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Tuesday, November 22, 2011

वतन की माटी ..

अनेक मंचों पर चर्चाओं के दौरान लोगों के ये ताने सुने कि -"आप तो विदेश में रहती हैं , आपको भारत देश के बारे में सोचने का क्या अधिकार है ? "

इस बचकानी दलील का क्या जवाब दूं ? ...आप दुसरे शहर में बस जाते हैं तो क्या माँ को भुला देते हैं ? बेटियां विदा होने के बाद मायके को भूला बैठती है ?

वो भारतवासी क्या जो भारत कि माटी को ही भुला दे।

जन्मभूमि से जुडी हमारी जडें इतनी कमज़ोर नहीं कि विदेशी धरती पर पाँव रखते ही मुरझा जाएँ।

अपनी माँ अपनी ही है , अमिट प्यार जो है करती...

वन्दे मातरम् !

Zeal