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Tuesday, October 19, 2010

आत्मा की उत्पत्ति तथा विनाश--आत्मा की संख्या कितनी है पृथ्वी पर ? -- Our Soul !




आत्मा अजर अमर है अथवा आत्मा का विनाश होता है ?

आत्मा का अस्तित्व शरीर के साथ होता है । जब पंचतत्वात्मक , नाशवान शरीर , मृत्यु के उपरान्त , मिटटी में मिल जाता है तो आत्मा की सत्ता भी समाप्त हो जाती है। यदि आत्मा मरती नहीं तो , शरीर के नष्ट होने के बाद से नया शरीर प्राप्त होने तक आत्मा कहाँ रहती है ?

अब बात करते हैं , आत्मा की संख्याओं की । इस पृथ्वी पर कुल कितनी आत्माएं हैं। जनसंख्या लगातार बढ़ रही है । इस वृद्धि को देखकर ये नहीं समझ आता की नयी आत्माएं कहाँ से आ रही हैं । जो पहले से विद्यमान हैं वो तो नया शरीर धारण कर लेंगी , लेकिन बढती जनसँख्या के लिए नयी आत्मा कहाँ से आयेंगी ।

यदि यह मान भी लें की बहुत सी आत्माएं एक्स्ट्रा हैं , तो चिंता की कोई बात नहीं है। बढती हुई आबादी में जन्म लेने वाले प्रत्येक शिशु के लिए एक आत्मा की व्यवस्था हो सकेगी।

अब मन में एक प्रश्न है की मोक्ष क्या है ? और मोक्ष किसे मिलता है ? चूँकि शरीर तो नाशवान है, इसलिए निश्चित ही मोक्ष आत्मा को मिलता होगा। अब समस्या ये है की मोक्ष मिलने के कारण , आत्माओं की संख्या पृथ्वी पर निश्चित ही कम होती जायेगी । एक बात यह भी की , मोक्ष यदि अच्छी और पवित्र आत्माओं को ही मिलता है तो निश्चय ही पृथ्वी पर शेष आत्माएं कलुषित अथवा कम अच्छी होंगी। फिर रामराज्य कैसे आएगा। भ्रष्टाचार तथा कलियुग तो होगा ही न।

वापस आते हैं अपनी समस्या पर। मोक्ष के चलते आत्माओं की संख्या में कमी होने पर , बढती जनसँख्या के लिए नयी आत्माएं कहाँ से आयेंगी। क्या आत्मा की भी उत्पत्ति संभव है ? यदि हाँ तो बेहतर गुणवत्ता वाली , तथा मोक्ष के योग्य आत्मा की उत्पत्ति कैसे की जाये ?

क्या आत्माओं का भी कोई धर्म होता है ? क्या एक हिन्दू आत्मा मुस्लिम परिवार में जन्म ले सकती है । यही हाँ तो फिर उस मासूम बच्चे का विचार अपने परिवेश से पृथक क्यूँ नहीं हो पता।

क्या आत्माएं नास्तिक होती हैं ? यदि नहीं , तो नास्तिक व्यक्ति के अंतरात्मा की आवाज कैसी होती है । क्या नास्तिक व्यक्ति के साथ उसकी आत्मा संवाद करती है ।

मेरे विचार से आत्मा एक शक्तिपुंज है , जिसका निरंतर क्षय होता रहता है तथा यह भी नाशवान है। आपका क्या विचार है कृपया प्रकाश डालें।

यदि नास्तिकों और महिलाओं में भी आत्मा है और वो अपनी आत्मा की आवाज़ सुन सकते हैं तो कृपया अपने मस्तिष्क में आने वाली विचारों की आंधी को साझा करें।

नोट- पोस्ट की गुणवत्ता आपकी बहुमूल्य टिप्पणियों से द्विगुणित होती है, इसलिए आपके विचारों का स्वागत है।

आभार।