एक लड़की थी। नाम था 'चंचल'। सीधी -साधी लड़की थी , किसी का दिल नहीं दुखाती थी। जहाँ तक बन पड़ता था गैरों के दुःख सुख में शामिल होती थी। बच्चे , बूढ़े , स्त्री-पुरुष सभी की अपनी थी वो । कभी बुरा नहीं मानती थी किसी बात का। कोई बात हो भी जाए तो समझने प्रयास करती थी , लेकिन अपने मन में द्वेष नहीं रखती थी , कोशिश करती थी अपनापन बना रहे। धीरज और साहस ही उसकी ताकत थी ।
उसका एक मित्र था मिहिर । मिहिर बुद्धिमान था, विद्वान् था और अन्य भी बहुत से गुणों की खान था। लेकिन अकसर अपने व्यवहार से चंचल को दुःख देता रहता था। चंचल उन बातों का बुरा ना मानकर अपने कामों में व्यस्त रहती थी। वो उसके अवगुणों पर ध्यान देने के बजाये उसके गुणों को ज्यादा सम्मान देती थी। लेकिन मिहिर इस बात से बहुत परेशान रहता था की चंचल को गुस्सा क्यूँ नहीं आता ? इतना शांत कैसे रख पाती है स्वयं को ?
चंचल जितना ही शांत रहती थी , मिहिर उससे नाराज़ करने के प्रपंच रचता रहता था। बार-बार उसके दिल को चोट पहुंचाता था। सफल भी रहता था, लेकिन चंचल हर बार उसे माफ़ कर देती थी। चंचल का माफ़ कर देना ही मिहिर को अपनी पराजय लगता था। वो चाहता था की चंचल उससे झगडा करे। क्यूंकि वो जानता था की जिस दिन वो उससे नाराज़ होकर झगडा करेगी उसी दिन उसकी विजय होगी।
चंचल बखूबी समझती थी उसके अहम् को । उसका चुप रहना भी मिहिर के अहंकार को पोषित करता था। मिहिर का तिलमिलाया अहम् चंचल को हर हाल में पराजित देखना चाहता था । वो उसके शांत स्वभाव को तोड़ देना चाहता था। ऐसी बातें करता था जिससे उत्तेजित होकर वो अपना धैर्य खो दे और गुस्से में कुछ अनुचित कहे अथवा करे। लेकिन वो हमेशा असफल रहता था।
एक दिन मिहिर ने चंचल का इतना अपमान किया की वो रो दी। चंचल को रोते देखकर मिहिर को अपने विजयी होने का एहसास हुआ। फिर एक बार चंचल ने उसे माफ़ कर दिया।
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मेरा आपसे दो प्रश्न है --
१- क्या चंचल को अपमान से तिलमिलाकर मिहिर से नाराज़ हो जाना चाहिए था अथवा रोने के बाद पुनः अपने शांत स्वभाव के कारण मिहिर को माफ़ करके उसने उचित किया ?

२- मिहिर जैसे लोग , जो एक अति शांत से व्यक्तित्व को भी दुखी कर देते हैं , जो की किसी भी प्रकार से उसका नुकसान नहीं कर रहे , दुःख नहीं दे रहे , मित्र-धर्म भी निभा रहे हैं , क्यूँ ऐसा करते हैं ? इसके पीछे मिहिर की मानसिकता क्या है ? क्या मिहिर कमज़ोर है जो किसी को रोता देखकर विजयी महसूस करता है? किसी को तोड़ देना ही क्यूँ ध्येय होता है किसी का ?
लोग किसी के शांत स्वाभाव से भी द्वेष क्यूँ रखते हैं। मधुर संबंधों को मधुरता के साथ क्यूँ नहीं जीते ?
Zeal
उसका एक मित्र था मिहिर । मिहिर बुद्धिमान था, विद्वान् था और अन्य भी बहुत से गुणों की खान था। लेकिन अकसर अपने व्यवहार से चंचल को दुःख देता रहता था। चंचल उन बातों का बुरा ना मानकर अपने कामों में व्यस्त रहती थी। वो उसके अवगुणों पर ध्यान देने के बजाये उसके गुणों को ज्यादा सम्मान देती थी। लेकिन मिहिर इस बात से बहुत परेशान रहता था की चंचल को गुस्सा क्यूँ नहीं आता ? इतना शांत कैसे रख पाती है स्वयं को ?
चंचल जितना ही शांत रहती थी , मिहिर उससे नाराज़ करने के प्रपंच रचता रहता था। बार-बार उसके दिल को चोट पहुंचाता था। सफल भी रहता था, लेकिन चंचल हर बार उसे माफ़ कर देती थी। चंचल का माफ़ कर देना ही मिहिर को अपनी पराजय लगता था। वो चाहता था की चंचल उससे झगडा करे। क्यूंकि वो जानता था की जिस दिन वो उससे नाराज़ होकर झगडा करेगी उसी दिन उसकी विजय होगी।
चंचल बखूबी समझती थी उसके अहम् को । उसका चुप रहना भी मिहिर के अहंकार को पोषित करता था। मिहिर का तिलमिलाया अहम् चंचल को हर हाल में पराजित देखना चाहता था । वो उसके शांत स्वभाव को तोड़ देना चाहता था। ऐसी बातें करता था जिससे उत्तेजित होकर वो अपना धैर्य खो दे और गुस्से में कुछ अनुचित कहे अथवा करे। लेकिन वो हमेशा असफल रहता था।
एक दिन मिहिर ने चंचल का इतना अपमान किया की वो रो दी। चंचल को रोते देखकर मिहिर को अपने विजयी होने का एहसास हुआ। फिर एक बार चंचल ने उसे माफ़ कर दिया।
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मेरा आपसे दो प्रश्न है --
१- क्या चंचल को अपमान से तिलमिलाकर मिहिर से नाराज़ हो जाना चाहिए था अथवा रोने के बाद पुनः अपने शांत स्वभाव के कारण मिहिर को माफ़ करके उसने उचित किया ?

२- मिहिर जैसे लोग , जो एक अति शांत से व्यक्तित्व को भी दुखी कर देते हैं , जो की किसी भी प्रकार से उसका नुकसान नहीं कर रहे , दुःख नहीं दे रहे , मित्र-धर्म भी निभा रहे हैं , क्यूँ ऐसा करते हैं ? इसके पीछे मिहिर की मानसिकता क्या है ? क्या मिहिर कमज़ोर है जो किसी को रोता देखकर विजयी महसूस करता है? किसी को तोड़ देना ही क्यूँ ध्येय होता है किसी का ?
लोग किसी के शांत स्वाभाव से भी द्वेष क्यूँ रखते हैं। मधुर संबंधों को मधुरता के साथ क्यूँ नहीं जीते ?
Zeal