Sunday, August 29, 2010

ये नकाबपोश लड़कियाँ !---आखिर कब सुधरेंगी ?

मुस्कुराइए की आप लखनऊ में हैं ।

क्या ख़ाक मुस्कुराएं ? कभी आकर देखिये मेरे लखनऊ में , नियमों का उल्लंघन !

२० अगस्त, २०१०, आईटी चोराहे पर रेड लाइट होने पर खड़े थे, हमारी कार में भैया, मैं, दीदी और भतीजा बैठे थे। हरी बत्ती होने का इंतज़ार कर रहे थे। बायीं तरफ से लोग निकल कर फैजाबाद रोड पर मुड़ते जा रहे थे। मेरे मुंह से निकला , वाह! कम से कम यहाँ लोग हेलमेट तो पेहेनते हैं। भाई ने कहा, पहनेंगे नहीं तो उनका चालान हो जाएगा।

मैंने कहा ..." सभी तो हेलमेट लगाये हुए हैं , फिर दिक्कत क्या है ?" भाई ने कहा , ध्यान से देखो जो भी हेलमेट लगाए हैं उनमें से ज्यादातर पुरुष हैं। गलती से भी हेलमेट नहीं है तो पुलीस वाले चालान कर देंगे, लेकिन अगर कोई लड़की नहीं लगाए है तो उसे बिना कुछ कहे जाने देंगे। उनका चालान नहीं होगा।

मैं गौर से देखा, सचमुच ज्यादातर लड़कियाँ, अपने चेहरे और हाथ को सूती कपडे से ढके, नकाबपोश बनी, बिना हेलमेट के निकली जा रही थीं । उनको कोई कुछ नहीं कह रहा था।

Traffic rules में भी double standard ?

मेरे मुंह से निकला , अरे इस नकाब से तो बेहतर हेलमेट ही है, लड़कियाँ स्मार्ट भी लगेंगी और खुदा न खस्ता, accident हो जाने पर ,सर भी सुरक्षित रहेगा।

मेरा भतीजा जो हमारा वार्तालाप सुन रहा था, हँसते हुए बोला - " लड़कियों के पास बुद्धि भी होती है , जो अपने सर की सुरक्षा के बारे में सोच सकें ? जिस दिन इनके पास बुद्धि आएगी, खुद-बखुद हेलमेट पेहेनने लगेंगी । "

गुस्सा बहुत आयी उसपर लेकिन क्या कह सकती थी उसे ।

मेरे विचार से , Teenagers तो नासमझ हैं, लेकिन इनके माँ-बाप को समझाना चाहिए की हेलमेट पहनो। कानून का पालन भी होगा और सर भी सुरक्षित रहेगा।

वैसे आपका क्या विचार है?

40 comments:

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

apna vichar to acchha hi hai.....ki aapko bhi hel-met lagaa hi lena chahiye haiga....!!

vandana gupta said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
कल (30/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

Anonymous said...

इसमें सिर्फ और सिर्फ पुरुषों की, खासकर लड़कियों के घर के पुरुष सदस्यों की गलती है. लड़कियां हैलमेट की जगह नकाब पहनती हैं इसके लिए पुरुष ही ज़िम्मेदार हैं, सजा जुर्माना और अपमान लड़की के पिता या भाई का होना चाहिए. हैलमेट न पहनने वाली लड़कियों को बेवकूफ कहने वालों को सरेआम फंसी पर लटका दिया जाना चाहिए :)

प्रवीण पाण्डेय said...

हेलमेट पहनना चाहिये।

प्रतुल वशिष्ठ said...
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प्रतुल वशिष्ठ said...

मेरा विचार है कि उनको कतई हेलमेट नहीं पहनना चाहिए.

— जब लज्जा नामक कवच ही नहीं पहनने को तैयार तब हेलमेट नामक कवच क्या पहनें?
— उन्हें अपने सर की सुरक्षा से अधिक सतत प्रदर्शित सौन्दर्य प्यारा है.
— जहाँ आंतरिक गुणों में कमी होती है, वहाँ स्थूल गुणों को उकेरने में लग जाती हैं महिलायें.
— उन्हें एक क्षण को भी सहन नहीं कि उनकी सुन्दरता पर हेलमेट रूपी पर्दा पड़े.

