अथ श्री महाभारत कथा ...
कथा है पुरुषार्थ की ,ये स्वार्थ की , परमार्थ की
सारथि जिसके बने श्रीकृष्ण भारत पार्थ की
शब्द दिग्घोषित हुआ...
जब सत्य सार्थक सर्वथा
यदा-यदा हिधर्मस्य
ग्लानिर्भवति भारता
अभ्युत्थानं अधर्मस्य
तदात्मानं सृजाम्यहम
परित्राणाय साधुनाम
विनाशाय च दुष्कृताम
धर्म्संस्थाप्नाय
संभवामि युगे युगे
भारत की है कहानी , सदियों से भी पुरानी
है ज्ञान की ये गंगा , ऋषियों की अमर कहानी
ये विश्व भारती है ,वीरों की आरती है
है नित नयी पुरानी ,भारत की ये कहनी
Zeal