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Thursday, August 16, 2018

दलित

आज़ादी के 71 साल हो गए लेकिन देश की माटी से पैदा होने वाला हर नेता, दलित-दलित ही खेलता है आज भी।

कायर है वो

कायर है वो!
न सीने में आग है,
न रक्त में उबाल है।
अन्याय सहता है
चुप रहता है
आवाज़ नहीं उठाता
वक़्त से पहले बूढ़ा हो गया।
जो लड़ते हैं ज़माने से,
रखते हैं सरोकार समाज से
फिक्र करते हैं आने वाली पीढ़ियों की
उन पर ग्रहण बनकर बैठ जाते हैं,
कायर हैं ये
नपुंसक हैं ये
नासूर हैं इस धरती का,
बोझ हैं ये इस समाज पर,
कायर हैं ये,
बेमतलब हैं ये।

Monday, March 4, 2013

अपना-अपना झरोखा ..

अजीत जी का एक आलेख पढ़ा , बहुत बढ़िया लिखा है, बस एक ही बात खटकी --"चिड़ियाघर"...मन तैयार नहीं ये मानने को की ब्लौगजगत एक चिड़ियाघर है और ब्लॉगर्स उस चिड़ियाघर का हिस्सा।

वाणी जी का तर्क बहुत अच्छा लगा- "अपने दिल की बात सच्ची-सच्ची लिखने का दम होना चाहिए बस "

एक दशक पूर्व तक हिंदी ब्लौगिंग का कोई नामो-निशान नहीं था ! लोग अपने मन की बात न कह पाते थे , ना ही लिख पाते थे!  लेकिन अब ये लाचारी नहीं है हमारे सामने। हिंदी ब्लौगिंग ने एक नया आयाम दिया है! आम जनता अपने मन की बात और अपने विचारों को सबके समक्ष रख सकती है।

हर व्यक्ति अपनी रूचि और ज़रुरत के अनुसार विभिन्न विषयों पर अपनी लेखनी चला रहा है, और इसी से लेखन में विविधता का भी कोई अभाव नहीं महसूस होता और पूरा ब्लॉगजगत इन्द्रधनुषी रंगों से सजा हुआ दिखता है।

किसी भी ब्लौग पर क्लिक करो, लोग अपनी-अपनी मासूम सी भाषा में अपने ह्रदय के भावों को निचोड़ कर रखे होते हैं। सभी को पढने में अलग ही आनंद आता है।

राजनीति पर पढना और लिखना सबसे ज्यादा अच्छा लगता है---

जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रसधार नहीं,
वो ह्रदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

Zeal

Tuesday, February 19, 2013

मैं और मेरी फेसबुक ..

मैं और मेरी फेसबुक , अकसर ये बातें करते हैं
तुम हो तो क्या बात है, तुम न होतीं तो कैसा होता ?

हज़ारों के दिल में रंज है और लाखों की रात स्याह है
तुम हो तो सब कह-सुन लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

भारत की नींव और लोकतंत्र का चारों  स्तम्भ ,
तुम हो तो थमा हुआ है, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

बढ़ते आतंकवाद और गुनाहों के इस शहर में,
तुम हो तो आईना दिखा भी लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

जनता का खौफ सरकार के दिल से जा रहा है,
तुम हो तो थोडा डरती भी है, तुम न होतीं तो क्या होता ?

कितनों के दिल का हाल हो तुम, कितनों के मन का मलाल हो तुम,
तुम हो सबने बरस लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

देशप्रेमियों के दिल में जो दर्द है, जो आवेश है, जो आग है ,
तुम हो तो थोड़ा गरज लिया , तुम ना होतीं तो कैसा होता?

 मैं और मेरी फेसबुक , अकसर ये बातें करते हैं
तुम हो तो क्या बात है, तुम न होतीं तो कैसा होता ?


 Zeal

Monday, December 10, 2012

जस्टिस काटजू का वर्गीकरण - देखिये तो आप किस श्रेणी में हैं

जस्टिस काटजू का कहना है की भारत की जनता में 90% ईडियट हैं , लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया की वे कौन से लोग हैं ! अतः पाठकों की सुविधा के लिए कुछ श्रेणियों का उल्लेख कर रही हूँ , देखिये तो आप किस श्रेणी में उपयुक्त बैठते हैं! 90 में अथवा 10 प्रतिशत वाली श्रेणी में !

