बलात्कार का शिकार होती मासूम बच्चियों के लिए दिल नहीं पसीजता, भूख से पीड़ित हो आत्महत्या करते किसानों के लिए दुःख नहीं होता, ठण्ड से मरने वालों का दर्द नहीं है, कारगिल के शहीदों के लिए आँखें नम नहीं हुयी जिसकी , वही आँखें रो पड़ीं आतंकवादियों की मौत पर। धन्य हैं सोनिया-माता के घडियाली आँसू ...