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Saturday, February 2, 2013

कांग्रेस की बैसाखी है इस्लाम या फिर इस्लाम की बैसाखी है कांग्रेस ?

इस्लामिक कांग्रेस !

खबरदार अगर किसी ने कांग्रेस को कुछ कहा तो ! वो तुष्टिकरण नहीं करती ! वो तो पालती पोसती है अपने लाडलों को , फिर चाहे वो खान पारिवार हों अथवा अफज़ल हो अथवा कसाब।  चाहे वो अश्लीलता करें , परदे पर नाचें अथवा कसाब की तरह क़त्ल और आतंकवाद करे ! इन सब पर हमारी सरकार दया दृष्टि रखती है ! इनके लालन-पालन में कोई कसर नहीं छोडती !

कांग्रेस की बैसाखी है इस्लाम या फिर इस्लाम की बैसाखी है कांग्रेस ?  मुस्लिम वोटों की दया के बिना कांग्रेस डूब जायेगी या कांग्रेस की दया के बिना मुसलमान बर्बाद हो जायेंगे ?

अगर थोड़ी सी भी बुद्धि का इस्तेमाल करें ये लोग तो आसानी से समझ सकते हैं कि कांग्रेस केवल इनका इस्तेमाल कर रही है अपने निजी हित में ! कांग्रेस ने मुस्लिम समाज का स्वाभिमान खरीद लिया है और उसे डरे-सहमे रहकर जीने को मजबूर कर दिया है!

यदि भारत से इतनी ही तकलीफ है तो इन लोगों को पाकिस्तान में जाकर पुरसुकून से रहना चाहिए , लेकिन नहीं ये लोग बहुत चतुर हैं , हमारा अधिकार मारकर , हमारा खून पीने के लिए यहीं जमे हुए हैं !  लेकिन सनद रहे -कभी नाव गाडी पर तो कभी गाडी नाव पर होती है !

खुशनसीब हैं गुजरात के मुसलमान जो अपने नेता को उसके धर्म से नहीं , बल्कि उसके कर्म से पहचानते हैं ! और इसीलिए लगातार उन्नति कर रहे हैं और खुशहाल हैं !

आज तक दो ही मुसलमान देखे जो खुले दिमाग से सोचते हैं --

सलमान रुश्दी
तस्नीमा नसरीन

इन दोनों ने इस्लाम को सच्चे अर्थों में समझा है और बंगाल-शेरनी को भी दहला के रख दिया है।