  • वे, जो मात्र 200 रूपए में धर्म के नाम पर दंगा करते हैं।
  • वे, जो कभी वोट देने ही नहीं जाते बस नेताओं को भला-बुरा कहते रहते हैं!
  • वे, जो महंगे-महंगे कुत्ते पालते हैं , लेकिन ठण्ड से कांपते और भूख से मरते इंसानों को देख आगे बढ़ जाते हैं।
  • वे, जो 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' पर अंकुश लगाते हैं।
  • वे, जो खुद को सबसे चतुर समझते हैं लेकिन अन्य राजनैतिक दलों का भंडाफोड़ करना ही अपना सबसे बड़ा नैतिक दायित्व समझते हैं।
  • वे, जो लड़के की चाहत में कन्या भ्रूण हत्या करते हैं।
  • वे, जो धर्म के नाम ऊँट और गाय हलाल करके जन्नत पाते हैं।
  • वे, जो स्वाभिमान की बलि चढ़ाकर राजनैतिक पार्टियों का वोट-बैंक बनते हैं। 
  • वे, जो रहते तो भारत में हैं, लेकिन वन्दे मातरम् कहने से बहुत परहेज़ करते हैं।
  • वे, जो किटी-पार्टीज़ में व्यस्त रहती हैं और लोकतंत्र का आ-बा-सा भी नहीं जानती, बस शाबासी चाहती हैं!
  • वे, जो केवल कल्पनाओं की दुनिया में रहते हैं , वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं रहता। 
  • बहुसंख्यक अपना अधिकार मारे जाने पर भी सेक्युलर बने रहते हैं!

कोई कैटेगरी छूट गयी हो तो कृपया बतावें ! और जाते जाते अपनी श्रेणी भी बताते जावें तो महती किरपा होवेगी


जय हिन्द !
वन्दे मातरम् !

Monday, December 3, 2012

डॉ राजेन्द्र प्रसाद पर गर्व करता है सारा हिन्दुस्तान

 डॉ राजेन्द्र प्रसाद -
-भारत के प्रथम राष्ट्रपति का जन्म , बिहार के जिला सीवान में ३ दिसंबर  १८८४ को हुआ था। इनके पिता नाम महादेव सहाय तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी था।
-ये भारत के एक मात्र ऐसे प्रेसिडेंट थे जो अपनी तनख्वाह का चौथाई हिस्सा , संस्कृत के विद्यार्थियों को दे देते थे।
-विद्या के धनी डॉ राजेन्द्र प्रसाद गोल्ड मेडलिस्ट थे । परीक्षा में कहा जाता था-' अटेम्प्ट ऐनी फाइव '....राजेंद्र प्रसाद सभी प्रश्न हल करके लिख देते थे - " चेक ऐनी फाइव '
- भारत का पहला संविधान १९४८-१९५० , डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बनाया था।
-इन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत-रत्न ' से पुरस्कृत किया गया।

आजादी के बाद , गांधी जी ने राजेन्द्र प्रसाद को प्रधान मंत्री बनाना चाह तो इन्होने अस्वीकार कर दिया और नेहरु को बनाने के लिए कहा। फिर गांधी जी ने इन्हें राष्ट्रपति बनाना चाह तो इन्होने अस्वीकार करते हुए कहा की- " मैं कर्ज में डूबा हुआ हूँ और मैं नहीं चाहता की आजाद भारत का पहला प्रेसिडेंट कर्जदार हो। तब गाँधी जी ने जमुना लाल बजाज को बुलाकर इनको कर्ज-मुक्त कराया और तब ये राष्ट्रपति बने।

नेहरु जी द्वारा प्रस्तुत - ' हिन्दू कोड बिल ' को जब डॉ राजेंद्र प्रसाद के सामने लाया गया तो उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया, काट-छाँटके बाद दुबारा लाया गया तो पुनः आपति जाहिर की, तीसरी बार में जाकर वह बिल पास` हुआ । तब तक उसका दो-तिहाई हिस्सा हटाया जा चूका था। यदि वो बिल उस समय पूरा पास हो जाता तो भारत का नैतिक मूल्य जो आज आजादी के साठ साल बाद गिरा है, वो तभी गिर चुका होता।

उस बिल पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद को सख्त आपत्ति थी। उन्होंने लिखा है -- [" Had there been any clause of referendum in the constitution of India, the electorate would have decided the question. "]

यानि, यदि यह संवैधानिक अधिकार जनता के पास होता तो यह बिल कभी पास नहीं होता।

Thursday, November 29, 2012

फेसबुक तनाव देता है सिब्बल एंड पार्टी को..

