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Sunday, September 1, 2013

बलात्कार और मनमर्जी के सरकारी संशोधन

१६ दिसंबर निर्भया बलात्कार काण्ड के छठे आरोपी, जो पौने अठारह साल का था उसे नाबालिग बताकर मात्र तीन वर्ष के लिए सुधार गृह भेजा गया है। शायद उसने बलात्कार बचकाने तरीके से किया होगा इसलिए उसे बच्चों वाली सज़ा दी गयी है ! तीन वर्ष बाद बाहर निकलकर दुबारा ऐश करेगा ये सरकारी अल्पसंख्यक बच्चा।

सनद रहे इस लफंगे ने ना केवल बलात्कार किया अपितु छात्रा के पेट में लोहे का सरिया डालकर उसकी आंतें बाहर निकाल दी थी!

बलात्कार और मर्डर की सज़ा मात्र तीन वर्ष के लिए सुधार गृह की सज़ा ! हो रहा भारत निर्माण , बढ़ रहे हैं अत्याचार।

हमारी सरकार जहाँ चाहती हैं वहां तो त्वरित संशोधन कर बिल पास करा लेती है , लेकिन बलात्कार की शिकार हो रही लड़कियों के लिए कोई संशोधन नहीं किया जाएगा ! हम लाचार हैं ! या फिर लचर हैं आप ?

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प्राचीन भारत में बलात्कार एवं त्वरित दण्ड के संदर्भ

रावण जिसे दुष्टता का पर्यायवाची माना जाता है - उसने सीता हरण किया - परन्तु अपने महल में न रख कर - 1 महीने तक अशोक वाटिका में पूर्ण सुरक्षा एवं सुविधा के साथ रक्खा और बलात्कार तो दूर की बात है - दोबारा हाथ तक नहीं लगाया किया - फिर भी उसके पुतले को आज तक जलाया जाता है |

इन्द्र के पुत्र जयंत ने रूप बदल - कौव्वा का रूप धरण कर - सीता के पैरों में चोंच मार कर भाग गया | प्रभु श्री राम के छोड़े हुए बाण ने चौदहों लोकों में पीछा कर के ढूंढ कर प्राणदान देते हुए एक आँख फोड़ कर दंडित किया |

इन्द्र ने रूप बदल कर सती अहिल्या के साथ छलपूर्वक शीलहरण किया - इन्द्र को देवराज होने के उपरांत भी कठोर दंड मिला |

महाभारत की कथा में वर्णन है - दुस्साशन ने द्रौपदी के केश पकड़ कर उसे सभा तक खींचा और दुर्योधन ने द्रौपदी को जंघा पर बैठाने का आदेश मात्र दिया - लेकिन उस कुकृत्य के कारण धृतराष्ट्र के समस्त पुत्रों को मृत्यु दंड मिला और कौरव वंश का नाश हुआ |

विदेशी आक्रमणकरियों के भारत पर अधिकार करने के पहले क्या ऐसा कोई संदर्भ मिलता है कि किसी ने बलात्कार जैसा कुकृत्य - जघन्य अपराध किया हो और उसे राजाज्ञा द्वारा त्वरित मृत्यु-दंड न दिया गया हो ?

क्षत्रपति शिवाजी ने भी विदेशी आक्रमणकरियों के विरुद्ध कई युद्ध लड़े और उन्हें परास्त कर अपने देश की भूमि का पुनः अधिग्रहण किया - लेकिन उस कार्यवाही में पराजित विदेशी आक्रमणकरियों की स्त्रियों के साथ पूर्ण सज्जनता प्रदर्शित करते हुए सम्मानपूर्वक उन्हें सुरक्षित उनके खेमों में भिजवाने के उल्लेख मिलते हैं |

विदेशी आक्रमणकरियों के भारत पर अधिकार करने के पश्चात उन्होने अपनी सभ्यता (?) के अनुसार पराजित देश की स्त्रियों के साथ बलात्कार की परंपरा स्थापित की - अतः पराजित जाति आज तक बलात्कार भोगने के लिए विवश है |

स्त्री को प्रताड़ित या उस का बलात्कार करना तो तो दूर - अपमानित करना भी भारत की सभ्यता एवं संस्कृति में वर्जित है - त्वरित एवं कठोर दंडनीय - अक्षम्य अपराध है |

Tuesday, April 30, 2013

नरमदिल क़ानून ?

