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Friday, January 11, 2013

पुरुषों से दोस्ती करें अथवा ना करें ?

संत आसाराम बापू का कहना है की "पुरुषों से दोस्ती की जायेगी तो बलात्कार बढ़ेंगे "

इस तरह की बचकानी बात पहले कभी नहीं सुनी !  सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते, अतः बलात्कार की घटनाओं को देखकर सभी पुरुषों को राक्षस-स्वरुप में देखना अनुचित है ! स्त्रियों को पुरुषों से दूर रहने की हिदायत देना और स्त्री-पुरुष में भेदभाव बढाने की बातें करना पूर्णतया तर्कविहीन है !

स्त्री और पुरुष एक दुसरे के पूरक हैं ! समाज स्त्री और पुरुष दोनों से मिलकर बना है ! दोनों ही एक दुसरे के अभिन्न अंग हैं , अलग नहीं किये जा सकते! ये सृष्टि दोनों के मिले जुले योगदान से ही चल रही है ! यदि प्रकृति के विरुद्ध जाकर उन्हें पृथक करने की योजना की गयी तो सृष्टि के समस्त कारोबार ही रुक जायेंगे!

आसाराम बापू का ये कथन की लड़कियों को लड़कियों के साथ ही दोस्ती करनी चाहिए और उन्हीं के साथ निकलना चाहिए , पुरुष मित्रों के साथ नहीं !

क्या आसाराम जी को यह नहीं समझ आता  है की उस रात यदि वो लड़की अपने होने वाले पति की जगह अपनी किसी सहेली के साथ गयी होती तो एक नहीं दो लड़कियों का बलात्कार होता ! और यदि उस मित्र की जगह उसके साथ उसके भाई अथवा पिता होते तो क्या बलात्कारियों ने उसे छोड़ दिया होता?

आसाराम जी , दोष स्त्री-पुरुष मित्रता में नहीं है , दोष है समाज में पनपती गनदी मानसिकता का ! दोष है सही संस्कारों के ना मिल पाने का ! सही शिक्षा और गाइडेंस न मिल पाने का !

ऐसे जघन्य अपराधों का समाधान है--- कठोर से कठोरतम सज़ा , संस्कार और नैतिक मूल्यों का धारण करना!

स्त्री और पुरुष को दोष देने से कुछ नहीं होगा !