कल समाचार पत्र में पढ़ा कि - "फेसबुक तनाव देता है"  !

ये बात सच भी है लेकिन इससे भी बड़ा सच ये है की फेसबुक तनावमुक्त भी करता है !   ये तो आप पर है की आप मुसीबत पाल रहे हैं या खुद को तनावमुक्त कर रहे हैं लेखन के माध्यम से , जागरूकता लाकर, विसंगतियों  के खिलाफ आवाज़ उठाकर , व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों  से या फिर फेसबुक पर फ़्लर्ट कर रहे हैं !

समाचार पढ़कर मेरे एक शुभचिंतक ने मुझसे कहा मुझे फेसबुक से दूर रहना चाहिए ताकि तनाव न हो ! मैंने कहा -"मुझे तो फेसबुक कोई तनाव नहीं देता , लेकिन हाँ मेरे पाठकों को मैं ज़रूर तनाव दे देती हूँ कभी-कभी अपनी फेसबुक टिप्पणियों से !"

खैर डरने की ज़रुरत नहीं है ! फेसबुक एक वंडर-ड्रग है ! बहुत से लाइलाज रोगों का इलाज भी ! depression और frustration  जैसी परिस्थितियों का बहुत सुदर विकल्प है 'फेसबुक" !

तानाशाह और कांग्रेसियों को तनाव देता है फेसबुक , जिसका भंडाफोड़ होता है फेसबुक पर !

मुस्कुराईये की आप फेसबुक पर हैं !

Smiles...

Zeal

Wednesday, November 21, 2012

दिव्या श्रीवास्तव के प्यारे-प्यारे 54 बच्चे ...

 निकट की बस्ती में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे , जो मेरे भी बच्चे हैं !

 नेहा , धीरज और छोटू

 मेरे बच्चों की टीम के सबसे बड़े बच्चे, इन्हें तो आप पहचानते ही हैं !

 54 बच्चों के माता-पिता (दिव्या और उसके पति))


आज की तारीख में मेरे पास 54 बच्चे हो गए हैं। इनके लिए मेरे जैसे मिडिल क्लास व्यक्ति को कुछ विशेष नहीं करना पड़ता।  बस उन्हें पढ़ाती  हूँ ! थोडा देशभक्ति की बातें और चरित्र निर्माण की दिशा देती हूँ। उनके लिए यथा सामर्थ्य (ज्यादा महँगा नहीं) , स्कूल का बैग, पेन्सिल, टिफिन बॉक्स , उनके लिए कपडे , कभी-कभी फल आदि लाती हूँ , (शेष उनके मजदूर माता-पिता ही करते हैं)! आजकल, चित्र में दिख रहे बच्चे  'नेहा" और धीरज तथा अन्य तीन बच्चों के साथ एक नाटक की तैय्यारी करवा रही हूँ जो संभवतः 26 जनवरी को प्रदर्शित होगा , township के सभी गणमान्य लोगों के सम्मुख! मेरे इस प्रयास में मेरे पड़ोस के बहुत से अन्य लोग भी शामिल हो रहे हैं मेरे साथ , जिससे मुझे अपने ध्येय तक पहुँचने में आसानी हो रही है !

मेरे विचार से अन्य लोग भी इस तरह से गरीब बच्चों को गोद ले सकते हैं और उनका जीवन संवार सकते हैं !

जय हिन्द !
जय भारत !

Saturday, November 17, 2012

विरोधाभासी दृष्टिकोण

विरोधाभासी दृष्टिकोण हमारे द्वारा ना अपनाए जाने का कारण यह है की हमारा इंसानी दिमाग अव्यवस्था से डरता है और स्वतः ही मौजूदा अनुक्रम को चुनौती देने वाले नए विचारों को ख़ारिज या नज़रंदाज़ कर देता है !
जब कोई नयी संभावना पेश की जाती है जो प्रचलित धारणा को चुनौती देती हो तो यह महत्वपूर्ण होता है की आप उस प्रचलित धारणा के इतिहास को समझने में सक्षम हों और यह भी समझा पाएं की इस तरह की धारणा जब पहली बार स्थापित की गयी तब हमारे समाज से कहाँ गलती हो गई।