नन्ही मासूम दुष्कर्म-पीडिता 'गुडिया' की मृत्यु हो गयी ---लेकिन पांचो बलात्कारी ज़िंदा हैं।

ज़िम्मेदार कौन ?

भेंडचाल समाज ?
संवेदनहीन सरकार और पुलिस?
नरमदिल क़ानून ? या फिर ..
बच्चियां स्वयं कि उन्होंने पृथ्वी पर जन्म क्यों लिया?
या स्त्रियाँ , जिनकी ८० % आबादी जागरूक होना ही नहीं चाहती ?
या फिर वे पुरुष जो स्वयं तो जागरूक रहते हैं लेकिन अपने परिवार को जागरूक करने से कोई सरोकार नहीं रखते?

zeal

Sunday, March 17, 2013

कमीने क़ानून बनाने वाले--

प्राईमरी हेल्थ सेंटर (PHC), शाहजहांपुर में दो साल की बच्ची , जिसने ठीक से चलना और बोलना भी नहीं सीखा था , के साथ वार्ड बॉय ने दो बार बलात्कार किया ! बच्ची को बिस्किट, टॉफी देने का कहकर फुसलाया और अस्पताल के सूने कमरे में दुष्कर्म किया। बच्ची की चीखें सुनकर लोगों ने उसे बचाया। खून से लतपथ बच्ची को उज्जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालात अत्यंत नाज़ुक है।

जिस समय बच्ची का बलात्कार हो रहा था , उस समय माँ ने PHC में एक बच्चे को जन्म दिया। जब उसे इस दुष्कर्म की सूचना दी गयी तो वह सदमे से बेहोश हो गयी।

अब बेचारे वार्ड बॉय का तो कोई दोष है नहीं , 16 साल का तो हो ही गया होगा। दोष तो उस बच्ची का है जिसने स्वेच्छा से बलात्कार नहीं करवाया !

हवस के भूखे कानूनविदों से मेरी अपील है की 16 की जगह दो साल से ही बलात्कार को लीगल कर दिया जाए ताकि वो 'सेक्स' कहलाये और सुनने में मनोरंजक लगे और यदि संभव हो तो कन्या भ्रूण ह्त्या को भी लीगल किया जाए ताकि " न रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी "

फिर इस पृथ्वी पर सिर्फ पुरुष बचेंगे और पुरुषों का ही बलात्कार करेंगे ! सृष्टि ही समाप्त हो जाएगी। बसंत फिर कभी नहीं आएगा।

Zeal

Wednesday, March 6, 2013

महिला दिवस या मज़ाक ?

आठ मार्च (महिला दिवस) पर दिल्ली दुष्कर्म पीडिता को "इंटरनेश्नल वुमन ऑफ करेज अवार्ड" दिया जाएगा। लेकिन अफ़सोस की बलात्कारियों को फांसी देकर पीडिता को न्याय नहीं दिया जाएगा।  कष्ट और अपमान से लुटी पीडिता को अवार्ड चाहिए या फिर न्याय?

कल 5 मार्च को इंदौर में सिविल जज परीक्षा की तैय्यारी कर रही छात्र के साथ गैंग-रेप  हुआ !

क्या बदला हमारे देश में ? स्त्री को कोई सुरक्षा मिलेगी या फिर वो यूँ ही मात्र एक उपभोग की वस्तु बनकर लुटती रहेगी?

