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Sunday, January 23, 2011

महिलाओं का कोटा -- फलों का

हर घर का संचालन गृहलक्ष्मी करती हैघर के हर सदस्य की ज़रुरत का पूरा-पूरा ख़याल रखती हैखरीददारी करते समय पति और बच्चों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाता हैमहिलाओं के दिमाग में पूरा चार्ट होता है हर आइटम कासब्जी और फल खरीदते समय , क्या घर पर नहीं है , क्या लाना है , क्या परिवर्तन करना है , पति को क्या पसंद है आदि का पूरा ध्यान रखा जाता हैलेकिन फलों के कोटे में स्त्रियाँ अपने नाम कुछ नहीं करतीं

सुबह पति और बच्चों का लंच पैक करते समय एक कर्तव्यनिष्ठ पत्नी और माँ फल रखना नहीं भूलती

लेकिन अफ़सोस की बात तो यह है की ज्यादातर स्त्रियों के फलों के कोटे में उनके नाम का एक भी सेव नहीं होताआखिर क्यूँ ? क्या महिलाओं को लगता है की वो सुपर महिला है और उन्हें पौष्टिक तत्वों की जरूरत नहीं है ? या फिर स्त्रियाँ अपने को परिवार में सबसे हीन समझती हैं जो नियम से फलों का सेवन नहीं करतीं ? फलों की खरीददारी और उसका आबंटन और नियंत्रण गृहलक्ष्मी के हाथों में होते हुए भी ये स्त्रियाँ फल खाने से इतना परहेज़ क्यूँ करती हैंकभी आप भी अपनी पसंद का फल अपने लिए खरीदा कीजिये

महिलाओं को भी फलों की उतनी ही आवश्यकता है , जितना पुरुषों और बच्चों कीइश्वर के दिए हुए शरीर को मंदिर समझकर उसकी हिफाज़त कीजियेजब आप स्वस्थ्य रहेंगी तभी आप अपने परिवार का ख़याल रख सकेंगीपति और बच्चों को फल सर्व करते समय अपने स्वास्थ्य की अहमियत को भी समझिये और उनके साथ आप भी फल खाइए

घर के पुरुषों का ये नैतिक दायित्व होना चाहिए कि मुंह में पहला निवाला डालने के पहले और फल की पहली फांक खाने के पहले एक बार अपनी पत्नी और बूढी माँ से पूँछे कि क्या उन्होंने भी फल खाया या नहींआप व्यस्त हैं ये ठीक है , लेकिन इतनी भी क्या व्यस्ततता कि आपको , अपनों कि चिंता ही ना रहे

An apple a day , keeps a doctor away !

Health is wealth !