Friday, February 10, 2012

घडियाली आँसू ...

बलात्कार का शिकार होती मासूम बच्चियों के लिए दिल नहीं पसीजता, भूख से पीड़ित हो आत्महत्या करते किसानों के लिए दुःख नहीं होता, ठण्ड से मरने वालों का दर्द नहीं है, कारगिल के शहीदों के लिए आँखें नम नहीं हुयी जिसकी , वही आँखें रो पड़ीं आतंकवादियों की मौत पर धन्य हैं सोनिया-माता के घडियाली आँसू ...

7 comments:

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

दरिंदों के हृदय जो नहीं होता!

अरूण साथी said...

dhan dhan soniya mata.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ये तो हजम नहीं हुई....

Sunil Kumar said...

वोट की बात है ........

दिवस said...

बिलकुल सटीक
आज भाजपा उपाध्यक्ष विनय कटियार ने भी तीखे शब्दों में ऐसा ही बयान दिया था।
सोनिया का दिल भारत के लिए धडकता ही नहीं, तो पसीजेगा कहाँ से? खैर अभी बहने वाले आंसू भी घडियाली ही थे। वख्त पढने पर गधे को भी बाप बनाने वाली ज़मात कुछ भी कर सकती है। फिर मुल्ले तो फिर भी इंसानी शरीर में बैठे जानवर हैं। दिखने में तो इंसान ही हैं न।

प्रतिभा सक्सेना said...

नाटकबाज़ी इसे कहते हैं !

Bharat Bhushan said...

नेताओं के ऐसे नाटक पर पहले जनता को गुस्सा आता था. अब वह गुस्सा घृणा में परिवर्तित हो गया है. मेरा विचार है ये नेता इसे देख नहीं पा रहे हैं.