अजी कैसे न लें ?
पहले भिगो-भिगो के मारते हैं फिर चाहते हैं जोर का झटका धीरे से लगे । कभी जेहमत उठायी अपने शब्दों को रिक्टर-पैमाने पर नापने की ? जनाब पूरा मोहल्ला हिल जाए इतना खतरनाक है आपका वक्तव्य।
अरे भाई , सामने वाले की बर्दाश्त करने की क्षमता का परिक्षण करने के बाद ही अपने शब्द-बाण चलाया करें । आपने ने अपना दुलारा समझकर ढेर सारा प्रवचन लिख दिया , और हिदायत भी दे दी -"कृपया अन्यथा मत लीजियेगा " । लेकिन मानव-ह्रदय ! उसका क्या ? उसने भी कुछ सोचा समझा और आपको अपना लाडला समझ दो चार प्रवचन दे डाले बदले में । दुलार के बदले दुलार । आखिर बुराई क्या है ?
लेकिन अब आपने अन्यथा ले लिया न ? बुरा लग गया न ? ये तो होना ही था । वही मानव ह्रदय ! बुरा लगने वाली बात बुरी लगेगी ही । इसीलिए कहा गया है --
" Think twice before you speak "
पहले नापिए-तौलिये अपने शब्दों की महिमा को। यदि आपको लगता है की दुसरे को बुरा लग सकता है , तो मत लिखिए। डिलीट कर दीजिये अपने दुलार भरे वक्तव्य को। बिना मांगे राय कभी मत दीजिये किसी को --
" Advices are given by fools and taken by idiots "
अक्सर होता क्या है , लोग दरियादिली के साथ दूसरों को पाठ तो पढ़ा देते हैं , लेकिन खुद को आने वाली प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार नहीं कर पाते हैं।
" Each and every action has an equal and opposite reaction "
इसलिए पहले खुद को भी जांच परख लें की आप कितने छुई-मुई हैं। यदि प्रतिक्रियाओं को झेलने की क्षमता न हो तो सोच-समझ कर ही ऊँगली उठाएं। वरना आप भी -- " पर उपदेश कुशल बहुतेरे " की श्रेणी में रख दिए जायेंगे।
और परिणाम क्या होगा ? आप दोनों के बीच की दूरियां बढ़ जायेंगी। एक इधर मुह फुलाकर , दूसरा उधर गुस्सा होकर चला जाएगा ।
क्या हासिल हुआ ? कुछ भी नहीं । एक अच्छा रिश्ता था , वो भी उपदेशों की भेंट चढ़ गया।
इसलिए यदि आप चाहते हैं की कोई आपकी बात अन्यथा न ले , तो ऐसा कुछ भी मत लिखिए जिसे अन्यथा लिए जाने की संभावना हो । या फिर अगले की प्रतिक्रया के लिए स्वयं तो तैयार रखें।
" Always practice what you preach "
ज़रा ठहरिये । आती हूँ अभी ....
After the commercial break ......
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