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Friday, December 24, 2010

बेशर्मी की भी हदें होनी चाहिए.

१२ साल हो गए उन दोनों के विवाह कोतीन प्यारे -प्यारे बच्चे हैंअब पंचायत ने निर्णय दिया की एक गोत्र का होने के कारण दोनों को भाई बहन की तरह होना होगासमाज और बिरादरी से बाहर कर दिया गया पूरे परिवार को

ये पंचायत वाले दिमाग से पैदल होते हैं क्या ?

पता चला है , लड़के के भाई ने जायजाद में हिस्सा भाई को ना देना पड़े , इसलिए उसे जात बाहर करवा दियाअरे मत देते हिस्सा , लेकिन उनकी जिंदगी नरक क्यूँ कर दी?

माँ , बाप , भाई और घरवालों ने मिलकर साजिश कीजब अपने ही दरिन्दे निकल जाएँ तो गैरों से क्या उम्मीद ये लोग पंचायतों पर क्यूँ निर्भर करते हैं कोर्ट की शरण में क्यूँ नहीं जाते ?

क्या हल है इस समस्या का ?