जब हालत सुधर ही नही सकती तब सीधा बोलने से क्या लाभ. इसलिये कहता हूँ कि महिलाओं को हेलमेट कतई नहीं पहनना चाहिए.

वैसे हेलमेट पहनने से मुँह छिप जाएगा. आप क्यों मुँह छिपाने वालों की फौज खड़ा कर लेना चाहती हैं?

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा । बुद्धि हो तो उसे इस्तमाल भी करना चाहिए ।

आपका अख्तर खान अकेला said...

bhaayi pehli baat to yeh he ke mhilaayen mnchlon se preshaan hen dusri baat yeh he ke mhilayen khaan ja rhi hen chera khulaa hone pr logon ko ptaa lg jata he tisri baaty to he hi shi ke prdushn ke shahr men chilkti dhup men chehre ko infection s bhaane ka bs yhi raasta he. akhtar khan akela kot rajsthan

P.N. Subramanian said...

दुपट्टे से नकाब बाँध कर वे अपनी पहचान छिपाती हैं.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

छिपाने अऊर बचाने में बहुत अंतर है... हेल्मेट बचाने के लिए पहिना जाता है और दुपट्टा छिपाने के लिए... अगर हेल्मेट के जगह दुपट्टा लपेट लिया जाए त न छिपेगा न बचेगा... हमको अपने उमर के हिसाब से बहुत सा बात कहने में हिचक महसूस होता है, बस दुष्यंत कुमार का बात कहना चाहते हैं..
जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में—
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है

कम लिखे को जादा समझो, खत को तार!!! बाकी गुनी जन बोलेंगे इस बात पर!!

प्रवीण said...

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दिव्या जी,

हेल्मेट का तो महज एक उदाहरण है...मुझे तो हैरानी तब भी होती है जब वही लड़कियाँ दिसम्बर-जनवरी की सर्दी में किसी फंक्शन में स्लीवलेस पहन कर ठिठुरती दिखती हैं...या ६ इंच की पेंसिल हील पहन कर मॉर्निंग वाक को जाती हैं...

मेरा भतीजा जो हमारा वार्तालाप सुन रहा था, हँसते हुए बोला - " लड़कियों के पास बुद्धि भी होती है , जो अपने सर की सुरक्षा के बारे में सोच सकें ? जिस दिन इनके पास बुद्धि आएगी, खुद-बखुद हेलमेट पेहेनने लगेंगी । "


क्षमा करियेगा विषय से हट कर है...पर पूछ ही लेता हूँ...आप डॉक्टर जो हैं...

" क्या यह सही है कि लड़कियों के मस्तिष्क का वजन लड़कों के दिमाग से १००-१५० ग्राम कम होता है ?"


आभार!


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Anonymous said...
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Anonymous said...

मैंने सुना है की रूस के सरकारी वैज्ञानिकों का दावा है की लड़कियों का दिमाग गिलहरी के दिमाग भी छोटा होता है. क्या यह सही है? ;)

ZEAL said...

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Vishwanath Gopalkrishna
to me

show details 5:27 PM (4 hours ago)

I tried posting this comment but there were some technical difficulties.
After three attempts, the comment still did not go through.
I don't know why.
I am therefore sending this comment to you by email.
Regards and best wishes
G Vishwanath from Bangalore


दिव्याजी,

अभी अभी आपका यह लेख पढा।
अब कीमत चुकाने का समय आ गया है।
लीजिए, हमारी टिप्पणी स्वीकार कीजिए।
इस बार हिन्दी में लिख रहा हूँ।

बेंगळूरु में भी हेल्मेट पहनना अनिवार्य है।
लड़के और लड़कियाँ दोनों पहनते हैं।
नहीं पहना तो दोनों का चालान हो जाता है।

continued .....
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ZEAL said...