कभी तो प्रचलित धारणा के विरुद्ध प्रश्न करो --

  • गांधी को राष्ट्र पिता क्यों कहा गया ? किसी और को क्यों नहीं ?
  • गरीबी से दम तोड़ते बच्चों के देश में बाल दिवस नेहरू के नाम पर क्यों ? बिस्मिल और आज़ाद के नाम पर क्यों नहीं ?
  •  दहेज़ कन्या पक्ष क्यों दे?. वर पक्ष क्यों नहीं ?
  •  विदा होकर लड़की ही ससुराल क्यों जाए और माता-पिता से दूर की जाए ? क्यों न घर जमाई बनाया जाए दामादों को और लड़के रहें अपने माता-पिता से दूर ? 
  •  लड़की होने पर उत्सव किया जाए , कन्या भ्रूण हत्या की मानसिकता त्यागी जाए ? 
  • कन्या की उम्र यदि  दूल्हे से ज्यादा हो ऐसा निर्धारण कर दिया जाए तो ?
  • मुस्लिम तुष्टिकरण की जगह कोई और सनक पाली जाए चुनाव जीतने के लिए तो कैसा रहेगा ?  


Zeal 

Thursday, November 15, 2012

फेसबुक क्यों पसंद है ?





फेसबुक मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि इस पर उन्माद के रोगियों को ब्लॉक करने की सुविधा है , और ब्लॉग मुझे इसलिए पसंद है क्योंकी इस पर उन्मादियों के कमेन्ट मॉडरेट करने की सुविधा है !

जय हिन्द !
वन्दे
मातरम् !

Wednesday, November 14, 2012

बहिष्कार करते हैं हम बाल-दिवस पर नेहरू के नाम का..


बाल दिवस किसके नाम पर मनाते हैं हम ? वो नेहरू जिसने कई पीढ़ियों को दासता दे डाली ! वही नेहरू खानदान जिसके राज में गरीब आत्महत्या करते हैं और बच्चे कुपोषण का शिकार होकर भूख से बिलबिलाते हुए दम तोड़ते हैं। बहिष्कार करते हैं हम बाल-दिवस पर नेहरू के नाम का ! नेहरू बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन था। वो केवल विदेशियों का भक्त था !

जहाँ इतने कुपोषित और गरीब बच्चे हों , वहां  नेहरू को चाचा नाम से याद करना सबसे बड़ी मूर्खता है ! हमारे बच्चे गलत इतिहास जो पढ़ते हैं , इसीलिए नए गुलाम तैयार हो जाते हैं ! अरे बाल-दिवस मनाना  ही है तो डॉ राजेन्द्र प्रसाद, पटेल या फिर आज़ाद और बिस्मिल के नाम पर मानना चाहिए ! विदेशियों के हाथ बिके नेहरू खानदान के नाम पर नहीं !

जय हिन्द !
वन्दे मातरम् !

Monday, November 12, 2012

हर रात दिवाली भारत में..


हर दिन होगी होली और हर रात दिवाली भारत में
हर घर में घंटे गूंजेंगे , हर मंदिर रौशन भारत में !
स्वस्तिक से चिन्हित होकर, ॐ ॐ अब गूंजेगा
घंटो की टंकारों से , हर मंदिर गूंजे भारत में !
बजे नगाड़े सड़कों पर और शंखनाद अब घर-घर में
हर दिन होगी होली
और हर रात दिवाली भारत में !

जय माँ लक्ष्मी , श्री गणेशाय नमः
वन्दे मातरम् !

सभी मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
दिव्या 
Zeal  

शादी का घोडा..

धन्य हैं यशवंत सिन्हा जिन्होंने बहुत सटीक जड़ दिया -- " राहुल शादी का घोडा हैं जो अक्सर बिदक कर खड़ा हो जाता है , चलता ही नहीं "

चलो अच्छा हुआ भाजपा ने भी मुंह खोलना सीख लिया वरना ये भी मनमोहन की चुप्पी ही फौलो कर रहे थे। 'टिट फॉर टैट ' का ज़माना है अब लोग मोदी को हत्यारा और बन्दर कहेंगे तो क्या राहुल को घोडा भी न कहा जाएगा ?

Tit for tat,
Don't touch my hat,
You will kill my dog,
I will kill your cat.

दूसरा गाल सामने नहीं करेंगे बल्कि एक हाथ से देगा तो दोनों हाथ से खायेगा! संभल के जबान खोलना कांग्रेसियों !

वन्दे मातरम् !

Sunday, November 11, 2012

आप सभी के लिए ..


समुद्र मंथन से , हाथ में अमृत कलश लिए निकले , आयुर्वेद काय-चिकित्सा के प्रणेता , भगवान् धन्वन्तरी की जयंती को ही धनतेरस के रूप में मनाया जता है ! ब्लॉग पर  सभी लेखक एवं लेखिकाओं को इस शुभ अवसर पर अनेक मंगलकामनाएं ! आप सभी के लिए धनतेरस अति शुभ हो !