इस देश में नारी की जो स्थिति थी, वो अब पहले जैसी नहीं है, स्त्री को मात्र एक कमोडिटी समझ कर उपभोग किया जाता है, फिर दूध में पड़ी मक्खी की तरह फेंक दिया जाता है।

स्त्रियाँ अपना सम्मान और सुरक्षा स्वयं करें। अच्छे बुरे पुरुष की पहचान आसानी से संभव नहीं अतः दूरी बना कर रखें। कितना भी कोई अच्छा लगे उसे संदेह के घेरे में ही रखें। भावनाओं में ना बहें , सावधान रहें ! सचेत रहें!

Zeal

Friday, January 11, 2013

पुरुषों से दोस्ती करें अथवा ना करें ?

संत आसाराम बापू का कहना है की "पुरुषों से दोस्ती की जायेगी तो बलात्कार बढ़ेंगे "

इस तरह की बचकानी बात पहले कभी नहीं सुनी !  सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते, अतः बलात्कार की घटनाओं को देखकर सभी पुरुषों को राक्षस-स्वरुप में देखना अनुचित है ! स्त्रियों को पुरुषों से दूर रहने की हिदायत देना और स्त्री-पुरुष में भेदभाव बढाने की बातें करना पूर्णतया तर्कविहीन है !

स्त्री और पुरुष एक दुसरे के पूरक हैं ! समाज स्त्री और पुरुष दोनों से मिलकर बना है ! दोनों ही एक दुसरे के अभिन्न अंग हैं , अलग नहीं किये जा सकते! ये सृष्टि दोनों के मिले जुले योगदान से ही चल रही है ! यदि प्रकृति के विरुद्ध जाकर उन्हें पृथक करने की योजना की गयी तो सृष्टि के समस्त कारोबार ही रुक जायेंगे!

आसाराम बापू का ये कथन की लड़कियों को लड़कियों के साथ ही दोस्ती करनी चाहिए और उन्हीं के साथ निकलना चाहिए , पुरुष मित्रों के साथ नहीं !

क्या आसाराम जी को यह नहीं समझ आता  है की उस रात यदि वो लड़की अपने होने वाले पति की जगह अपनी किसी सहेली के साथ गयी होती तो एक नहीं दो लड़कियों का बलात्कार होता ! और यदि उस मित्र की जगह उसके साथ उसके भाई अथवा पिता होते तो क्या बलात्कारियों ने उसे छोड़ दिया होता?

आसाराम जी , दोष स्त्री-पुरुष मित्रता में नहीं है , दोष है समाज में पनपती गनदी मानसिकता का ! दोष है सही संस्कारों के ना मिल पाने का ! सही शिक्षा और गाइडेंस न मिल पाने का !

ऐसे जघन्य अपराधों का समाधान है--- कठोर से कठोरतम सज़ा , संस्कार और नैतिक मूल्यों का धारण करना!

स्त्री और पुरुष को दोष देने से कुछ नहीं होगा !

Thursday, December 27, 2012

डॉ अनीता शुक्ला का घटिया और वाहियात बयान ---

कृषि अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक और लायंस क्लब की अध्यक्ष डॉ अनीता शुक्ला का घटिया और वाहियात बयान ---

"पीडिता अगर सात बलात्कारियों से घिर गयी थी तो समर्पण कर देना चाहिए था , हौले से बलात्कार करवा लेना चाहिए था ! इतना हंगामा ना करती तो आंत न निकालनी पड़ती ! स्वस्थ रहती। गलती लड़की की है , लड़कों की नहीं, न ही पुलिस की!"
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इतना शर्मनाक बयान देने वाली डॉ अनीता पर थूकना चाहिए , जो स्त्रियों को इज्ज़त लुटने वक़्त समर्पण की सलाह दे रही हैं!
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मेरा व्यक्तिगत विचार-- लड़कियों को जूडो-कराटे सीखना चाहिए!  खुद को बेहद मज़बूत बनाना चाहिए ! सेल्फ-डिफेंस में इस बलात्कारियों  को मौत के घाट  उतार देने का जज्बा रखना चाहिए!  इज्ज़त लुटे उससे बेहतर से संघर्ष करें ! हिम्मत और हौसला रहेगा तो तो ये छिछोरे, नपुंसक कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे !

