पेट्रोल में लगी आग ने उपभोक्ताओं की नीदें उड़ा दी हैं। एक और जहाँ आम आदमी इस उछाल से परेशान हुआ है , वहीँ कार कंपनियों से सर पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। डीज़ल कारें पहले ही डिमांड में थीं , अब उनकी डिमांड चौगुनी हो गयी है। पेट्रोल कारों के दाम काफी गिर गए हैं। उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए कार कंपनियों पेट्रोल कारों के दाम २५ हज़ार से लेकर ५० हज़ार तक कम कर दिए हैं। इसके विपरीत डीज़ल कारों की वेटिंग लिस्ट और भी लम्बी हो गयी है और दाम आसमान छू रहे हैं।
रूपए के अवमूल्यन से विदेशों से आने वाले पार्ट्स भी मंहगे हो गए हैं , लेकिन कंपनी मालिक अपना दुखड़ा नहीं कह सकते किसी से । अन्यथा उपभोक्ता और दूर भाग जाएगा।
रुपये का इस तरह तेज़ी से गिरना और पेट्रोल के धधकने से आग लगी है देश में लेकिन हमारा नीरो ( डॉ मन मोहन सिंह) बांसुरी बजा रहे हैं चैन से।
और प्रणब दा ? ....वो तो भावी राष्ट्रपति होने जा रहे हैं। फिर आग लगे बस्ती में, मस्तराम मस्ती में...इन्हें क्या ?
Zeal