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Monday, September 20, 2010

ठुमक चलत रामचंद्र , बाजत पैजनिया --रामकोट-अयोध्या -- और मेरा बचपन !

ददिहाल और ननिहाल फैजाबाद में होने के कारण, तथा पिताजी की पोस्टिंग स्टेट बैंक अयोध्या में होने के कारण मेरा बचपन , श्रीराम की जन्मस्थली के इर्द-गिर्द , माँ सीता की रसोईं , कनक-भवन , कौशल्या भवन तथा हनुमान-गढ़ी में खेलते-कूदते बीता। हनुमान गढ़ी की वानर सेना से , प्रसाद बचाकर निकलना एक रोचक तथा दुष्कर कार्य था। सरयू नदी के तट पर पानी की लहरों से अटखेलियाँ करते हुए , इस जीवन स्वर्णिम समय व्यतीत किया है।

आजकल अयोध्या विवाद ने बार-बार , मेरे मन को वापस मेरे बचपन में भेज दिया।

कहीं न कहीं मन उदास भी है और आशंकित भी।

आइये जानते हैं राम जन्म-भूमि के इतिहास को --

साकेत नगर अयोध्या, जिसका पूर्व में नाम साकेत था, की स्थापना - वैवस्वत मनु ने की थी। कौशल नरेश दशरथ के पुत्र श्री राम , भगवान् विष्णु के सातवे अवतार माने जाते हैं । इन्होने अयोध्या में ११,००० वर्षों तक राज किया । इनके समय में देश में, खुशहाली, समृद्धि, शान्ति तथा न्याय का वर्चस्व था । जिसके लिए राम-राज्य आज भी याद किया जाता है। त्रेता युग में अवतरित श्री राम ऋग्वेद कालीन माने जाते हैं। त्रेता युग का समय करीब १.३ अरब वर्ष माना गया है।

अफ़सोस होता है यह जानकार की श्रीराम जो अयोध्या के राजा थे , के जन्म-स्थल को लेकर विवाद हो रहा है । श्रीराम तो अयोध्या के कण-कण में बसते हैं । फिर रामकोट पर कैसा विवाद ?

मुग़ल सम्राट बाबर सन १५२७ में उज्बेकिस्तान फरगना से हिन्दुस्तान आया। उसने चित्तोरगढ़ के राजा संग्रामसिंह को फतेहपुरसीकरी में हराकर आस पास के क्षत्रों पर अपना कब्ज़ा जमा लिया । बाबर ने मीर बांकी को अपना वाई-सराय बनाया जिसने सन १५२८ में रामकोट के विशाल राम मंदिर को ध्वस्त करके वहाँ एक विशाल मस्जिद का निर्माण कराया जिसे आज 'बाबरी मस्जिद ' के नाम से नाम से जानते हैं।

सन १९४० तक इस मस्जिद का नाम -- ' मस्जिद-ऐ- जन्मस्थान ' था , जो अपने आपने आप में ये साबित करता है की विवादित मस्जिद , पूर्व मैं बने मंदिर जो श्रीराम का जन्मस्थल है , को ढहाकर बनायीं गयी है। बबारनामे में इस मस्जिद का कहीं कोई उल्लेख नहीं है।

साक्ष्य के तौर पर -Archaeological Survey of India की रिपोर्ट [ १९९०, १९९२, २००३ ] प्रस्तुत की , जिसमें करीब ११३० साक्ष्य मिले । ऐ एस आई द्वारा उत्खनन में अनेकों कलाकृतियाँ , सजी हुई इंटें , दिव्य-युगल की टूटी संरचनाएं , पर्णसमूह , तथा नक्काशीदार वास्तुशिल्प की संरचनाएं , लोटस मोटिफ आदि मिलीं है।

The excavations yielded: stone and decorated bricks as well as mutilated sculpture of a divine couple and carved architectural features, including foliage patterns, amalaka, kapotapali, doorjamb with semi-circular shrine pilaster, broke octagonal shaft of black schist pillar, lotus motif, circular shrine having pranjala (watershute) in the north and 50 pillar bases in association with a huge structure"

आखिर कौन सा फैसला आने वाला है २४ सितम्बर को ? किसके हक में होगा ? इसका फैसला हमारे विद्वान् न्यायाधीश करेंगे । जो हम सभी को मान्य होगा।

मेरी अपने भारत वासियों से अपील है , की आने वाले फैसले को शान्ति से स्वीकारें और आपसी सौहार्द्र को बनाएं रखें । ये समय आतंरिक मतभेदों का नहीं है, अपितु विदेशी ताकतों से अपने देश की रक्षा करने का है।

ये लेख बिना किसी पूर्वाग्रहों के , निष्पक्ष होकर , पाठकों से जानकारी बांटने के उद्देश्य से लिखा गया है। ह्रदय में आने वाले भाव मेरी लेखनी से अविरल निकलते रहेंगे । किसी प्रकार की त्रुटी हो तो कृपया ध्यान दिलाएं एवं मार्दर्शन करें।

पाठकों से निवेदन है, कृपया नयी जानकारी इस लेख में जोडें ।

आभार।