश्न - क्या मच्छर के काटने से एड्स हो सकता है ?
जवाब - नहीं , मच्छर के काटने से एड्स नहीं होता।

  • एड्स केवल Blood, Semen, Vaginal fluid के transfer से ही होता है
  • saliva में एड्स के विषाणु नहीं होते।
  • मच्छर जब काटता है तो अपना saliva (लार) , Blood में छोड़ता है ताकि रक्त की तरलता बनी रहे और मच्छर आसानी से रक्त चूस सके ।
  • जब तक संक्रमित रक्त मच्छर की लार में नहीं पहुंचेगा , तब तक मच्छर के काटने से एड्स होने की कोई संभावना नहीं है।
  • बहुत सी बीमारियों में कुछ insects अथवा जानवर carrier की भूमिका निभाते हैं ( जैसे मच्छर , फीता कृमि , गोल कृमी आदि ) , लेकिन HIV virus की 'Life-cycle' , मच्छर में पूरी नहीं होती । HIV virus केवल मनुष्य से ही मनुष्य में पहुँचता है।
आभार

64 comments:

ZEAL said...

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@--दर्शन लाल बवेजा said...

मादा मच्छर के काटने से मलेरिया हो जाता है एड्स क्यों नहीं फैलता, जबकि रक्त आदान प्रदान होता है सुई यानी इंजेक्शन से हो जाता है
April 24, 2011 11:54 AM

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पिछली पोस्ट पर दर्शन लाल जी के मन में आया प्रश्न शायद बहुत से लोगों के मन में होगा इसलिए उसका उत्तर यहाँ दे रही हूँ ताकि शंका का समाधान हो सके।
आभार।

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Vaanbhatt said...

chikangunia, dengu, maleria itane hi dar kya kam hain...dhanyvaad aapne aids se bacha diya...jigyasa ka sahi samadhaan...

जाट देवता said...

नमस्कार,
डा० साहिबा जी आप ऐसी-ऐसी जानकारी देती है कि जितनी तारीफ़ की जाये कम है।

ashish said...

शुक्र है मच्छर इसके जिम्मेदार नहीं है नहीं तो दुनिया में अब केवल अब वही होते . दूसरा कोई नहीं .

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

अच्छी जानकारी !

Tarkeshwar Giri said...

Chalo ji ab kam se kam machhro se darna nahi padega.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

vaise hi machchhar kam kukhyat nahi...

Apanatva said...

:)

सुज्ञ said...

HIV ग्रसित द्वारा उपयोग किया गया ब्लेड़ या नेलकटर का रक्त सम्पर्क हुआ हो और किसी स्वस्थ व्यक्ति के खुले घाव के सम्पर्क में आए तो HIV संक्रमण की सम्भावनाएं बनती है?

HIV रक्त में HIV virus खुले वातावरण में आते ही निस्क्रिय हो जाते है?

देवेन्द्र पाण्डेय said...

मेरा भ्रम भी दूर हुआ।

अरुण चन्द्र रॉय said...

इस संक्षिप्त आलेख से उपयोगी जानकारी मिली...

ethereal_infinia said...

Dearest ZEAL:

Nice information in your short post in response to a reader’s query.

A few decades back, it was the word ‘Cancer’ and more presently, it is “AIDS” which immediately brings a mortal scare to anyone.

Life is most precious and when it is obnoxiously threatened it makes one and all worry and rightly so.

While lot many governmental advertisements do try to dispel the wrong notions about the transmutability of these life threatening diseases by touch, but it is usually seen that the person diagnosed with them is almost instantly ostracized.


Semper Fidelis
Arth Desai

Shah Nawaz said...

बहुत ही बेहतरीन, जागरूकता फैलाने वाली जानकारी... आभार!

ZEAL said...