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हेल्मेट पहनने का फ़ायदा कोई मुझसे सीखे।
तीस साल पहले मैं भी मोटर साइकल चलाता था।
एक दिन, दो पुलिस कर्मचारी, जो तेज रफ़्तार से अपना बुल्लेट मोटर साइकल चलाते आ रहे थे, उनसे मेरा "हेड ऑन" टक्कर हुआ।

मोटर साइकल को क्या हुआ उसके बारे में मत पूछिए।
मोटर साईकल की हालत का वर्णन करना मेरे बस के बाहर है।

इस टक्कर ने मेरे शरीर को हवा में ६ फ़ुट ऊपर उछाल दिया और मैं अपनी पीठ पर जा गिरा और मेरा सिर फ़ूटपाथ से टकराया।

मैं हेल्मेट पहना था। हेल्मेट में दरार आया पर बदन पर कुछ मामूली चोट/खरोंच को छोडकर मुझे कुछ नहीं हुआ। उस हेल्मेट ने मेरी जान बचायी। बस कुछ क्षणों के लिए मैं सदमे के कारण अर्धचेत रहा पर तुरन्त लोगों की मदद से अपने पैरों पर खडे होने में सफ़ल हुआ।

अपने भतीजे से कहिए कि ज्यादातर लडके हेल्मेट इसलिए नेहीं पहनते कि वे बुद्धिशाली हैं।
वे इसलिए पहनते हैं कि वह अनिवार्य है। मर्दों का बुद्धी पर कोई "मोनोपोली" नहीं है।

शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ
(बेंगळूरु स्थित आपका नया पाठक और शुभचिंतक)
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ZEAL said...

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वंदना जी,

आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।
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ZEAL said...

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@--वैसे हेलमेट पहनने से मुँह छिप जाएगा. आप क्यों मुँह छिपाने वालों की फौज खड़ा कर लेना चाहती हैं?

बेहद जायज प्रश्न।

@--कम लिखे को जादा समझो, खत को तार!!!

थोड़े को ज्यादा ही समझा।

अख्तर खान जी,
बढ़िया जानकारी दी आपने।

विश्वनाथ जी,
इतनी खूबसूरत टिपण्णी के लिए आभार। .
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ZEAL said...

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प्रवीण शाह जी एवं ab inconvenienti जी ,

आपके प्रश्न का उत्तर 'हाँ' है, लेकिन भाभी जी से न कहियेगा, वर्ना आप लोगों की खैर नहीं।
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कुमार राधारमण said...

दुर्घटना में महिलाओं के सिर फूटने की खबरें कुछ दिनों तक लगातार छपें,तब चेतेंगी ये।

राजन said...

iske peeche bhi hamara samaajshastra hai.ladkiyon ke guno ke bajaby uske chehre ko mahattava diya jata hai.isiliye wo chehre ke prati jyada samvedansheel rahti hai.aur ye saari jugat karti rahti hai.

राजन said...

ab bhai aur praveen ji, dimaag ke aakar ki baat mat kijiye warna ladkiyaan ye to maan lengii ki unka dimaag chota hai par hum purushon ko MOTI BUDDHI WALA kahna shuru kar degi aur iska matlab to aap jaante hoinge na.ha ha ha [waise main kyo hans raha hun is baat par...]

डा० अमर कुमार said...
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वाणी गीत said...

हैदराबाद के आबिद रोड पर अपनी फ्रेंड के साथ टू व्हीलर पर जाते समय एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने रोका ..मेरी फ्रेंड ने हेलमेट नहीं लगा रखा था ...लम्बी चोटी में हेलमेट पहनने में परेशानी होने की बात पर उन्होंने चोटी काट लेने का सुझाव तक दे दिया ...बहुत रिक्वेस्ट करने और अचानक तेज बारिश हो जाने पर ही कभी भी बिना हेलमेट के गाडी नहीं चलाने का आश्वासन देने पर ही जाने दिया ...
ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाने वाले ज्यादातर लोंग लड़के और लड़कियों का भेद नहीं करते ...
अपने सर की सुरक्षा के लिए हेलमेट जरुर लगाना चाहिए ...

@ वैसे नकाब में यहाँ(ब्लॉगजगत ) कौन नहीं है ....!!!!

@ दिमाग का वजन ज्यादा होना उसमे ज्यादा सामग्री होने की गारंटी नहीं है ..टेलीविजन धारावाहिक देखकर बताएं कि ज्यादा दिमाग किसमे है ..:):)


मेरे पिछले कमेन्ट से आप आहत हुई, शायद मैं अपनी बात ठीक से प्रेषित नहीं कर पायी...मगर अब मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहती ...बस इतना ही कि कमेन्ट करने वाली दिव्या भी कायर नहीं थी , ये भी नहीं है !!

