विरोधाभासी दृष्टिकोण हमारे द्वारा ना अपनाए
जाने का कारण यह है की हमारा इंसानी दिमाग अव्यवस्था से डरता है और स्वतः
ही मौजूदा अनुक्रम को चुनौती देने वाले नए विचारों को ख़ारिज या नज़रंदाज़ कर
देता है !
जब कोई नयी संभावना पेश की जाती है जो प्रचलित धारणा को चुनौती देती हो तो यह महत्वपूर्ण होता है की आप उस प्रचलित धारणा के इतिहास को समझने में सक्षम हों और यह भी समझा पाएं की इस तरह की धारणा जब पहली बार स्थापित की गयी तब हमारे समाज से कहाँ गलती हो गई।
कभी तो प्रचलित धारणा के विरुद्ध प्रश्न करो --
जब कोई नयी संभावना पेश की जाती है जो प्रचलित धारणा को चुनौती देती हो तो यह महत्वपूर्ण होता है की आप उस प्रचलित धारणा के इतिहास को समझने में सक्षम हों और यह भी समझा पाएं की इस तरह की धारणा जब पहली बार स्थापित की गयी तब हमारे समाज से कहाँ गलती हो गई।
कभी तो प्रचलित धारणा के विरुद्ध प्रश्न करो --
- गांधी को राष्ट्र पिता क्यों कहा गया ? किसी और को क्यों नहीं ?
- गरीबी से दम तोड़ते बच्चों के देश में बाल दिवस नेहरू के नाम पर क्यों ? बिस्मिल और आज़ाद के नाम पर क्यों नहीं ?
- दहेज़ कन्या पक्ष क्यों दे?. वर पक्ष क्यों नहीं ?
- विदा होकर लड़की ही ससुराल क्यों जाए और माता-पिता से दूर की जाए ? क्यों न घर जमाई बनाया जाए दामादों को और लड़के रहें अपने माता-पिता से दूर ?
- लड़की होने पर उत्सव किया जाए , कन्या भ्रूण हत्या की मानसिकता त्यागी जाए ?
- कन्या की उम्र यदि दूल्हे से ज्यादा हो ऐसा निर्धारण कर दिया जाए तो ?
- मुस्लिम तुष्टिकरण की जगह कोई और सनक पाली जाए चुनाव जीतने के लिए तो कैसा रहेगा ?
Zeal