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सुज्ञ जी ,

ये तीन प्रकार के fluid जिनका जिक्र है ऊपर , इन्हीं के द्वारा , fluid medium से ही ट्रान्सफर हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किये गए ब्लेड द्वारा भी संक्रमण संभव है यदि वह दुसरे व्यक्ति के रक्त में प्रवेश कर जाए तो । वातावरण में आने पर निष्क्रिय इसलिए हो जाता है क्यूंकि यह विषाणु जीवित कोशिका में ही survive करता है । लेकिन ये विषाणु कभी नष्ट नहीं होते , एक लम्बे अरसे तक dormant अवस्था में जीवित रहते हैं और , जैसे ही इनका प्रवेश किसी जीवित कोशिका में होता है , ये पुनः replicate होने लगते हैं और अपना आतंक मचाते हैं।

संक्रमित रक्त यदि शरीर पर बाहर से लग गया अथवा छू गया है तो धोकर साफ़ किया जा सकता है , लेकिन यदि एक बार यह रक्त में प्रवेश कर जाए तो इसका कोई इलाज नहीं ।

एड्स का इलाज केवल prevention है

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OM KASHYAP said...

dr. sahiba bahut acchi jaankari di aapne
dhanaywad
waise manushyo ke khoon alawa inka koi or bhojan nahi hein kya

OM KASHYAP said...

waise khoon ke alawa inka koi or bhojan nahi hein kya

Rakesh Kumar said...

अच्छी जानकारी दी है आपने.एड्स का रोग कब से संज्ञान में आया.
क्या पहले एड्स की बीमारी नहीं होती थी.कहतें है कुछ गोरिल्ला जाति से यह रोग फैला.एड्स के बारें में और विस्तृत जानकारी दें तो और अच्छा रहेगा,
जानकारीपूर्ण लेख के लिए आभार.

Kunwar Kusumesh said...

वाक़ई,बहुत ज्ञानवर्धक पोस्ट है.आभार.

Learn By Watch said...

काम की जानकारी

Akshita (Pakhi) said...

आपने तो बड़ी अच्छी जानकारी दी...आभार.
________________________
'पाखी की दुनिया' में 'पाखी बनी क्लास-मानीटर' !!

सतीश सक्सेना said...

आवश्यक पोस्ट और जानकारी देने के लिए आभार !

Deepak Saini said...

अच्छी जानकारी !

प्रतुल वशिष्ठ said...

एड्स की जानकारी हमें सबसे पहले किसने दी और कब मिली?
क्या यह किसी पुराने रोग का ही नया नाम तो नहीं? या फिर यह कुछ नये लक्षणों के साथ प्रकट हुआ है?
क्या ये वास्तव में अस्तित्व में है भी?....... मैंने आज़ तक कोई एड्स रोगी नहीं देखा. केवल सुना ही है.

एम सिंह said...

अब कम से कम लोग यह नहीं कर पाएंगे कि एड्स मच्छर के काटने से हुआ है... अच्छी और ज्ञानवर्धक जानकारी

गिरधारी खंकरियाल said...

क्या आयर्वेद में एड्स की जानकारी है यदि है तो किस नाम से?

Poorviya said...

आवश्यक पोस्ट और जानकारी देने के लिए आभार !

jai baba banaras...................

निवेदिता said...

informative post ......best wishes !

अरूण साथी said...

धन्यवाद्.

एम सिंह said...

चखिए तीखा-तड़का
सीएम ऑफिस से शर्मा को फोन

डा० अमर कुमार said...


चलो अछा है,
मच्छर इस बेहूदे रोग से अछूता रहता है, जान कर बड़ी राहत मिली ।
आभार आपका !

Sawai Singh Rajpurohit said...

आद.डॉ.दिव्या श्रीवास्तवजी

बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने

Sawai Singh Rajpurohit said...

जानकारी के लिए...आभार

संजय भास्कर said...

BAHUT HI GYANVARDHAK JAANKARI DI AAPNE ....DIVYA JI

वन्दना said...

