सरकारी महकमे में एक चपरासी था।
अचानक पत्नी के देहांत हो जाने से सब अस्त-व्यस्त हो गया। छोटे-छोटे तीन
बच्चों को कौन संभालता। बच्चों की मौसी ने माँ की तरह तीनों बच्चों को
पाला और उन्हें लायक बनाया। मौसी और उस व्यक्ति के बीच कोई प्रेम-सम्बन्ध
नहीं था ! मौसी का भी कोई नहीं था ! रोजी रोटी का भी कोई सहारा नहीं था !
उस
व्यक्ति ने अपने रिटायरमेंट के बाद उससे विधिवत , कानूनी विवाह कर लिया
और कहा की उसकी मृत्यु के बाद उसकी पेंशन उसकी नयी पत्नी को मिले! एक वर्ष
बाद उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी ! वो पेंशन आज भी उस स्त्री (मौसी) को
मिल रही है और उसी से उसका गुजारा चल रहा है!
वो व्यक्ति कभी भी उससे मिलने नहीं गया ताकि कोई भी अनायास उस स्त्री पर ऊँगली ना उठा सके, लेकिन उसके एहसानों का बदला चुका गया !
धन्य हैं ऐसे लोग
Zeal