हिन्दुओं के वोट विभाजित करने के लिए केजरीवाल
ने बनायीं तीसरी पार्टी (आम आदमी की पार्टी) ! पहले खुद तो आम बनकर जीना
सीख लेता , खुद को तो खासमखास बनाकर रखना चाहता है , ये आम आदमी को क्या
समझेगा जो अपनी टीम के ख़ास लोगों को ही नहीं समझ सका ! इससे लाख दर्जे
बेहतर तो "शिव सेना" है जिसने हिन्दू वोट बंटने ना पाए इसलिए सर्व सम्मति
से भाजपा को अपना समर्थन देकर हिन्दुओं की एकता को अखंड किया है !केजरीवाल ने अपनी महत्वाकांक्षा और स्वार्थ के चलते ये "आम आदमी की पार्टी" बनायी है !
नाम और स्वार्थ का भूखा है ! यदि वह निस्वार्थ देश की सेवा करना चाहता है
तो मोदी का साथ क्यों नहीं दिया ! मोदी के नेत्रित्व में क्यों नहीं ? एक
और एक मिलकर ग्यारह होते हैं , अकेले अकेले तो दोनों की ही कोई औकात नहीं
रह गयी ! सिर्फ शासक बनना चाहता है ! सत्ता में बैठकर राजसी भोग करना
चाहता है ! अन्ना के साथ जुड़कर अन्ना के मुद्दे जन लोकपाल की बधिया बैठा
दी , अब मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू वोट तोड़कर पता नहीं कौन सी देश सेवा
करेगा !--
मोदी केजरीवाल से सौ गुना बेहतर विकल्प है !
केजरीवाल
को कोई भी देशभक्त नहीं लगता ! सब नालायक और निकम्मे हैं ! अगर कोई
सद्बुद्धि वाला नेता है तो बस केजरीवाल ही है ! लेकिन शायद उन्हें ये नहीं
पता की एक बार 'नेता' बनने का रोग लग जाए तो वापस "आम आदमी" बनना मुश्किल
ही नहीं नामुमकिन है ! काश वो सच में आम आदमी का दुःख दर्द समझ सकता!
उसने तो राजनीति की सीढयाँ चढ़ने के लिए जालीदार टोपी पहन ली और आम आदमी को
टोपी पहना दी !