ज्ञानवर्धक पोस्ट है.आभार.

निर्मला कपिला said...

अच्छी जानकारी है। शुभकामनायें।

cmpershad said...

तो फिर, निश्चिंत हुआ जा सकता है :)

यादें said...

भ्रम निवारण जानकारी |
खुश रहें !

singhsdm said...

विचारोत्तेजक लेख......!!!!अच्छी जानकारी है।

ZEAL said...

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प्रतुल जी ,

एड्स का पूरा नाम है -- Acquired immuno deficiency syndrome -- इस रोग में व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। तथा किसी भी अन्य बिमारी चाहे वो मलेरिया ही क्यूँ न हो , आदि के attack होने पर मरीज रोगों से लड़ने में असक्षम होता है। यह रोगों का समूह है।

आपकी 'भंडा-फोड़' वाली पोस्ट पढ़ी । आप एड्स के होने में विश्वास नहीं रखते । आपसे एक प्रश्न है ---क्या आप किसी HIV positive घोषित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गयी needle , इस्तेमाल करने की हिम्मत करेंगे ?

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ZEAL said...

जो लोग प्रश्न पूछते हैं , वे यदि उत्तर मिलने के बाद acknowledge भी करें तो बेहतर लगेगा।

प्रतुल वशिष्ठ said...

हाँ जरूर, इस परीक्षण के लिये मैं जरूर तैयार रहूँगा. यदि मुझे कुछ न हुआ तो आप इस मिथ्या प्रचार को क्या त्याग देंगे? कहाँ मिलेगा ऐसा रोगी? कब करना है यह परीक्षण?
वैसे भी मेरे प्रश्न सुलझने के लिये थे न कि उलझने के लिये.

ZEAL said...

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@ प्रतुल वशिष्ट ,

पहली बात तो ये आप ये आरोप न लगायें की मैं कुछ मिथ्या प्रचार कर रही हूँ। किसी भी प्रकार का मिथ्या प्रचार करना मेरी आदत नहीं है । जो व्यक्ति समाज में सुधार लाना चाहता है और लोगों को जागरूक करना चाहता है , वो मिथ्या प्रचार करने जैसे घृणित कार्यों में लिप्त नहीं होता।

दर्शन लाल जी ने और सुज्ञ जी ने अपने मन की शंका पूछी , जिसका मैंने यथा शक्ति जवाब दिया । मेरा ज्ञान निश्चय ही सीमित है , जिसको इस विषय में अधिक जानकारी हो वो पाठकों के लाभ के लिए निसंदेह यहाँ अपना ज्ञान बाँट सकता है । मेरा भी लाभ होगा।

आपको लगता है की एड्स जैसा कुछ नहीं होता , तो आप मेरे दुष्प्रचार को रोकने के लिए एक सु-प्रचार करती हुई पोस्ट अवश्य लगायें की --

* संक्रमित नीडिल का इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है।
* असुरक्षित यौन संबंधों से कोई नुकसान नहीं है।
* रक्त को बिना HIV की जांच किये दुसरे मरीजों को चढ़ा देना चाहिए।

आदि आदि --आभार।

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प्रतुल वशिष्ठ said...

आदरणीय दिव्या जी,
मेरा प्रश्न केवल प्रतिक्रियावश किया गया. आपसे पूछना चाहा था कि एड्स नाम का रोग क्या वास्तव में नया है? या फिर ये किसी पुराने रोग का ही नाम है? आपने अचानक मुझे ही घेरे में ले लिया. क्या प्रश्नों के उत्तर आक्रामकता लिये होने चाहिए. मैंने भी आपके ज्ञान को मिथ्या प्रचार कह कर ठीक नहीं किया. वैसे मुझे वास्तविकता का बोध नहीं है. इसलिये आपसे पूछा था. मैंने तो किसी सज्जन का लेख प्रकाशित किया है और उसके संबंध में वास्तविकता जाननी चाही है. जो कि वहाँ शुरू में ही स्पष्ट है. यदि यह वास्तव में संक्रमित रोग है तो एड्स विरोधी अभियान के दावों को आप नकार सकती हैं. मैं तो चिकित्साशास्त्रियों के मज़बूत पाले में ही अपना मत दूँगा.
आपसे द्वेष नहीं आप अपने पक्ष को अच्छे से व्याख्यायित कर पाते हैं इसलिये आपसे प्रश्न कर लेता हूँ. यदि समर्थन अथवा विरोध के एक-दो शब्द भर कह दूँ तो वह आपकी पोस्ट से न्याय न होगा.

