१६ सितम्बर २०१० , कानपूर फॅमिली कोर्ट में जज ने यह कहकर की सेक्शन -११ के अनुसार बिना सात फेरों के , हिन्दू विवाह अधूरा है , एक मासूम स्त्री नीरू का जीवन अन्धकार से भर दिया।
नीरू के पति , महोदय संतोष मिश्र ने कहा की शादी में केवल पांच फेरे ही लगे थे जिसके कारण ये शादी हिन्दू रीती के अनुसार अवैध है। और तलाक ले लिया।
नीरू की शादी के बाद मिश्र जी ने उसे पत्नी की तरह साढ़े तीन साल अपने घर में रखा। पत्नी की तरह, यानी उसके तन और मन का पूरा पूरा उपभोग किया। जब दिल भर गया तो शादी के साढ़े तीन साल बाद उसे मार-पीट कर घर से निकाल दिया। और यह कहकर तलाक ले लिया की शादी में केवल पांच फेरे ही लगे थे , जो हिन्दू रीती के विरुद्ध है।
नीरू ने न्याय की गुहार की सन २००१ में । न्याय मिला नौ साल बाद २०१० में। फैसला हुआ मिश्र जी के हक में। मासूम , अभागी नीरू का विश्वास उठ गया है इन्साफ पर से। उसने हाई कोर्ट में अपील से इनकार कर दिया , हार मान ली नीरू और उसके पिता ने।
यदि यह विवाह मान्य नहीं था तो मिश्र जी ने साढ़े तीन साल तक नीरू के साथ बलात्कार क्यूँ किया ?
न्यायालय में साक्ष्य के तौर पर विडियो दिखाया गया , जिसमें सात फेरे पूरे हैं। पंडित जिसने विवाह कराया था, ने गवाही दी की पूरे सात फेरे कराये थे। बहुत से गवाहों ने बयान दिया की वे प्रत्यक्षदर्शी हैं उन सात फेरों के । लेकिन माननीय जज महोदय ने कहा की दो फेरे कम हैं, अतः ये विवाह अवैद्य है।
हिन्दू शास्त्रों में १२ प्रकार के विवाह वर्णित हैं। जिसमें , सुर विवाह, असुर विवाह , गन्धर्व विवाह , प्रजापत्य विवाह आदि हैं । प्रजापत्य विवाह प्रचलन में है।
शास्त्रों के अनुसार , हिन्दू विवाह में चार , पांच , छेह तथा सात फेरों का प्राविधान है । यदि चार फेरे भी हो गए हैं , तो विवाह वैद्य मन जाएगा।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है की , शादी में सबसे पहले ' संकल्प ' लिया जाता है । यदि मन में संकल्प लिया जा चूका है , तो भी विवाह पूर्ण माना जाएगा।
नीरू के वकील का कहना है की कोर्ट में अपील करेंगे, न्याय निश्चित मिलेगा , लेकिन निर्दोष , मासूम नीरू टूटकर बिखर चुकी है । उसने कोर्ट के इस घिनौने फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाने से इनकार कर दिया है । उसका इन्साफ पर से विश्वास उठ चुका है।
आप बताएं नीरू को क्या करना चाहिए ?