नेहरू , जनमत संग्रह की बात कहते हुए काश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले गये। सं।रा.संघ ने सैनिक कार्यवाही रुकवा दी। नेहरू ने राजा हरिसिंह को विस्थापित होने और शेख अब्दुल्ला को अपनी सारी शक्तियां सौंपने पर भी मजबूर किया। शेख ने शेष भारत से स्वयं को पृथक मानते हुए वहां आने वालों के लिए अनुमति पत्र लेना अनिवार्य कर दिया। इसी प्रकार अनुच्छेद 370 के माध्यम से उसने राज्य के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त कर लीं और कौमी एकता को भड़का दिया। राष्ट्रवादियों ने अखंड भारत होने के लिए काश्मीर विलय के लिए आन्दोलन किया जिसमें कान्तिकारी और देशभक्त डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बढ़-चढ़ का भागीदारी की । उन्होंने बिना परमिट के काश्मीर यात्रा की जहाँ षड़यंत्र करके उनकी हत्या कर दी गयी।
नेहरू के कारण हजारों देशभक्तों और क्रांतिकारियों की जान चली गयीं।
हालांकि बाद में इस खूनी मौतों का सिलसिला उनके परिवार में भी चालू हो गया। जैसा बोया था वैसा ही काटा भी उन्होंने।
जय हिंद !
जय भारत।