प्रतुल वशिष्ठ said...

मेरे आचार्य 'स्वामी देवव्रत सरस्वती' ने एड्स के सन्दर्भ में कहा था :

..वस्तुतः आयुर्वेद में जिसे 'ओजःक्षय' कहा है जिसके लक्षण वर्तमान में एड्स से मिलते हैं।... सुरक्षित वीर्य का अंतिम रूपांतरण ओज के रूप में होता है जिसका परिमाण अंजलीभर बतलाया गया है।... अनियंत्रित योनाचार, असंयम, अव्यवस्थित दिनचर्या, खान-पान, चिंता आदि के कारण ओज का क्षय हो जाता है।..

ZEAL said...

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प्रतुल जी ,

इस विषय पर विज्ञान इतना कुछ जान चुका है और ढूंढ चुका है उसे मैं एक लेख अथवा टिप्पणी में लिख ही नहीं सकती , प्रमाण उपलब्ध है , दिनों दिन HIV संक्रमित रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है , मुंबई में एक HIV संक्रमित महिला प्रतिशोध वश तकरीबन ३०० लोगों को ये संक्रमण दे चुकी है जो अब पुलिस की हिरासत में है । देश विदेश में HIV संक्रमण से ग्रसित लोगों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है और इसका कोई इलाज भी नहीं है अभी तक और आप 'देवव्रत' जी के अभियान में शामिल हैं इस प्रचार में की एड्स जैसा कुछ नहीं है ?

आश्चर्य है , की आप बिना इस रोग के बारे में पूरी जानकारी रक्खे कैसे इस विषय को नकार सकते हैं। और क्यूँ ? लोगों को जागरूक रहने की अपील की जाती है और आप लोगों को निश्चिन्त रहने के लिए कह रहे हैं। आपका उद्देश्य समझ नहीं आया आपके वक्तव्य के पीछे।

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ZEAL said...

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@--वस्तुतः आयुर्वेद में जिसे 'ओजःक्षय' कहा है जिसके लक्षण वर्तमान में एड्स से मिलते हैं।..

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आयुर्वेद में क्या उल्लिखित है नहीं जानती लेकिन एड्स का पूरा नाम है -- Acquired immuno deficiency syndrome -- इस रोग में व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। तथा किसी भी अन्य बिमारी चाहे वो मलेरिया ही क्यूँ न हो , आदि के attack होने पर मरीज रोगों से लड़ने में असक्षम होता है। यह रोगों का समूह (syndrome)है।

immunity = प्रतिरोधक क्षमता =(ओज क्षय)
deficiency= कमी होना (क्षय होना)

इसमें Virus का संक्रमण है , यह तो ELISA आदि टेस्ट द्वारा सत्यापित है फिर आपका भ्रम क्या है समझ नहीं आया और दुष्प्रचार क्या हो रहा है यह भी ज्ञात नहीं हो सका अब ही तक । कृपया स्पष्ट करें ।

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ZEAL said...

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@--आपने अचानक मुझे ही घेरे में ले लिया. क्या प्रश्नों के उत्तर आक्रामकता लिये होने चाहिए....

