प्रायः ऐसा देखा गया है की कुछ लोगों में कुछ मानसिक रोग ऐसे होते हैं जो किसी भी प्रकार की चिकित्सा से नहीं ठीक हो पाते हैं। इसके लिए चिकित्सकों ने सम्मोहन का सहारा लिया। सम्मोहन के द्वारा व्यक्ति को उसके पूर्व जन्म में लेजाकर उसके साथ हुई घटनाओं का विश्लेषण करते हैं और उसके अनुसार , वर्तमान जन्म की समस्या का निदान ढूंढते हैं। इस चिकित्सा पद्धति से बहुत ही आंशिक सफलता मिली है आज तक ।
अनेकानेक जन्म लेने के साथ कभी कभी आत्मा भी बोझ तले दब जाती है । ओवर-बर्डएंड हो जाती है । जिसके कारण मनुष्य के वर्तमान जीवन में कुछ अनसुलझी सी उलझने हो जाती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक , मनोचिकित्सक तथा माध्यमों ने इसका उपयोग करना शुरू किया।
सम्मोहन से पूर्व जन्म में ले जाने को प्रति प्रसव भी कह सकते हैं। इसमें जाकर व्यक्ति , कुछ धुंधली सी , अस्पष्ट सी, बातों का विवरण देता है। जो सत्य कम होती हैं, बल्कि उसकी पूर्व की यादें, बचपन की , तथा टी वी पे दखा हुआ कुछ या सुना हुआ कुछ , जो उसके मष्तिक पटल पर अंकित है , उसे बतलाता है।
व्यक्ति के द्वारा दिए गए विवरण सत्य न होने के कारण इसका चिकित्सकीय लाभ भी नहीं मिल पता। उलटे इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद व्यक्ति को कुछ और भी परेशानियों का सामना कर पड़ सकता है।
सम्मोहन द्वारा प्राप्त निष्कर्ष यही है की व्यक्ति , अपने अवचेतन मन में बैठे हुए विचार , श्रुत एवं अनुभूत धारणाओं को ही मूर्त रूप देता है। उसके बताये हुए विवरण की जांच करने पर ये पाया गया की , ज्यादातर बातें सत्य नहीं हैं।
इसलिए यदि कोई इस प्रक्रिया से चिकित्सा की उत्सुकता रखता है , तो वो उपचार की उम्मीद कम रखे , बल्कि अनजानी मुश्किलें उसके गले पड़ सकती हैं।
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