प्रत्येक व्यक्ति का पृथ्वी पर जन्म किसी न किसी ख़ास प्रयोजन से ही होता है । प्रयोजन की पूर्ती होने के बाद उस व्यक्ति के जीवन का प्रयोजन भी पूर्ण हो जाता है ।
गुलाम हिंदुस्तान की आजादी किसी एक व्यक्ति के प्रयास का फल नहीं है, अपितु अनेकों देश भक्तों , और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी आहुति दी है इसमें । आजादी १९४७ में नहीं मिली थी पूरी । आज भी भारत आंशिक रूप से गुलाम है ।
महात्मा गांधी ने २१ वर्षों तक साउथ अफ्रीका में वहां के लोगों के अधिकारों के लिए एक सकारात्मक लड़ाई लड़ी , फिर भारत की आज़ादी में उनके योगदान से सभी परिचित हैं। लेकिन १९४७ की आज़ादी के बाद गांधी जी संभवतः कमज़ोर पड़ने लगे मोहम्मद अली जिन्नाह की मज़बूत इच्छा-शक्ति के आगे । ऐसी स्थिति में कितनी मार-काट और खून की होली हुई है , उससे भी सभी परिचित हैं। भारत की इस दुर्दशा से तड़प उठा नाथूराम गोडसे का दिल ।उन्होंने अपनी आन और जीवन की परवाह न करते हुए एक परिस्थितिजन्य निर्णय लिया।
मेरे विचार से हिंदुस्तान की रक्षा में नाथूराम गोडसे की भी महती भूमिका है।
नाथूराम ने कोर्ट में जो अंतिम वक्तव्य दिया उसे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें ।
इस लेख पर कमेन्ट करने से पहले Paradise blog पर जाकर वास्तविकता अवश्य जान लें ।
जय हिंद ।
गुलाम हिंदुस्तान की आजादी किसी एक व्यक्ति के प्रयास का फल नहीं है, अपितु अनेकों देश भक्तों , और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी आहुति दी है इसमें । आजादी १९४७ में नहीं मिली थी पूरी । आज भी भारत आंशिक रूप से गुलाम है ।
महात्मा गांधी ने २१ वर्षों तक साउथ अफ्रीका में वहां के लोगों के अधिकारों के लिए एक सकारात्मक लड़ाई लड़ी , फिर भारत की आज़ादी में उनके योगदान से सभी परिचित हैं। लेकिन १९४७ की आज़ादी के बाद गांधी जी संभवतः कमज़ोर पड़ने लगे मोहम्मद अली जिन्नाह की मज़बूत इच्छा-शक्ति के आगे । ऐसी स्थिति में कितनी मार-काट और खून की होली हुई है , उससे भी सभी परिचित हैं। भारत की इस दुर्दशा से तड़प उठा नाथूराम गोडसे का दिल ।उन्होंने अपनी आन और जीवन की परवाह न करते हुए एक परिस्थितिजन्य निर्णय लिया।
मेरे विचार से हिंदुस्तान की रक्षा में नाथूराम गोडसे की भी महती भूमिका है।
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जय हिंद ।