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यदि प्रश्नों के उत्तर देने को आप आक्रामकता कहते हैं , और डरते हैं तो प्रश्न ही नहीं करना चाहिए। एक तो मैं गंभीरता से लोगों के प्रश्न का उत्तर देती हूँ , फिर आक्रामक होने का भी आरोप भी सहती हूँ। दुखद है ।

प्रतुल जी , मैं ऐसी ही हूँ। कभी भी अच्छा बनने की कोशिश नहीं की , न ही कभी बन सकूँगी , क्यूंकि अच्छे लोगों की कदर करने वाले हैं ही नहीं इस दुनिया में।

मैं आक्रामक ही ठीक हूँ, शायद इसी तरह खुद की रक्षा करती हूँ इस cruel दुनिया से। इसे मेरा defense mechanism समझिये। किसी से उम्मीद नहीं रखती की कोई समाज के लिए मेरे निस्वार्थ, शुभ एवं पवित्र मंतव्य को कभी समझ भी सकेगा।

जिनके प्रश्नों के उत्तर दिए , उनमें से किसी ने भी acknowledge करना जरूरी नहीं समझा । मुझे पता ही नहीं चलता की मेरे उत्तर उन तक पहुंचे अथवा नहीं।

पिछली कई पोस्टों पर ( चिकित्सा से जुडी) पर लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दिया है , लेकिन लोग शिष्टाचार वश भी आकर यह नहीं कहते की " उत्तर पढ़ लिया" ।

दर्शन जी के प्रश्न पर यह छोटी सी जानकारी दी थी , लेकिन दर्शन जी के भी दर्शन नहीं हुए। मुझे नहीं लगता की मैंने इस पोस्ट पर कोई दुषप्रचार किया है।

यदि मेरे मंतव्यों पर किसी को शक है तो मैं 'सीताजी' की तरह 'अग्नि-परीक्षा' नहीं दे सकती , न ही उसकी ज़रुरत समझती हूँ।

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ZEAL said...

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@--मैंने भी आपके ज्ञान को मिथ्या प्रचार कह कर ठीक नहीं किया। वैसे मुझे वास्तविकता का बोध नहीं है. ...

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आपने इतना स्वीकार कर लिया , इतना काफी है।

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प्रतुल वशिष्ठ said...

किसी जन हितैषी प्रचार का कार्य किसके द्वारा शुरू किया जा रहा है... अब इसपर ध्यान देने लगा हूँ.
पहले नहीं देता था.... जबसे सक्षम और ताकतवर सरकारों के कार्य (छिछली राजनीति) समझ में आने लगे हैं या कहूँ कि चिपलूनकर जैसे जागरूक पत्रकार अपने लेखों से सजग कर रहे हैं... मेरा विश्वास विश्व स्वास्थ्य संगठन तक से उठ गया है. जो लेख मैंने अपने ब्लॉग 'भारत भारती वैभवं' में दिया है वह किस सज्जन का है मुझे अब ज्ञात नहीं, लेकिन मेरे आचार्य का केवल एक कथन ही उसमें है अतः यह एड्स विरोधी अभियान उनका नहीं है.