Udan Tashtari said...

स्व सुरक्षा का सवाल है और जब उसी में कोताहि तो क्या कहा जाये.

Satish Saxena said...

समझ नहीं आता कि हैडिंग पर कमेन्ट दूं या पोस्ट पर ...
न देना ही अच्छा है बवाल हो जायेगा ... zeal को दुबारा शुभकामनायें

Avinash Chandra said...

हेलमेट पहनना ही चाहिए..इसमें कोई दो राय नहीं है.
हालांकि मैं... "Teenagers तो नासमझ हैं, लेकिन इनके माँ-बाप को समझाना चाहिए की हेलमेट पहनो।" से इत्तेफाक नहीं रखता...
बाईक के सारे "gear" और "Inception" के सभी कांसेप्ट समझने वाले ये "So called teenagers" नासमझ नहीं हैं,जान बूझ के ऐसा करते हैं...मुझे दुःख है स्वीकारने में लेकिन इस "show-off/carelessness" को "style" कहती है हमारी (मेरे वय की या उससे भी छोटी) पीढ़ी..माँ-बाप के समझाने पर समझ ही लेते तो क्या बात थी......

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

Kajal Kumar said...

अंग्रेज़ी में एक शब्द है fad, मुंह पर इस तरह की गमछेबाज़ी इससे ज़्यादा कुछ नहीं...

Shah Nawaz said...

बिलकुल सही कहा, जहाँ तक बात हैलमेट की है तो चाहे लड़के हो या लड़कियां, दोनों को ही इसे चालान काटने के डर से नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए पहनना चाहिए.

वीरेंद्र सिंह said...

No doubt Divya ji.... Everybody should use helmet while driving.

सुज्ञ said...

हैलमेट के बहाने………॥
दिमाग पर चोट!!
सुरक्षा हटी कि दुर्घटना घटी

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

arvind said...

bahut badhiya post...sabhi ko helmet pahankar driving karana chaahiye.

ashish said...

विलम्ब से पहुचने का फायदा ये होता है की बहुत सारे विचार विमर्श हो चुके होते है . सब कुछ तो कहा जा चूका है मुझे बस इतना कहना है की हेलमेट पहनने में लिंग भेद , दुर्घटनाओ में हुई मृत्यु की संख्या में इजाफा ही करेगा , जिसको कम करने के लिए सरकार ढेर सारी यातायात नियम और सुविधाए उपलब्ध कराने का दावा करती है.

hem pandey said...

ट्रैफिक पुलिस को हेलमेट से अधिक रैश ड्राइविंग , अधिक सवारी बैठाना, लालबत्ती का अतिक्रमण आदि पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिससे दुर्घटनाएं कम हों.हेलमेट ड्राइवर को स्वविवेक से पहनना चाहिए.

सदा said...

बिल्‍कुल सही कहा आपने ।

बसंती said...

लड़कियाँ !---आखिर कब सुधरेंगी ?

ZEAL said...

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सभी पाठकों को , अपने बहुमूल्य विचार साझा करने के लिए ह्रदय से आभार।

शिवम् जी एवं वंदना जी,
मेरी पोस्ट को चर्चा में शामिल कर आपने जो सम्मान दिया है, उसके लिए आप दोनों का बहुत-बहुत आभार।

वाणी जी,
मनोबल बढाने के लिए आपका आभार।
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सागर नाहर said...

अमर कुमार जी की बात से सहमत हूं।
हाँ मित्रों, यह हमारा दुर्भाग्य ही है.. या एक क्रूर सच, कि.. ( मेरे और सभी पुरुषों सहित ) हम सब 150 ग्राम कम वज़न के मग़ज़ वाली किसी न किसी माँ की सँतान हैं :(

ethereal_infinia said...

Dearest ZEAL:

The 'Helmet' rule is made more mandatory by commercial of manufacturers rather than the safety angle to it.

There was a time in Punjab and even Delhi I guess when helmets were not allowed due to the risk of terrorism.

And after all, there are rules and there are guidelines. Donning a helmet can be just a guideline. It shouldn't be enforced.


Arth kaa
Natmastak charansparsh