वस्त्र बेहद सुविधाजनक होने चाहिए ! लड़कों की तरह ही सुविधानक कपडे और स्पोर्ट्स-शू पहनने चाहिए , ताकि वक़्त ज़रुरत जो-चार किक मुंह पे जड़ सके ! नाखूनों से इन नपुंसकों की आखें फोड़ देनी चाहिए और पेचकस रखें साथ में ताकि इनकी आँतों का फालूदा बनाकर इनके परिजनों को सौपा जा सके!



Wednesday, December 19, 2012

वीर बलात्कारी पुरुष

भारत भूमि में जहाँ स्त्री को इतना सम्मान दिया जाता था, वहीँ आज स्त्री को मात्र  उपभोग की वस्तु  समझा जा रहा है। उसे आम की तरह चूसकर, फिर उसे दर्दनाक तरीके से मार-मारकर चलती गाडी से फेंक दिया जाता  है!  बलात्कारी खुले सांड की तरह घुमते हैं , सत्ता चैन की वंशी बजाती है और स्त्री कलप-कलप  कर मरती है!

दिल्ली में  गैंग रेप  की शिकार एक युवती जिस तरह की असहनीय मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुज़र रही है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उसके माता पिता जितने दारुण दुःख झेल रहे हैं उसका अनुमान भी नहीं  कर सकते हैं ये वीर बलात्कारी!

दिल्ली की मुख्यमंत्री को यदि लड़कियों की सुरक्षा की ज़रा भी चिंता होती तो दिल्ली पुलिस को चप्पे-चप्पे पर चाक-चौबंद कर देती और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति नहीं होती ! लेकिन नहीं एक मुख्यमंत्री जो स्वयं स्त्री हैं , वे इतनी असंवेदनशील क्यों हैं ?  उनके राज में अश्लीलता, बर्बरता , CRIME और बलात्कार की घटनाएं  बहुत तेज़ी से बढ़ी हैं !

यदि पुलिस और प्रशासन स्त्रियों की सुरक्षा नहीं कर सकती और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकती तो उसे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए ताकि कोई और काबिल इंसान महिलाओं की सुरक्षा कर सके और उनको भी जीने का अधिकार दे सके !


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घटना का ताज़ा अपडेट--

By Kumar Rakesh--देल्ही रेप मार्क लड़की के बचने की उम्मीदें बेहद कम दिखाई दे रही हैं.
डॉक्टर के मुताबिक लड़की के शरीर में बुरी तरह दर्द है, सांस लेने में काफी तकलीफ है. नब्ज 130 पर है, जो सामान्य 72 से काफी ज्यादा है. संक्रमण बढ़ने से खूनमें प्लेटलेट्स
स्तर गिरकर 48 हजार रह गया है. जो सामान्य हालत में डेढ़ लाख से साढ़े 4 लाख होता है. पल्स रेट बढ़ना और प्लेटलेट्स घटना चिंता का कारण है.
वारदात के करीब 36 घंटे बाद मंगलवार सुबह पीड़ित लड़की को होश आया था, लेकिन वो बोल नहीं पाई. वह बोल नहीं पा रही है. उसने अपनी मां के नाम कई संदेश लिखे हैं. उसनेएक मैसेज लिखा है, 'मां, मैं जीना चाहती हूं!' रोते हुएउसने कागज पर अपना दर्द
बयान किया- 'लिफ्ट माई लेग, क्लीन माई थ्रोट' यानी मेरा पैर उठाओ और मेरा गला साफ करो. इसके बाद वो छत कीतरफ ताकती रही
और आंखों से आंसू निकलते रहे.
बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने बताया कि उसकी हालत बेहद खराब है. डॉक्टरों ने मुझे कहा है कि मर्द होने के नाते वो मुझे ये बताने की हालत में नहीं हैं कि पीड़ित लड़कीको क्या-क्या दिक्कतें हैं.
सूत्रों के मुताबिक उसकी आंतों में गहरी चोट है. उसके पेट पर किसी भारी चीज से वार किया गया. शरीर के अंदरूनी हिस्सों में कई जगह गंभीर चोटें हैं. गले औरबाहों में चोट के काफी निशान हैं. सिर को बार-बार फर्श या दीवारों पर पटका गया, जिससे 23 टांके लगाने पड़े
रीढ़ की हड्डी में भी चोट आई है. लड़की अब तक 5 बार कोमा में जा चुकी है. डॉक्टर लगातार लड़की का डायलिसिस कर रहे हैं. अब तक उसकी 5 बार लाइफ सेविंग सर्जरी की जा चुकी है।
Amar Verma ताजा अपडेट
#DelhiGangrape
चलती बस में गैंगरेप का शिकार हुई
लड़की की हालत और बिगड़ गई है। सफदरजंग
अस्पताल के सात डॉक्टरों ने गैंग रेप की शिकार

