Showing posts with label पुरुषों की व्यथा. Show all posts
Showing posts with label पुरुषों की व्यथा. Show all posts

Monday, August 1, 2011

पुरुषों की व्यथा

पुरुषों के कष्ट भी असीमित हैं ! उनके कष्टों का परिमाण इसलिए और भी बढ़ जाता है क्यूंकि वे अपने कष्ट किसी से नहीं कहते हैं , मन में ही रखते हैं और घुलते रहते हैं ! जबकि स्त्रियाँ अपने मन की बात अपनी माँ , बहन , मित्र और पति से कहकर अपने मन को हल्का कर लेती हैं !

  • पुरुषों पर आफिस के कार्यों का अत्यधिक बोझ रहता है जिसके कारण वे तनावग्रस्त रहते हैं , घर आने पर भी आफिस की परेशानियाँ पीछा नहीं छोड़तीं ! चाहकर भी पत्नी अथवा बच्चों को समुचित प्यार और समय नहीं दे पाता ! बच्चों के साथ समय बिताना चाहता है , उन्हें पढाना चाहता है , बहुत कुछ नया सिखाना चाहता है , लेकिन समयाभाव उसे ऐसा करने नहीं देता ! इससे परिवार में असंतोष पनपता रहता है और उसकी जडें गहरी होती जाती हैं !
  • सास और बहू की अनबन में तो बेचारा घुन की तरह पिसता ही रहता है !
  • पुरुष वर्ग ज्यादा लोगों के संपर्क में रहता है ! कभी-कभी अनायास ही उसमें inferiority complex पैदा हो जाता है ! कारण कुछ भी हो सकता है ! यथा - आर्थिक , सामाजिक , साथियों की तरक्की अथवा कुछ कर पाने की असमर्थता आदि ! ऐसे में एक समझदार पत्नी ही उसका मनोबल बनाए रख सकती है अथवा स्थिति अति विकट हो जाती है !
  • कई बात लगातार असफलताओं को झेलते हुए एक पुरुष का स्वभाव अति-कटु हो जाता है , जिसे एक पत्नी को समझना आवश्यक है और कोशिश करनी चाहिए की पति पर अतिरिक्त दबाव न डाले!
  • कभी अनजाने ही कोई बड़ा आर्थिक नुकसान हो जाए तो वह उसे अकेले ही वहन करने की कोशिश करता है , अपनी पत्नी से नहीं कहता क्यूंकि वह उसे परेशान नहीं देखना चाहता !
  • प्राइवेट नौकरियों में बढ़ता दबाव और आगे निकलने की होड़ में लोग अपना दूना समय और सामर्थ्य दे रहे हैं , तब कहीं नौकरी सुरक्षित रह पा रही है ! ( सरकारी नौकरी वालों को थोड़ी राहत है यहाँ ) ! ऐसी स्थिति में वे परिवार को समय नहीं दे पाते , फलस्वरूप दोहरा तनाव झेलते हैं !
  • अक्सर पत्नियों का लगातार शिकायती रवैय्या पुरुषों को निराशाजनक सोच दे देता है और वे अनायास ही परिवार क प्रति उदासीन हो जाते हैं ! स्थितियां सुधरने के बजाये बिगड़ने लगती हैं !
  • पुरुष अपने परिवार की ख़ुशी के लिए उन्हें बाहर घुमाने ले जाते हैं , खिलाते हैं , लेकिन स्वयं वे घर के बने स्नेहयुक्त भोजन की अभिलाषा रखते हैं , जो अक्सर पूरी न होने पर उनमें एक अनजाना असंतोष पैदा करता है ! कुछ स्त्रियाँ स्वयं में इतनी व्यस्त रहती हैं या फिर आलस्यवश वे इस महवपूर्ण कार्य को अनुशासन के साथ नहीं करतीं ! .देरी हो जाने पर कुछ शोर्ट-कट बनाकर काम चलाती हैं ! पति इस बात पर चुप ही रहता है लेकिन एक असंतोष रहता है !
  • कभी कभी स्त्रियाँ अपने सामान्य स्नेहपूर्ण व्यवहार की जगह , अति रूखा व्यवहार करती हैं ! वे बार-बार उसे उसकी कमतरी का एहसास दिलाती हैं और उनका मनोबल तोडती हैं ! उनकी संवेदनहीनता पुरुषों को अति निराश करती है और अपनी अपेक्षाओं के पूरा न हो पाने की स्थिति में वे तनावग्रस्त रहने लगते हैं !

पुरुषों की व्यथा भी अनंत हैं ! ऐसे में यदि पत्नी का सहयोग न मिले तो यही व्यथा अंतहीन हो जाती हैं !