Thursday, February 23, 2012

मायिनो सरकार और कामरान.

भारत देश की जासूसी के लिए पकिस्तान ने ढेरों गुर्गे भारत में बैठा रखे हैं, जो बेख़ौफ़ होकर भारत में रह रहे हैं और हमारी मिलिट्री की ख़ुफ़िया जानकारी बहुत सफाई से पाकिस्तान भेज रहे हैं। ऐसा ही एक ३९ वर्षीय पाकिस्तानी आतंकी 'कामरान अकबर' उर्फ़ अत्तार उर्फ़ आसिफ हुसैन नामक भारत के कोलकाता शहर में नाजायज तरीके से रह रहा है। इसे पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा , भारतीय सेना, उनके सन्देश चिन्ह, नंबर, कोड, चौकसी के उपाय , चैटिंग तथा इन्टरनेट का उपयोग आदि की समुचित ट्रेनिंग के बाद नेपाल से होते हुए भारत में गैर कानूनी प्रवेश दिलाया गया। कोलकाता में इसने विवाह करके वहां अपना गढ़ भी बना लिया। धीरे-धीरे इसने भारत का वोटर ID , PAN कार्ड और ड्राईविंग लाईसेंस भी पा लिया। कितने शातिर हैं ये पाकिस्तानी , लेकिन मायिनो सरकार इन्हें आरक्षण देकर हमारे देश को बेच कर खा रही है।

12 comments:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

MANY KAMRANS ARE THERE IN THIS COUNTRY:)

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

जब लाखों लोग वोट बैंक की खातिर बसा दिए गए हैं तो एक के पकडे जाने से क्या होगा:(

Rajesh Kumari said...

bharat ki khufia agency kya so rahi hain.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

bilkul sahi kaha aapne...
congress aur kendra sarkar yahi to kar rahi hai.

mahendra verma said...

यह गंभीर चिंता की बात है।
सरकार के कानों में जूं क्यों नहीं रेंगती !

डा. अरुणा कपूर. said...

सरकार के बारे में तो जितना लिखा जाए..उतना कम है!.....इनके कई कारनामें बाहर आने अभी बाकी है!

Ratan Singh Shekhawat said...

जब तक वोटों की गन्दी राजनीति चलती रहेगी ये सब होता ही रहेगा|

RAJWANT RAJ said...

aapki bat shi hai lekin kya hi achchha ho ki hum apne ko our sugthit our sngthit kre taki is trh ke log anadhikrit treeke se ghuspaith n kr ske . aapne mhtvpoorn jankari dilai bhut achchha kiya .ek jagrook nagrik ki haisiyat se aapke is pryas ka swagat hai .

दिवस said...

इस कामरान अकबर के लिए सबसे पहले मसीहा बने थे भारत की सबसे बड़ी सेक्युलर जमात "मार्क्सवादी"...धर्म को अफीम कहने वाली इस कौम के लिए केवल हिन्दू धर्म ही अफीम है।
बंगाल से मार्क्सवादियों का सिंहासन डोलने के बाद कांग्रेस ने ही इस कामरान की नैया को पार लगाया। इसका संपर्क इसके अन्य बांग्लादेशी मुल्ले भाइयों से करवाया। सरकारी पहचान व देश की नागरिकता का बंदोबस्त तो सबसे ज़रूरी है। आखिर सेक्युलरिज्म की रेस में सबसे आगे जो रहना है।
मायनों सर्कार तो इनकी नाम पर अपनी दूकान चला ही रही है, मुर्ख सेक्युलर हिन्दुओं को अभी भी अक्ल नहीं आती तो अभी और भी कामरान तैयार हैं, तुम्हारे विनाश के लिए।

Bharat Bhushan said...

देश के हित को देखने वालों की जमात कब पैदा होगी, यह पुराना प्रश्न बना हुआ है.

निर्झर'नीर said...

Aap jaise chintak or vicharak hi desh ko nai disha denge yakinan .shubhkamnayen

Rakesh Kumar said...

बहुत भयावय स्थिति है.
जन जागरण अति आवश्यक है.
सचेत करती हुई प्रस्तुति के लिए आभार.