अथर्ववेद के उपवेद "आयुर्वेद" को तो उसका समुचित सम्मान मिल नहीं पा रहा। अब चोर उचक्कों ने आयुर्वेद के एक अंग "योग" को अलोपैथी में शामिल कर लिया है। फिर लफ्फाजी क्यों करते हैं की सभी अपनी-अपनी पैथी द्वारा ही चिकित्सा करें। अलोपैथी की जहरीली दवाईयों द्वारा लाखों जानें जा रही हैं, अनेक अन्य घातक परिणाम सामने आ रहे हैं , तो स्वयं को बचाने के लिए अब MBBS में 'Yoga' शामिल कर लिया । ' चरक संहिता' पहले ही शामिल कर चुके हैं।
अरे चोरी करने और पराया माल अपना बताने से तो बेहतर है , अपनी संस्कृति, सम्पदा और धरोहर 'आयुर्वेद' में वर्णित चमत्कारिक चिकित्सा पद्धति को सम्मान दो।
Zeal
