कुछ ब्लॉगर मित्रों को शिकायत है की मेरी पोस्ट जल्दी-जल्दी आती है और वो थक जाते हैं पढ़ते पढ़ते । मुझे इस बात का खेद है । लेकिन क्या करूँ , मस्तिष्क में आने वाले विचारों के साथ अन्याय तो नहीं कर सकती न ? ये भारतीय अदालत नहीं है जहाँ वर्षों केसेज़ पेंडिंग रखे जाते हैं ।
जाने क्यूँ मुझे लगता है की मेरे पास वक़्त बहुत कम है। इससे पहले की देर हो जाए , लिख डालना है , कह डालना है सब कुछ । मैं अपनी गति से लिखूंगी , आप अपनी गति से पढियेगा।
यदि आप नहीं पढ़ पायेंगे , तो भी कोई गिला नहीं , और यदि आप कुछ बिना कहे चले जायेंगे , तो भी बुरा नहीं मानूंगी । आप लोग मुझे इतना बर्दाश्त करते हैं , इसके लिए वैसे ही आप सभी की बहुत आभारी हूँ ।
कैसे समझाऊं की वक़्त बहुत कम है ...लिख लेने दीजिये मुझे।
पुनः याद दिला दूँ , यह कोई लेख नहीं है , बस यूँ ही आप सभी से मुखातिब हूँ । कल सुबह Morning walk से लौटकर Morning chores के बाद एक नए विमर्श के साथ उपस्थित रहूंगी , जहाँ आप सभी की उपस्थिति अति अनिवार्य होगी। अभी से निमंत्रण दे रही हूँ ।
कल प्रातः सभी पत्रों का जवाब लिखूंगी और अपने पसंदीदा ब्लॉग भ्रमण पर निकलूंगी।
तब तक के लिए -- शुभ रात्रि ।