Thursday, October 11, 2012

एक इकलौते वोट से बना गया प्रधानमन्त्री

बढती महत्वाकांक्षाओं ने हर किसी को प्रधानमन्त्री बनने के सपने दिखा दिए हैं ! हर कोई खुद को पोटेंशियल कैंडिडेट समझता है इस पद के लिए !  अब लद गए वो दिन जब जद्दोजहद होती थी अपनी पार्टी को जिताने की ! उम्र बीत जाती थी लेकिन अपनों के लिए कुछ करने का जज्बा समाप्त नहीं होता था !  लेकिन अब तो हर कोई खुद को ही हीरो समझता है और दूसरों को आईना दिखने में ही सबसे बड़ी काबिलियत समझता है !

आज कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली में एक  स्कूल है और एक टूटपुंजिया सी राजनीतिक पार्टी खड़ी दिखाई देगी, लेकिन अफ़सोस तो ये है की अशिक्षित लाखों है और लोकतंत्र नदारद है ! 

एक ही पार्टी का प्रत्येक सदस्य खुद को प्रधानमन्त्री पद का दावेदार समझता है।  एक दुसरे का वोट काटकर खुद को चतुर समझता है।  वो दिन दूर नहीं जब ये सारे के सारे मौकापरस्त केवल अपने एक इकलौते वोट से ही जीतकर खुद को प्रधानमन्त्री बना हुआ समझेंगे ! 

मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं सभी ! 

  • नितीश को लगता है वो सबसे काबिल है  
  • राज ठाकरे तो खुद को खुदा सामझता है 
  • बाल ठाकरे को सुषमा सुहाती है 
  • अर्थशास्त्री तो अनर्थशास्त्री बनकर भी जमा हुआ है सत्ता में  
  • माँ का लाडला अमूल बेबी तो प्रधानमन्त्री  की कुर्सी को बपौती समझता है 
  • राउडी  राबर्ट के तो कहने ही क्या है , पूछता है अपनी सास से - " अमूल बेबी में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं है ? अगर वो बलात्कारी है तो मैं भी तो भ्रष्टाचारी हूँ, फिर मैं क्यों नहीं बन सकता प्रधानमन्त्री ? 
  • फिर प्रियंका गुस्से से तमतमाई, बोली- " नेहरू खानदान रीत है न्यारी, पत्नियाँ  होती हैं पतियों पर भारी , अतः प्रधानमंत्री तो सिर्फ मैं ही बनूंगी"
  • कजरारी अखियों वाले केजरीवाल का तो कहना ही क्या -अन्ना को गन्ने की तरह चूसकर किया किनारे , अब खुद को प्रधानमंत्री समझ रहा है और मुसलमानों को फंसाने के लिए उन्हें 11% आरक्षण का लालच दे रहा है ! क्योकि मुसल्मानों को खरीदना सबसे आसान जो है !
  • माया , मुलायम राबड़ी टाइप दलित तो दलितों के नाम पर आरक्षण लेकर गुडागर्दी करते हैं ! रहेंगे सब FIVE STAR  जैसे सुसज्जित बंगलों में और लूटेंगे देश को दलित बनकर ! 

 अब जिम्मेदारी उस समझदार वर्ग की है कि किसके इकलौते वोट से अपना वोट जोड़कर एक और एक दो कर दे। 

Zeal 

Thursday, October 4, 2012

हाय काजल लगी मदहोश तुम्हारी आखें..

बला का हुस्न गज़ब का शबाब नींद  में है
है जिस्म जैसे गुलिस्ताँ गुलाब नींद में है

उसे ज़रा सा भी पढ़ लो तो शायरी आ जाए
अभी ग़ज़ल की मुकम्मल किताब नींद में है

मचल रही है मेरे दिल में दीद की हसरत
वो डाले चेहरे पे नीला नकाब नींद में है

वो इन्कलाब उठाता है ले के अंगडाई
सवाल जागा हुआ है जवाब नींद में है

Wednesday, September 19, 2012

हार्दिक शुभकामनाएं

गणेश चतुर्थी के इस पुनीत पावन अवसर पर अपने सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं ! गणपति आपके परिवार में खुशहाली लायें !  ॐ श्री गणपतये नमः !

Zeal

Wednesday, September 5, 2012

नहीं पढूंगी तुम्हारी पोस्टों को ..