लड़की की हालत पर ऑफ दी रिकार्ड ब्रीफिंग में
ये बात कही। डॉक्टरों ने
बताया कि लड़की की हालत में ज्यादा सुधार
नहीं आया है। डॉक्टरों ने कहा कि लड़की ने कल
इशारे में थोड़ी बातचीत की थी, लेकिन लेकिन
आज वो इशारे में भी बात नहीं कर पा रही है।
सर्जरी से पहले कल लड़की ने अपने मां और
पिता से बात की थी। डॉक्टरों ने कहा कि पाइप
के जरिये लड़की को लिक्विड भोजन
दिया जा रहा है और उसे अभी भी वेंटिलेटर पर
रखा गया है।
डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल लड़की के शरीर में
कोई इंफेक्शन नही है, लेकिन इंफेक्शन
का खतरा बना हुआ है। हम पूरी तरह ख्याल रख
रहे हैं। अभी तक आंतों में गंभीर जख्म है।
लड़की 40 मिनट तक बस में और उसके बाद एक
घंटे तक सड़क पर रहने के बावजूद वो कैसे बच गई
ये हैरत की बात है।लड़की को खून देने वाले
लोगों का अस्पताल में तांता लगा हुआ है। कल
सर्जरी के पहले वो जिस तरह बात कर
रही थी आज सर्जरी के बाद आज वो बातचीत
नहीं कर पा रही है। उसकी हालत जस के तस
बनी हुई है।


  • Smart Rajat Gupta Journalist · Friends with Sanjay Agarwal
    DELHI :- रेप पीड़ित छात्रा ने लिखा, मुझे जीना है मा
    दिल्ली में रविवार को गैंगरेप का शिकार बनी छात्रा की हालत नाजुक बनी हुई है. सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुई छात्रा की मौत से जंग जारी है, लेकिन इस बीच गजब की हिम्मत दिखाते हुए इस लड़की ने अपनी मां को एक संदेश लिखा.
    पीड़ित छात्रा वेंटीलेटर पर है. डॉक्टरों की कहना है कि अभी उसके बारे में कुछ कहा नही जा सकता, जख्म गहरे हैं और हालात नाजुक है. पीड़ित छात्रा अभी भी कुछ बोल नहीं पा रही है लेकिन उसने अपनी मां को संदेश लिखा और इस संदेश से हमारे समाज का एक कड़वा सच सामने आ गया है.
    संदेश में उसने लिखा, 'उस रात मेरा क्रेडिट कार्ड भी चला गया. वो दरिंदे मेरा मोबाइल भी उठा कर ले गए, लेकिन घर पर जो मेरा पुराना मोबाइल पड़ा है उसमें मेरे दो दोस्तों का नंबर है. उन्हें फोन करके बोल दीजिएगा कि मैं तीन महीने के लिए बाहर गई हूं.'
    ये एक लड़की होने का दर्द है. इस दर्द को समझना भी आसान नहीं है. लेकिन ये लड़की ना सिर्फ ये दर्द बर्दाश्त कर रही है बल्कि पूरे जज्बे के साथ इससे लड़ भी रही है. लेकिन शायद ये लड़की होने की मजबूरी है या फिर हमारे समाज और उसकी सोच से जो माहौल बना है उसकी मजबूरी. ये लड़की अपने दोस्तों के बीच वापस तो जाना चाहती है, लेकिन नहीं चाहती कि उन्हें कुछ भी पता चले.
    पीड़ित छात्रा को ये नहीं पता कि दो दिन से पूरा देश बस उसकी ही चर्चा कर रहा है. उसे ये भी नहीं पता उसके साथ आज पूरा समाज खड़ा है, उसे हौसला देने के लिए हर शख्स आगे आने को तैयार है. लेकिन इस सब के बीच एक बड़ा सच ये भी है कि जिस लड़की के साथ ऐसी बड़ी वारदात हो जाती है. वो भी सबसे पहले इसे छिपाना चाहती है.
    REPORT:-Smart Rajat Gupta Journalist DELHI
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Tuesday, March 13, 2012

