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Thursday, November 18, 2010

क्या भावुक लोग कमज़ोर होते हैं ?

अक्सर लोगों को ये कहते सुना है - " तुम भावुक हो , तुम कमज़ोर हो "

भावुक न होना दुसरे शब्दों में असंवेदनशील होने जैसा है। जो लोग ये समझते हैं की भावुक लोग कमज़ोर होते हैं , वो स्वयं को 'प्रक्टिकल ' कहते हैं। क्या भावुक लोग व्यवहारिक नहीं ? क्या वो दूसरों का दर्द अन्यों की तुलना में बेहतर तरीके से नहीं समझते । क्या दूसरों का दुःख गहराई से महसूस करना और उसके दुःख में शामिल होना भावुक व्यक्तियों की कमजोरी है । शायद हाँ ! संवेदनशून्यता की ओर बढ़ते हुए समाज को भावुक-जन कमज़ोर ओर अव्यवहारिक ही लगेंगे।

बुद्धिमान तथा व्यवहारिक समुदाय ये सोचता है की - अरे , आखिर ये मेरी इतनी मदद क्यों करना चाहता है ? जरूर इसमें इसका कोई निहित स्वार्थ होगा। अब शक का इलाज तो है नहीं। कुछ लोग सोचेंगे - अरे, इसके अपना घर परिवार नहीं है क्या , फुल टाइम दूसरों के बारे में सोचता रहता है ।

लेकिन भावुक इंसान तो भावुक ही है। इसकी नहीं तो उसकी मदद करेगा। दुनिया में दुखों का अम्बार है। इसलिए भावुक व्यक्ति कभी खाली नहीं बैठ पाता । किसी न किसी की चिंता उसको खाए ही रहती है। और वो भी मस्त रहता है परहित में सुख ढूँढने में।

भावुक व्यक्ति दूसरों के दुःख को शिद्दत से महसूस करता है और तत्पर रहता है उसके दुःख के निवारण के लिए। लेकिन कभी - कभी उसकी यही निस्वार्थ चेष्टा के गलत अर्थ लगा कर दुसरे उसकी निंदा करने लगते हैं। भावुक व्यक्ति एक सॉफ्ट टार्गेट बन जाता है , लोग उसे तरह तरह के अलंकारों से भी विभूषित करते हैं , लेकिन फिर वही "ढाक के तीन पात " । भावुक व्यक्ति फिर भी नहीं सुधरता, बहते जल की तरह अपनी दिशा मोड़ लेता है , और बहने लगता है , किसी और की शुष्क जिंदगी में आद्रता लाने के लिए।

मेरे विचार से एक भावुक व्यक्ति कमज़ोर नहीं होता बल्कि वो अपने जीवन की विषमताओं से लड़ना सीखता है , और दूसरों के दुखों का समाधान ढूँढने में तत्पर रहता है। हर बीतते दिन के साथ , अपने खट्टे-मीठे अनुभवों से वह निरंतर ही सीखता रहता है , और खुद को पहले से भी ज्यादा संवेदनशील और समाजोपयोगी बना लेता है।

भावुक व्यक्तियों को बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए की कहीं उनके अतिशय प्रेम से किसी को घुटन तो नहीं हो रही । कहीं उसके पारिवारिक संबंधों में दरार तो नहीं आ रहीं । यदि कभी ऐसा लगे तो समय रहते थोड़ी सी दूरी बना लेना चाहिए ताकि आपकी भावुकता दूसरों के लिए परेशानी का सबब न बन जाए ।

जो लोग बात-बात पर बुरा मान जाते हैं, रूठ जाते हैं , रोने लगते हैं , वो भावुक नहीं बल्कि असली कमज़ोर होते हैं ।ऐसे लोग over-sensitive और touchy होते हैं । ऐसे लोगों को भावुक कहकर भावुकता का अपमान नहीं करना चाहिए।

भावुकता एक अति-दुर्लभ गुण है । और सफ़ेद-बाघ की ख़त्म होती प्रजाति तरह भावुक लोग भी समाप्तप्राय ही हैं। इंसान की पूँछ की तरह ये भी एक दिन विलुप्त हो जायेगी , क्योंकि असंवेदनशील समाज में इसकी कद्र और उपयोगिता घटती जा रही है।

विश्व भर के कुछ भावुक लोगों को मेरा नमन -- बापू, मंडेला, ओबामा , भगत सिंह , बोस, विवेकानंद, किरण बेदी, अटल जी , APJ कलाम और अन्य कई भावुक हस्तियाँ जिन्हें अपने देश से और आम जनता के दुखों से अतिशय प्रेम ओर सरोकार था और है।

क्या ये सब कमज़ोर हैं ? जी नहीं ! ये भावुक हैं , और इसलिए सिर्फ अपने बारे में नहीं अपितु एक बड़े समुदाय के लिए सोचते हैं सतत।

मैं भावुक हूँ ,
कमज़ोर नहीं ।
भावुकता मेरी ताकत है ,
और भावुकता ही मेरा गहना ।

आभार ।