Friday, September 7, 2012

आग लगे बस्ती में , मीडिया अपनी मस्ती में

पूर्वी असाम , मणिपुर , गोवाहाटी, कोकराझार आदि क्षेत्रों के आर्मी बेस पर उल्फा के आतंकवादी संगठन ने तकरीबन ११ सीरियल बम-ब्लास्ट किये , जिसमें २० से ज्यादा सैनिकों की जान जाने की खबर मिली है ! मीडिया ने इस समाचार को दिखाना उचित नहीं समझा ! वो केवल दिग्गी के निरर्थक और वाहियात बयान दिखाना ही पसंद करती है !

Zeal

11 comments:

रविकर said...

मार्मिक खबर -
जूँ नहीं रेंगी है अभी तक-

दिवस said...

बहुत दुःख होता है यह जानकर कि देश का रक्षक मरता है तब भी मीडिया मौन है। किसे बचाने के प्रयास कर रही है मीडिया? क्या नैतिकता जैसी कोई चीज़ इस देश में बची ही नहीं?
अपने नैतिक मूल्यों से जाना- पहचाना जाने वाला भारत देश कहाँ जा रहा है?
शर्म आती है जब ऐसा कुछ देखते हैं तो।
असम में मरने वाले हिन्दू और सैनिक क्या इस देश का हिस्सा नहीं हैं?

Sunil Kumar said...

दुखद , मीडिया की आपने मज़बूरी हैं विचारणीय पोस्ट

Bharat Swabhiman Dal said...

वो दिन कब आयेगा जब आतंकवादियों की समर्थक संसद पर सीरियल बम ब्लास्ट होगे और ये पापी गांधीवादी सेक्यूलर भेडिये मारे जायेगे !

HARSHVARDHAN said...

दुखद !!!!
मेरी नयी पोस्ट -"क्या आप इंटरनेट पर ऐसे मशहूर होना चाहते है?" को अवश्य देखे ।धन्यवाद ।
मेरे ब्लॉग का पता है - harshprachar.blogspot.com

ANULATA RAJ NAIR said...

अरे मीडिया को मसाला चाहिए.....
अनु

virendra sharma said...

आतंकवाद और नक्सली हमले इस देश और टुकड़ खोर मीडिया में अब खबर नहीं बनते खबर बनता है दुर्मुख का चेहरा जिसे कोंग्रेस का चाणक्य समझा जा रहा है ,कोंग्रेस का भविष्य इसकी जेब में है लेकिन इसकी दुर्मुख की जेब ही फटी हुई है .
शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
शब्दार्थ ,व्याप्ति और विस्तार :काइरोप्रेक्टिक

R.S.Shekhawat said...

सरकार द्वारी डाली विज्ञापन रूपी हड्डी चूसने में व्यस्त है मीडिया घराने|

Satish Chandra Satyarthi said...

मीडिया ये सब कब से और क्यों दिखाने लगा..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Bharat Bhushan said...

मीडिया चलाने वालों की नार्थ-ईस्ट या वहाँ की घटनाओं में रुचि नहीं है. इल्ज़ाम तो यहाँ तक है कि ये लोग विश्वास ही नहीं करना चाहते कि नार्थ-ईस्ट भारत का हिस्सा है.