स्त्री की अस्मिता के साथ इतना क्रूर मज़ाक

दिल्ली में एक लड़की को जो अपने भाई के साथ घर जा रही थी, को खींचकर मारुती कार में किडनैप कर लिया। रात भर उसके साथ सामूहिक बलात्कार करके प्रातः उसे सड़क पर फेंक दिया। एक पल में जिंदगी उजाड़ दी। कब बदलेगी इन युवकों की गन्दी , भोंडी और विकृत मानसिकता। माता-पिता से कहाँ चूक हो रही है अपने बच्चों को संस्कार देने में। क्या ये वही भारत है जिसकी सभ्यता और संस्कृति पर हम गर्व करते हैं और जहाँ स्त्री को लक्ष्मी की संज्ञा दी जाती है। एक स्त्री किसी की मासूम बेटी है, प्यारी बहन है, ममतामयी माँ है और कदम-कदम पर मुश्किलों पर साथ देने वाली जीवन संगिनी है। कैसे कोई मानवता को भुलाकर स्त्री की अस्मिता के साथ इतना क्रूर मज़ाक कर सकता है। क्यों कुछ युवक सम्पूर्ण पुरुष जाति को कलंकित कर रहे हैं।

Thursday, December 23, 2010

राजधानी दिल्ली -- बलात्कारी दिल्ली

बड़े ही शर्म की बात है की जिस देश की राष्ट्रपति महिला हैंUPA की अध्यक्ष भी महिला हैं और दिल्ली की मुख्य मंत्री भी महिला हैं, वहाँ भी बच्चियां और महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और दिनों दिन बलात्कार की घटनाएं आम हो रही हैं

सुना था दिल्ली पठन-पाठन में अग्रणी हैयहाँ रोजगार के अवसर भी बहुत हैंलेकिन अब तो हमारी दिल्ली -
  • क्राइम में
  • व्यापारियों को लूटने में
  • इमारतों के ढ़हने में
  • सड़क दुर्घटनाओं में
  • ब्लू-लाइन से कुचलने में और
  • बलात्कार जैसी घटनाओं में अग्रणी है
आखिर वजह क्या है ? ये घटनाएं दिल्ली में ज्यादा क्यूँ हैं ? क्या इसके लिए -
  • दिल्ली की लडकियां जिम्मेदार हैं
  • या दिल्ली का पुरुष वर्ग कुछ भिन्न मानसिकता रखता है
  • या फिर सामाजिक ढाँचे में कहीं कोई कमी है
  • या फिर कमज़ोर सुरक्षा व्यवस्था
  • या फिर झोल-झाल कानूनी प्रक्रिया और व्यवस्था
  • या फिर अशक्त और असंवेदनशील राजनैतिक व्यवस्था
आखिर इसका कोई तो हल होगाकिसी को दोष देकर तो इस समस्या से जूझा नहीं जा सकताबहुत सोचने पर मुझे लगता है यदि निम्न उपायों को अपनाया जाए तो कुछ मदद मिल सकती है , इन बढती हुई घटनाओं से निपटने की