कुछ संशय उठना स्वाभाविक हैं :
— क्या एड्स का प्रचार करके व उसके प्रति जागरुकता फैलाकर वे 'सुरक्षित यौन संबंधों' को बढ़ावा नहीं दे रहे अर्थात ब्रह्मचर्य, संयम आदि के प्रति उदासीनता लाकर अपना 'कंडोम उपाय' विकल्प के रूप में रख रहे हैं.
— मनुष्य का स्वभाव बामुश्किल बदल पाता है..... इसलिये 'काम का लती' वे सब उपचार करेगा जो एड्स के प्रचारक बताते हैं लेकिन उन उपचारों को नहीं अपनाएगा जो 'आयुर्वेद' बताता है.
— यदि रोगी से ये कह दिया जाये कि "आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता' आपके खान-पान और संयमित जीवन को अपनाकर सुधर सकती है... HIV वायरस नया नहीं है यह तो दुष्कर्मों से हुआ दूषित रक्त ही है.
जो जैसे कर्म करता है उसका रक्त भी वैसा ही हो जाता है. यह 'अदृश्य संस्कारों' की ही तरह संतानों में या अत्यंत सानिध्य में आये लोगों में स्थानांतरित हो जाता है" .... तब क्या ठीक न होगा. लेकिन नहीं एड्स अभियान कुछ और प्रचार कर रहा है.... जैसे कि यह 'छूने से नहीं फैलता', 'सुरक्षित यौन संबंध करिये' आदि ...
........ मुझे तो पल्स पोलियो जैसे अभियानों पर भी संदेह होता है.... क्या ऐसे अभियान दूसरे देश की सरकारें भी आयोजित करती हैं. क्या विकसित देशों में ऐसे अभियान हो रहे हैं?... यदि नहीं हो रहे तो क्यों नहीं हो रहे? मेरे संदेह करने का कारण 'एक चिंता विशेष' है कि कहीं भारतीयों के रक्त में कुछ ऐसा रसायन न मिलाया जा रहा हो जो उनकी बौद्धिक क्षमता को घटा दे, वैदिक धर्म और संस्कृति के प्रति आस्था को शून्य कर दे.

"है एड्स किवा टीके का है विज्ञापन,
चित्रों से ही समझा देता है शासन.
अब यत्र-तत्र-सर्वत्र ज्ञान की गंगा
बहती है, डुबकी लेता भूखा नंगा."

प्रतुल वशिष्ठ said...

जितना धन इन जैसे अभियानों में खर्च किया जाता है उसका आधा भी गरीबी और बेरोजगारी के लिये व्यय हो तो वह सच्चा परोपकार माना जाएगा.
लेकिन नहीं इन अभियानों से विलासिता की संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है. 'अनैतिक शारीरिक संबंध' बनाना सामान्य घटना करार दिया जा रहा है तो
बालाओं के दैहिक शोषण और स्त्री को भोगवादी कल्चर की सिम्बोलिक बनने से कैसे रोका जाएगा?

प्रतुल वशिष्ठ said...

मुझे लगता है कि 'या तो उनके प्रचार का तरीका ठीक नहीं, या फिर मंशा ठीक नहीं.'

प्रतुल वशिष्ठ said...

दिव्या जी, शायद विरोध के पीछे छिपे मेरे मंतव्य को आप पहचान पाये हों?

ZEAL said...

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Pratul ji ,

Below is the link for you . Nothing left to say , I give up.

http://en.wikipedia.org/wiki/AIDS

Thanks.

.

Jagan Ramamoorthy said...
This comment has been removed by the author.
प्रतुल वशिष्ठ said...

ज-गण राममूर्ती जी,
बात तो आप सही कहते हैं. मुझे हर चीज़ पुरानी ही लगती है,
केवल एक बात को छोड़कर. 'जनहितैषी कार्यों में दुकानदारी' वाली बात मुझे नयी प्रतीत होती है.
मैं हर बात को अपने सांचे में ढालकर समझता हूँ. शायद यही मेरी गलती है.
लेकिन मुझे समझ ही इस तरीके से आता है हर विषय...
कई विषय मेरी रुचि के नहीं होते फिर भी केवल उनमें इसलिये रुचि लेता हूँ क्योंकि वे जनहितैषी कार्यों से जुड़े होते हैं. तब मैं अपने सनातन सांस्कृतिक साँचे को निकाल लेता हूँ.
अभी फिलहाल विकिपीडिया से AIDS के बारे में दी जानकारी का लाभ लेने का सोचा है.

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी एवं ज्ञानवर्धक प्रस्‍तुति ... आभार आपका ।

दर्शन लाल बवेजा said...

मैंने तो आज यह पोस्ट देखी
अच्छा विमर्श हुआ
मै उत्तर से सहमत हूँ.

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