पुरुषों के कष्ट भी असीमित हैं ! उनके कष्टों का परिमाण इसलिए और भी बढ़ जाता है क्यूंकि वे अपने कष्ट किसी से नहीं कहते हैं , मन में ही रखते हैं और घुलते रहते हैं ! जबकि स्त्रियाँ अपने मन की बात अपनी माँ , बहन , मित्र और पति से कहकर अपने मन को हल्का कर लेती हैं !
- पुरुषों पर आफिस के कार्यों का अत्यधिक बोझ रहता है जिसके कारण वे तनावग्रस्त रहते हैं , घर आने पर भी आफिस की परेशानियाँ पीछा नहीं छोड़तीं ! चाहकर भी पत्नी अथवा बच्चों को समुचित प्यार और समय नहीं दे पाता ! बच्चों के साथ समय बिताना चाहता है , उन्हें पढाना चाहता है , बहुत कुछ नया सिखाना चाहता है , लेकिन समयाभाव उसे ऐसा करने नहीं देता ! इससे परिवार में असंतोष पनपता रहता है और उसकी जडें गहरी होती जाती हैं !
- सास और बहू की अनबन में तो बेचारा घुन की तरह पिसता ही रहता है !
- पुरुष वर्ग ज्यादा लोगों के संपर्क में रहता है ! कभी-कभी अनायास ही उसमें inferiority complex पैदा हो जाता है ! कारण कुछ भी हो सकता है ! यथा - आर्थिक , सामाजिक , साथियों की तरक्की अथवा कुछ कर पाने की असमर्थता आदि ! ऐसे में एक समझदार पत्नी ही उसका मनोबल बनाए रख सकती है अथवा स्थिति अति विकट हो जाती है !
- कई बात लगातार असफलताओं को झेलते हुए एक पुरुष का स्वभाव अति-कटु हो जाता है , जिसे एक पत्नी को समझना आवश्यक है और कोशिश करनी चाहिए की पति पर अतिरिक्त दबाव न डाले!
- कभी अनजाने ही कोई बड़ा आर्थिक नुकसान हो जाए तो वह उसे अकेले ही वहन करने की कोशिश करता है , अपनी पत्नी से नहीं कहता क्यूंकि वह उसे परेशान नहीं देखना चाहता !
- प्राइवेट नौकरियों में बढ़ता दबाव और आगे निकलने की होड़ में लोग अपना दूना समय और सामर्थ्य दे रहे हैं , तब कहीं नौकरी सुरक्षित रह पा रही है ! ( सरकारी नौकरी वालों को थोड़ी राहत है यहाँ ) ! ऐसी स्थिति में वे परिवार को समय नहीं दे पाते , फलस्वरूप दोहरा तनाव झेलते हैं !
- अक्सर पत्नियों का लगातार शिकायती रवैय्या पुरुषों को निराशाजनक सोच दे देता है और वे अनायास ही परिवार क प्रति उदासीन हो जाते हैं ! स्थितियां सुधरने के बजाये बिगड़ने लगती हैं !
- पुरुष अपने परिवार की ख़ुशी के लिए उन्हें बाहर घुमाने ले जाते हैं , खिलाते हैं , लेकिन स्वयं वे घर के बने स्नेहयुक्त भोजन की अभिलाषा रखते हैं , जो अक्सर पूरी न होने पर उनमें एक अनजाना असंतोष पैदा करता है ! कुछ स्त्रियाँ स्वयं में इतनी व्यस्त रहती हैं या फिर आलस्यवश वे इस महवपूर्ण कार्य को अनुशासन के साथ नहीं करतीं ! .देरी हो जाने पर कुछ शोर्ट-कट बनाकर काम चलाती हैं ! पति इस बात पर चुप ही रहता है लेकिन एक असंतोष रहता है !
- कभी कभी स्त्रियाँ अपने सामान्य स्नेहपूर्ण व्यवहार की जगह , अति रूखा व्यवहार करती हैं ! वे बार-बार उसे उसकी कमतरी का एहसास दिलाती हैं और उनका मनोबल तोडती हैं ! उनकी संवेदनहीनता पुरुषों को अति निराश करती है और अपनी अपेक्षाओं के पूरा न हो पाने की स्थिति में वे तनावग्रस्त रहने लगते हैं !
पुरुषों की व्यथा भी अनंत हैं ! ऐसे में यदि पत्नी का सहयोग न मिले तो यही व्यथा अंतहीन हो जाती हैं !