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Wednesday, July 13, 2011

धर्म क्या है ? -- 'सनातन धर्म'

हिन्दू , इस्लाम और ईसाई नामक धर्म नहीं हैं. धर्म केवल सनातन है ! सनातन शब्द का अर्थ है - "जिसका न आदि है न अंत "

अंग्रेजी का religion शब्द सनातन धर्म से थोडा भिन्न है !
Religion से श्रद्धा का भाव सूचित होता है और श्रद्धा बदल सकती है ! यही वजह है , विश्वास बदलने के साथ लोग अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं! लेकिन सनातन धर्म उस धर्म का सूचक है जिसे बदला नहीं जा सकता ! सनातन धर्म किसी साम्प्रदायिक धर्म पद्धति का सूचक नहीं है! यह जीवों में उनके शाश्वत कर्म का निर्देश करता है, जैसे जल से उसकी तरलता और अग्नि से उसकी ऊष्मा विलग नहीं की जा सकती , ठीक उसी प्रकार शाश्वत जीव से उसके सनातन कर्म को अलग नहीं किया जा सकता! सनातन धर्म जीव का शाश्वत अंग है!

अज्ञानता बढ़ने के साथ अलग अलग सम्प्रदायों ने अलग अलग धर्मों का नामकरण कर दिया और आज उसी धर्म के नाम पर अलगाव वा मनमुटाव होते रहते हैं! लेकिन सनातन धर्म साम्प्रदायिक नहीं है! सनातन धर्म विश्व का ही नहीं अपितु ब्रम्हांड के समस्त जीवों का धर्म है!

सनातन धर्म जीव के साथ शाश्वत रूप से रहता है ! गीता में कहा गया है जीव न तो कभी जन्मता है , न ही कभी मरता है ! धर्म की धारणा यदि संस्कृत के मूल शब्द से समझी जाए तो धर्म वह है जो पदार्थ विशेष में शाश्वत रूप से रहता है! जीव का शाश्वत धर्म 'सेवा' है ! पृथ्वी पर उपस्थित जीव किसी न किसी रूप में , किसी की सेवा ही कर रहा है ! निम्न पशु मनुष्य की सेवा , सेवक स्वामी की, एक मित्र दुसरे मित्र की , माता अपनी संतान की , पति-पत्नी एक दुसरे की , दुकानदार ग्राहक की तथा चिकित्सक अपने रोगियों की सेवा में सतत संलग्न रहता है ! कोई भी जीव अन्य जीवों की सेवा करने से मुक्त नहीं है! अतः सेवा करना ही जीव का सनातन धर्म है !

एक डाक्टर जिसका नाम राम है , उसका धर्म चिकित्सा सेवा है! उसके पास सुरेश आये अथवा रहीम , उसका शाश्वत धर्म 'सेवा' ही रहेगा मनुष्य मात्र के लिए !

जब प्रत्येक जीव का शाश्वत धर्म 'सेवा' है तो आस्था के नाम पर साम्प्रदायिक होकर हिन्दू , इस्लाम और ईसाई जैसे वर्गीकरण की आवश्यकता क्या है ? और धर्मनिरपेक्ष होने का औचित्य क्या है?

धर्म केवल सनातन है , जिसका न आदि है न अंत है और जो शाश्वत जीव में उसके शास्वत कर्म 'सेवा' के रूप में रहता है ! सनातन धर्म शाश्वत और स्वयं में ही धर्मनिरपेक्ष है जो मानवता की सेवा भावना पर बल देता है.

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