उसकी पोस्ट पर एक लाईक
उनकी पर दो
उनकी पर तीन
उनकी पर पांच
और तुम्हारे पर एक भी नहीं ??

क्या समझूं मैं ? तुम बकवास लिखते हो ! एक भी लाईक नहीं है तुम्हारे आलेखों पर ! नहीं पढूंगी तुम्हारी पोस्टों को ! समय क्यों नष्ट करूँ ?

कभी तो सामाजिक लिखो,
देश की अव्यवस्था पर लिखो
घोटालों पर लिखो
प्रेम-श्रेम पर लिखो
आलोचना-विवाद कुछ तो लिखो
नारी न सही पुरुष सशक्तिकरण पर ही लिखो ......

क्या कहा , लिखते हो इन सभी विषयों पर ? .....फिर भी...??

पहले जाओ आकाओं से दोस्ती बढ़ाओं ! पांच नहीं तो कम से कम एक लाईक तो लाकर दिखाओ ! हर एक पर ना सही , किसी एक पर तो पाकर दिखाओ !  ऐरों गैरों को कुछ नहीं मिलता, सब कुछ रसूख वालों को ही मिलता है !

जाओ मेहनत करो.... मन लगाकर लिखो ...माँ-बाप का नाम रौशन करो...

तब समझूँगी तुम्हें भी लिखना आता है , अन्यथा तुम भी मेरी तरह ही बेसुरे समझे जाओगे !

सादर वन्दे एग्रीगेटर्स !

Zeal

Wednesday, August 29, 2012

१६६ क़त्ल करने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब को फांसी

देर आया लेकिन दुरुस्त आया ! आखिर कसाब को फांसी की सजा सुना ही दी गयी ! सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी ! अभी हमारे देश में न्याय ज़िंदा है ! अभी भी उच्च पदस्थ लोगों के पास नैतिकता , ईमानदारी और संवेदनशीलता है ! बस भय तो एक ही बात का , की कहीं कांग्रेस अपने इस शाही दामाद को बचाने के लिए कोई घटिया चाल न चल दे ! क्योंकि कांग्रेस की फितरत है हर ईमानदार को मरवा देना , या उसी के खिलाफ मुकदमा कर देना, या फिर उन्हें सेवा निवृत कर देना ! इससे पहले की कांग्रेस कोई शातिर चाल चले कसाब को सरे आम फांसी की सजा दे देनी चाहिए ! हमें ढेरों अफज़ल गुरु नहीं चाहिए ! आतंकवादियों को प्रश्रय देने का अड्डा नहीं बनने देंगे हिन्दुस्तान को !

Zeal

Friday, August 24, 2012

इस मनचले ब्लॉगर का आभार


कल एक मनचले ब्लॉगर की पोस्ट पर एक टिप्पणी पढ़ी। अब ये न पूछियेगा किसकी टिप्पणी थी। अरे उसी मनचले ब्लॉगर की टिप्पणी थी जिसके ब्लॉग पर लिखी थी। बस उसका शौक है की अपने ही ब्लॉग पर 'बेनामी' बनकर खुद ही टिप्पणी करता है....Smiles...

खैर टिप्पणी में लिखा क्या था ?

लिखा था-- " दिव्या ने अपने ब्लॉग पर ३० साल पुरानी तस्वीर लगा रखी है , पता नहीं किसको आकर्षित करने के लिए"

पढ़कर मन में यही ख़याल आया की ये इतना बुज़ुर्ग हो गया है, लेकिन महिलाओं की तस्वीरों में ही उलझा हुआ है अभी तक। ब्लॉगर तो बुद्धिजीवी वर्ग में आते हैं, लेकिन ये तो किसी के विचार नहीं पढता, बल्कि तसवीरें ही देखता है।

लेकिन फिर सोचा , बात तो सही कह रहा है बेचारा। इतनी पुरानी तस्वीर लगाने क्या फायदा। चलो कोई बुढापे वाली शानदार तस्वीर लगाई जाए। कुछ तो डरेगा ये मुझसे। बस फिर क्या था , ढूंढना शुरू किया एक अदद तस्वीर को , जिसने पैसठ (६५) बसंत देख लिए हों।

वो कहते हैं ना-- जहाँ चाह , वहां राह......मिल गयी ना आखिर एक अदद तस्वीर श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव की।

नोट- दोनों तस्वीरों में परिधान एक ही है (वही तीस साल पुराना), सर्फ़ एक्सेल का कमाल है !!


Hey ! Thanks Mr मनचले !

Zeal