ब्लॉग जगत में भ्रमण के दौरान दो वक्तव्य पढने में आया कि -
- होलिका दहन से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है और
- होलिका दहन से वनों की कटाई [deforestation] हो रही है ।
होलिका दहन तो सदियों से हो रहा है , जिसमें गोबर के उपलों , सूखी डंडियों , डालियों , सूखी पत्तियों को जलाया जाता है । जिसकी आंच से ग्लोबल वार्मिंग नहीं होती । और होलिका दहन में हरे वृक्ष कदापि नहीं काटे जाते , जिसके कारण deforestation की चिंता की जाए। आज तक कभी नहीं सुना की हरी लकड़ियों से भी किसी प्रकार कि आग जालाई जा सकती है।
वृक्ष की टहनी काटी जाती है , जिससे वृक्ष सूखता नहीं है , बल्कि उसकी ग्रोथ और तेज़ी से होती है। हरे वृक्ष को न ही काटा जाता है , न ही जलाया जा सकता है , इसलिए इस प्रकार का दुष्प्रचार करना और लोगों की आस्था का उपहास करना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है ।
कल को लोग कहेंगे घर के चूल्हे भी ग्लोबल वार्मिंग कर रहे हैं ,
सिगरेट का धुंआ भी फेफड़े न जलाकर , ग्लोबल वार्मिंग कर रहा है।
ईर्ष्या का धुंआ भी , प्रेम की अग्नि भी और श्वास निष्कासन के दौरान निकली कार्बन डाई ओक्साइड भी ग्लोबल वार्मिंग कर रही है।
क्यूँ न पहले जान लिया जाए की ग्लोबल वार्मिंग आखिर है क्या -
ग्लोबल वार्मिंग - पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित ग्रीन हाउस गैसेज़ , सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित कर वैश्विक ताप को निरंतर बढ़ा रही हैं , इसे ही ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं । इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं -
- प्रकृति द्वारा [Natural]
- मनुष्यों द्वारा [Anthropogenic]
- ओजोन परत में छिद्र होना [Ozone layer depletion]
- वनों की कटाई [deforestation]
सूर्य की तीव्र किरणें जो पृथ्वी पर पहुँचती हैं , उसमें से अधिकाँश भाग परावर्तित होकर पृथ्वी के वातावरण [atmosphere] से बाहर चला जाता है , लेकिन सूर्य की इन्फ्रा-रेड किरणें , पृथ्वी के आवरण के नीचे trap होती रहती हैं , जो निरंतर वैश्विक ताप को बढ़ा रही हैं।
दूसरा प्रमुख कारण हैं -मानव की बढती गतिविधियाँ । १९४९ के बाद से पूरे विश्व में होने वाली औद्योगिक क्रान्ति के कारण फैक्ट्री से निकली CO2 का प्रतिशत वातावरण में तेजी से बढ़ा है , जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी है। पिछले ६० वर्षों में CO2 का प्रतिशत ३१३ ppm से बढ़कर तकरीबन ३७५ ppm हो गया है । औद्योगिक संस्थानों में प्रयुक्त होने वाले कोयले , LPG , CNG, HSD और furnace oil आदि के जलने से वातावरण में CO2 म्निरंतर बढ़ रही है । जो खतरे की घंटी बजा रही है।
तीसरा प्रमुख कारण है चिलर, रेफ्रिजरेटर , एयर कंडिशनर आदि में प्रयुक्त chloroflourocarbon [CFCs] gases , जो वायुमंडल में उपस्थित Ozone के क्रिया करके उसे नष्ट कर रही हैं , परिणाम स्वरुप Ozone layer में छिद्र का होना तथा इस छिद्र से सूर्य की इन्फ्रा-रेड किरणों का अधिक मात्रा में पृथ्वी के आवरण के नीचे trap होना।
चौथा कारण वनों की कटाई - पेड़-पौधे जो सूर्य की रौशनी में खाना बनाने की प्रक्रिया [Photosynthesis]में CO2 का उपयोग करके वातावरण को शुद्ध oxygen देते हैं , उनका नष्ट होना । इस deforestation का मुख्य कारण है globalization , industrialization , over population , cattle ranching , extractive industries तथा Urbanization .
इस प्रकार से वातावरण में उपस्थित ग्रीन हाउस gases [पानी की वाष्प , CO2, मीथेन , nitrous oxide , क्लोरोफ्लोरो कार्बन] , सूर्य की किरणों की ऊष्मा को अवशोषित करके ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रही हैं ।
समाधान -
- जितने पेड़ काटे जाएँ , उतने ही रोपित किये जाएँ कम से कम [reforestation]
- CFCs की जगह R-134a का इस्तेमाल हो कुलिंग के लिए। इससे Ozone परत को कोई खतरा नहीं है ।
आवश्यक बातें -
- जानकारी के अभाव में अनावश्यक दुष्प्रचार न करें ।
- किसी की आस्था पर ऊँगली उठाने के पूर्व सौ बार सोचें ।
- ये कहने के बजाये कि फलां व्यक्ति हरा वृक्ष काट रहा है , अज्ञानियों को टोकें तथा स्वयं भी वृक्षारोपण करें। यदि एक अरब जनता मात्र एक वृक्ष लगाये प्रति वर्ष तो समस्या का समाधान मिल सकता है।
- खुद भी जागरूक रहे और लोगों को भी जागरूक बनाएं ।
आभार ।