फिरंगियों के साथ मिलकर सरकार 'रामसेतु' को क्यों तोडना चाहती है? क्योंकि
उस समुद्री इलाके में अकूत रेडियोएक्टिव संपदा भरी हुयी है , जिससे आगामी
200 वर्षों तक बिजली बनायी जा सकती है! अमेरिका की निगाह , हमारी इसी
सम्पदा पर है!
और सरकार ? ---वो तो फिरंगियों का ही साथ देती है
हमेशा ! हिन्दू धर्म का दोहन तो उसका मुख्य अजेंडा है। उसे न तो रामसेतु से
कोई मतलब है, न ही पर्यावरण से और न ही करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से!
भारतीयों एकजुट हो जाओ , मत टूटने दो रामसेतु को, मत लुटने तो अपनी पौराणिक , ऐतिहासिक धरोहर को और इस अकूत सम्पदा को!

