Showing posts with label Dreams. Show all posts
Showing posts with label Dreams. Show all posts

Thursday, April 23, 2015

सपने मरते नहीं हैं कभी...

सपने अधूरे भले ही रह जाएँ,
लेकिन मरते नहीं हैं कभी !
मुझसे तो मेरे मरने के बाद भी 
मुझे हिला कर पूछ लेना,
यही आवाज़ आएगी ...
"हाँ, फिर से शहर बदला है 
और फिर से उम्मीद जागी है "

Wednesday, January 12, 2011

क्या सपने भी सच होते हैं ? -- Believe it or not !

मेहनतकश दिन गुज़ारने के बाद जब सोती हूँ तो इनती गहरी नींद आती है की सपने ही नहीं आतेआज तक बहुत कम सपने दिखेलेकिन आश्चर्य की बात तो ये है की आज तक जो भी सपने देखे उन्हें दो-तीन महीने के अंतराल पर बार-बार देखती थी और ये क्रम कई वर्षों तक जारी रहता हैकभी समझ नहीं आता था की ऐसा क्यूँ हैलेकिन मेरे द्वारा देखे गए अधिकतर स्वप्न कुछ वर्षों के बाद सत्य में तब्दील हो गए और मुझे उन स्वप्नों की हकीकत पता चल गयी

जब वो स्वप्न , यथार्थ में पूरा हो जाता था , तो उसके बाद वो स्वप्न स्वतः ही दिखना बंद हो जाता थालेकिन एक दो स्वप्न अभी भी दिखने जारी हैं , जिसका सच जानने की बेहद उत्सुकता है

अपने देखे कुछ स्वप्न और उनका सच यहाँ लिख रही हूँ -

पहला स्वप्न - जब कक्षा एक में पढ़ती थी तबसे एक स्वप्न दिखता था की मैं एक ऐसे कक्ष में हूँ जहाँ बहुत से मृत व्यक्तियों के शव हैं और उन्हीं शवों के बीच मैं भी हूँ और बहुत से जीवित लोग घूम रहे हैं११ वर्षों तक ये स्वप्न मुझे परेशान करता रहाफिर १८ वर्ष की उम्र में जब मेडिकल में सेलेक्शन हुआ , तो सीनियर स्टुडेंट के साथ हम सभी एक कक्ष में गए जहाँ Cadaver [ प्रेसेर्व किये हुए शव ] , रखे थेस्वप्न में देखे हुए कक्ष , मृत शव तथा उनके बीच घूमते हुए जीवित लोगों का सच इस प्रकार जाहिर हुआ

दूसरा स्वप्न - १५ अगस्त १९९५ को मैं अपनी बुआ के घर जमशेदपुर में थीमेरी दादी , मेरे घर पर लखनऊ में थींप्रातःकाल पांच बजकर चालीस मिनट पर , स्वप्न में मैंने अपने माथे पर बरफ के सामान ठन्डे हाथों का स्पर्श महसूस कियाहडबडाकर उठ गयीआधे घंटे में फ़ोन आया लखनऊ में दादी जी का निधन हो गया है

तीसरा स्वप्न - १६ जनवरी २००९ , सुबह :४० पर ससुर जी को स्वप्न में मृत देखासात बजे घर से फोन आया की ससुर जी की मृत्यु हो चुकी है

चौथा स्वप्न - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का दुबारा चुनाव जीतने पर दूरदर्शन पर साक्षात्कार रहा था [जनवरी २००९]। मैंने वो साक्षात्कार देखा और उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुईरात्री में स्वप्न देखा की मेरी उनसे मुलाक़ात एवं चर्चा हुई हैएक हफ्ते के अन्दर मेरी उनसे यथार्थ में मुलाक़ात एवं चर्चा हुईकारण था ससुर जी का मंत्री होनाउनके निधन पर शोक प्रकट करने के लिए मुख्यमंत्री का हमारे निवास पर आगमन हुआ

पांचवा स्वप्न मेरे एक नियमित पाठक का - ससुर जी के निधन के एक मॉस पूर्व मेरे एक पाठक ने स्वप्न देखा की वो मेरे घर आये हैं और सब लोग बहुत दुखी हैं और बहुत लोग मिलने रहे हैंउन्होंने जब यह स्वप्न हमें बताया तो कुछ समझ नहीं आया , लेकिन ससुर जी मृत्यु के बाद जब वो पाठक हमारे घर आये तो वैसा ही दृश्य था जो उन्होंने एक मॉस पूर्व स्वप्न में देखा था

छठा स्वप्न - १५ मार्च २०१० में प्रातः जो स्वप्न देखा तो घबराकर जीजाजी को भारत फोन किया, पता चला उसी दिन उनकी माता जी का निधन हो गया है

सातवाँ स्वप्न - सात माह पूर्व स्वप्न में देखा एक शव को मंदिर में रखा है , दो तीन दिन लगातार उस स्वप्न को देखा की वो शव मंदिर में है और लोग उसका दाह संस्कार नहीं कर रहे हैंसमीर जी को बताया तो पता चला उनकी
कंपनी का एक थाई ऑफिसर , प्लांट में ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया हैथाई लोग मृत शव को मंदिर में रखते हैं और कई दिनों तक प्रेसेर्व रखते हैंसंस्कार कुछ दिनों के बाद करते हैं

आठवां स्वप्न - बचपन से एक छोटी बच्ची दिखती थी स्वप्न मेंविवाह के बाद एक नन्ही बच्ची गोद में जाने के बाद वो स्वप्न भी आना बंद हो गया

नवां स्वप्न - गर्भावस्था के आठवें माह में स्वप्न देखा की बच्चा खौलते पानी से जल गया हैजब बेटा आठ माह का हुआ तो गरम चाय से भयानक रूप से जल गया

एक स्वप्न जो अब नहीं आता - बहुत बार देखा इम्तेहान का पर्चा हाथ लग गया हैलेकिन अफ़सोस ये सौभाग्य कभी प्राप्त नहीं हुआ

एक स्वप्न जो बहुत परेशान करता है - हकीकत जानने की उत्कंठा बेहद प्रबल है -- एक स्वप्न मुझे तकरीबन २० वर्षों से आता है , जिसमें एक अनजान व्यक्ति हमेशा पीछे रहकर, निस्वार्थ रूप से मेरी बेहद मदद करता हैये व्यक्ति कौन है , ये जानने की बहुत अभिलाषा हैदेखें कब इस स्वप्न का सच पता चलता है

क्या आपने भी कभी ऐसा अनुभव किया है ? यदि हाँ तो बताइए

आभार