हमारा शारीर कोशिकाओं से मिलकर बना है । प्रत्येक कोशिका [सेल ] में नोर्मल वृद्धि के तहत नयी सेल्स बनती हैं तथा समय के साथ नष्ट होती रहती हैं। लेकिन कभी कभी इन नोर्मल सेल्स में mutation [बदलाव] हो जाता है जिसके कारण , उस कोशिका का DNA damage हो जाता है था वह कोशिका बहुत तेजी के साथ वृद्धि करने लगती है तथा जीर्ण कोशिकाएं नष्ट भी नहीं होतीं , जिसके फलस्वरूप वहां ट्यूमर बन जाता है। अतः बहुत तेजी से [uncontrolled ] तरीके से विकृत कोशिका के निरंम्तर विभाजन को ही कैंसर कहते हैं।
यह दो प्रकार का होता है -
- सौम्य [Benign]
- घातक [ Malignant ]
ये स्तन की कोशिकाओं में पैदा होता है । ये दुग्ध्वाहिकाओं में हो सकता है अथवा लोब्युल्स जो दुग्ध्वाहिकाओं को दुग्ध पहुंचाते हैं , उनमें हो सकता है। इसी आधार पर इसके दो प्रकार हैं।
- ductal carcinoma -
- lobular carcinoma -
शून्य अवस्था- यह benign अवस्था है , जिसमें कैंसर घातक नहीं होता। लम्बे अरसे तक कोई गाँठ अथवा ट्यूमर शरीर में बना रह सकता है , जो न तो बढ़ता है , न ही फैलता है और रोगी को कोई नुकसान नहीं होता।
प्रथम , द्वितीय तथा तृतीय अवस्था -
इसे early stage कहते हैं। इस अवस्था में रोग का निदान तथा चिकित्सा बेहतर हो सकती है । तथा रोगी को स्वास्थ्य लाभ होने की संभावना भी अधिक रहती है।
रोग की चतुर्थ अवस्था -
इसे रोग की एडवांस अवस्था कहते हैं । इस अवस्था में कैंसर काफी बढ़ चुका होता है। रोगी को चिकित्सा का ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता तथा उसके बचने की उम्मीद कम रह जाती है।
कैंसर के लक्षण -
- स्तन में गांठों का होना।
- arm pits [कांख] में गांठों का होना भी कैंसर की पुष्टि करता है।
- स्तनों के आकार या संरचना में परिवर्तन होना।
- स्तन की त्वचा में गड्ढे पड़ना ।
- nipples का अन्दर की तरफ धंसना।
- nipples से अचानक किसी प्रकार के तरल पदार्थ का स्राव होने लगना।
- Inflammatory स्तन कैंसर में दर्द , सुजन, लाली तथा स्पर्श में गरम लगता है।
- कभी कभी तेजी से गिरता हुआ वज़न तथा हड्डी में तीव्र वेदना भी एक लक्षण होता है।
कैसर का खतरा बढाने वाले कारक -
१- किसी स्त्री को यदि बच्चा न हो तो स्तन कैंसर होने के ३० % संभावनाएं होती हैं।
२- स्तनपान ना कराने से।
३-होर्मोनेस का स्तर अधिक होने से।
४-इकोनोमिक स्टेटस
५- भोजन में आयोडीन की कमी
६-परिवार में यदि बहिन या माता , या रिश्तेदार को है तो भी संभावना बढ़ जाती है।
७- मोटापा
८-मदिरापान , तम्बाकू सेवन
९-यदि एक स्तन में है तो दुसरे स्तन में होने की संभावना बढ़ जाती है।
१०-रेडियेशन के एक्सपोज़र से।
स्तन कैंसर की जांच -
- Breast self examination -
- Mammographic screening - X- rays द्वारा स्तन की imaging , जिससे बहुत early stage में ही कैंसर का पता चल जाता है । जब गाठें बहुत छोटी होती हैं तथा छूने से महसूस नहीं हो पाती , उसका भी पता मैमोग्राफी से लग जाता है।
- physical exercise नियमित करने से।
- शराब तथा धुम्रपान का त्याग
- समय से गर्भ-धारण करना
- शिशु को स्तनपान कराने से भी स्तन कैंसर का खतरा कम रहता है।
- hormone therapy
- Surgery [शल्य चिकित्सा ]
- Chemotherapy [दवाओं से]
- Radiation [विकिरण ]
पुरुषों में स्तन कैंसर बहुत कम होता है । करीब एक लाख पुरुषों में किसी एक को ही होता है। लेकिन अब पुरुषों में भी स्तन कैंसर की संख्या बढ़ रही है। स्त्री तथा पुरुषों के स्तन-कैंसर में थोडा बायोलोजिकल अंतर रहता है। पुरुषों में गांठें मिलने की संभावना अधिक रहती है। ये estrogen तथा progestron positive होते हैं। पुरुषों में डायग्नोसिस अक्सर एडवांस अवस्था में होती है , इसलिए देर हो जाने के कारण चिकित्सकीय लाभ कम मिल पाता है।
बच्चों में स्तन कैंसर -
बच्चों में स्तन कैंसर नहीं होता । Ductal invasive carcinama , केवल adults में होता है । लेकिन adolocents में ०.१ % संभावना को नकारा नहीं जा सकता । puberty के समय कन्याओं में स्तन विकास की शुरुवात , इस तरह की गाँठ [बटन ] से ही होती है। यह नोर्मल ग्रोथ है । लेकिन यदि इसमें दर्द या फिर खुजली [itching] हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ।
कुछ बातें -
- स्तन कैंसर जितना घातक है , उतनी ही घातक इनकी चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली औषधियां हैं। अतः जागरूक रहकर समय रहते इसका निदान और चिकित्सा करा लेनी चाहिए।
- Radiation द्वारा स्वस्थ्य कोशिकाएं भी नष्ट होती रहती हैं । इसलिए अब shaped beam का प्रयोग करते हैं।
- स्त्रियों को कम उम्र में होने पर ख़तरा ज्यादा रहता है। स्तनपान कराने वाली माताओं में उस अवस्था में कुछ परिवर्तन समय रहते नोटिस नहीं हो पाते।
- Menopause के बाद बढ़ते हुए वजन को कंट्रोल में रखकर स्तन कैंसर से बचा जा सकता है॥
विषय में जागरूकता भी बहुत मदद करती है।