Self defense -

  • लड़कियों को Self defense अपनाना होगा। उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी सुरक्षा कैसे करनी है , इसकी physical training लेनी चाहिए।
  • अपने साथ pepper-spray [ मिर्ची पाउडर ] रखें , तथा बलात्कारी और छेड-छाड़ करने वालों से आपातकाल में निपटें ।
  • कोई भी दुर्घटना हो उसकी FIR अवश्य दर्ज करायें । इससे बेसिक- पुलिसिंग में मदद मिलती है ।
  • कोई भी व्यक्ति जन्मजात बलात्कारी नहीं होता। उसमें कुछ क्रिमिनल जींस होते हैं जो धीरे-धीरे विकसित होते हैं , यदि हर छोटे बड़े गुनाह की रिपोर्टिंग होगी तो बड़े गुनाहों को होने से रोका जा सकता है।
  • लडकियां अकेले ना निकलें , एक ग्रुप बनाएं , और यदि कोई दुर्घटना होती है तो मिलकर रिपोर्ट करें तथा थोड़े थोड़े समय पर follow- up के लिए जाएँ तथा त्वरित कारवाई के लिए pressurize करें।
सुरक्षा व्यवस्था -
  • चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होना चाहिए ताकि मनचलों की हिम्मत ही न पड़े गुनाह करने की।
  • पुलिस वालों का संवेदनशील रवैय्या होना चाहिए अपनी बहन बेटियों के लिए।
  • रिपोर्ट लिखने में तथा कार्यवाई करने में तत्परता दिखायें तथा यथा संभव पूरा सहयोग दें जिससे महिलाएं ऐसी घटनाओं को पुलिस में रिपोर्ट करने में हिचकें नहीं तथा अपराधी खुले ना घूमें।
GPS [ Global positioning system] व्यवस्था -

BPO में काम करने वाली लड़कियों को रात्री में जिस Cab से जाना होता है , उसमें GPS व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कम से कम गाडी किस दिशा में ले जाई गयी है ये पता लगाया सकता हैतथा समय से मदद के लिए पहुंचा जा सकता है

कानूनी व्यवस्था-

  • कानून में बलात्कार जैसी शर्मनाक घटनाओं के लिए सख्त सजा होनी चाहिए
  • त्वरित कारवाई करके अपराधी को शीघ्र ही सजा दिलानी चाहिए। [ Justice delayed is justice denied]
  • ऐसी दुर्घटनाओं में Victim बहुत भयग्रस्त हो जाती है , तथा उसपर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है । मनोबल टूट जाता है । इसलिए कानूनी प्रक्रिया त्वरित तथा सहज होनी चाहिए जिससे पीडिता को बार-बार तिरस्कृत न होना पड़े।
  • त्वरित एवं सख्त कार्यवाई अपराधी की संख्या भी कम करेगी तथा फलस्वरूप ज्यादा केसेज़ रिपोर्ट होंगे और इस समस्या का निदान हो सकेगा।
राजनैतिक व्यवस्था-

  • जो सत्ता में है , जिसके पास ताकत है , वो चाहे तो , सब -कुछ कर सकता है। [ Where there is will , there is a way ]
  • शीला जी का ये वक्तव्य की - " आप बताइये हम क्या कर सकते हैं " ---अत्यंत शर्मनाक है । यदि वो कुछ नहीं कर सकतीं तो अपनीं कुर्सी ही छोड़ दें ।
  • पहले बिहार की बुरी स्थिति थी , आज नितिश जी के सद्प्रयासों से लडकियां सुरक्षित महसूस कर रही हैं । साइकिलों पर बैठकर स्कूल जा रही है। यदि कोई सही मायनों में विकास चाहे तो बिकुल किया जा सकता है।
नया साल रहा हैऐसे में विकृत मानसिकता वाले असामाजिक तत्व ज्यादा active हो जाते हैंइसलिए लड़कियों /स्त्रियों को चाहिए की सजग हो जाएँ

आभार