Friday, February 10, 2012

वो रोई नहीं, भावुक हुयी थीं, नहीं नहीं बस चिंतित थी ...LOL.......

बाटला एनकाउंटर पर दिग्विजय ने कहा- "फेक एनकाउन्टर है " , चिदंबरम ने कहा -"genuine एनकाउन्टर है" , खुर्शीद ने पहले कहा फूट-फूट कर सोनिया रोई, फिर बयान से मुकर गए बोले-"केवल भावुक हुयी थी" , फिर परवेज़ महोदय का बयान आया - "वे रोई, भावुक हुयी, बस चिंतित हुयी" , फिर कांग्रेस प्रवक्ता ने पूरे प्रकरण को अपने अट्टहास के नीचे दबा दिया मुसलामानों के वोट को खरीदने के लिए कितना नीचे गिरेगी ये पार्टी ? पल पल बयान बदलती कांग्रेस टुकड़ों में बंटी। इन महान हस्तियों को पहले एक-राय हो जाना चाहिए था की चार साल पुराना मुद्दा कैसे कैश करना है। वैसे कांग्रेस मुसलामानों को जितना मूर्ख समझ रही है, वे उतना भी मूर्ख नहीं हैं। समाजवादी पार्टी के आज़म खान ने कहा- "कांग्रेस अपना ड्रामा बंद करे"

5 comments:

दिवस said...

कांग्रेसियों की पोल खुल रही है। बयान बदलते रहना तो इनकी पुरानी आदत है। याद है न बेस्ट बेकरी काण्ड और तीस्ता जावेद सीतलवाड़।
एक ही मुद्दे पर नकी सर्कार के केबिनेट मिनिस्टर तक एकमत नहीं हैं, अब क्या बचा है इस पार्टी में विश्वास करने लायक? मुल्लों को समझ आ भी जाए तो क्या फायदा? कांग्रेस छोड़कर मुलायम का हाथ थाम लेंगे। कुल मिलाकर भारत के साथ तो घात ही करेंगे।

Bharat Bhushan said...

एक और बात ध्यान देने लायक है कि पार्टी प्रवक्ता के तौर पर झूठ बोलने के लिए सामने आने वाले अधिकतर नेता मुसलमान हैं. LOLz!!!!

Deepak Shukla said...

Madam ji...

Es rajnaitik drame main sab shamil hain...kya congress, kya samajwadi, kya bhajpa aur kya baspa... Voter bahut chalak ho gaya hai par aaj bhi dharmin avam jateey sameekaran rajnaitik sameekaranon par bhari hain... Tabhi sabhi partiyan usi dharm athva jaati vishesh ke ummeedwar khade karti hai jahan jis dharm athva jaati ki bahulta ho...

Saadar...

Deepak..

काजल कुमार Kajal Kumar said...

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

हां-हां-हां- मुझे तरस कोंग्रेसियों की मानसिकता पर नहीं अपितु इन तथाकथित वोट्भूतों पर आता है , ये नेता इन्हें कितना बड़ा @#$%^& (इस कोड भाषा को एक गंदा शब्द पढ़िए ) समझते है ! इसमें नेतावों की गलती नहीं है वे तो वोट रूपी मटन के भूखे भेड़िये है, मगर इन्हें ऐसा सोचने का अवसर किसने दिया कि ये वोट्भूत @#$%^& टाइप के हैं ? क्या यह तथाकथित बैंक इसकदर दिवालिया हो चुका है जो इन लालची भेडियों से यह नाहे पूछ सकता कि दिल्ली में कौंग्रेस की सरकार थी तब, केंद्र में कौंग्रेस की सरकार थी तब तो यदि यह बटलाभूत फर्जी था तो जिम्मेदारी किसकी थी, क्यों नहीं इस सरकार ने इस्तीफा दिया ? और सबसे बड़ा सवाल कि अगर ये ज़रा भी अक्लमंद होते तो पूछते कि सा@#$ तुन @#$%^& बना किसे रहे हो ? लेकिन नहीं इस मुद्दे का बार-बार उठना, और इन वोट्भूतों का उसका विरोध करने की बजाये खुश होना यह दर्शाता है कि इन लोगो को ऐसे ही झूठे अपीज्मेंट पसंद है ! यह भी देखने की बात है कि एक शानदार मगर मामूली सी पोलिस की कार्यवाही और घटना को ये कितना बढ़ा-चदा कर जटिल बना देते है, जबकि जो सेकड़ों निर्दोष उन विस्फोटों में मारे गए उनकी कोई सूद नहीं, गुजरात भी इसी तरह इन्होने तिल का ताड़ बनाया मगर १९८४ की बात कोई नहीं करता ! बस अंत में बटला मुठभेड़ में शहीद इन्स्पेक्टर चंद्रमोहन जी को श्रद्धांजली !