गुजरात के सूरत शहर के तुषार वरीया नामक शिक्षक ने आठवी और नवी कक्षा के तकरीबन १५ छात्रों के बाल ट्रिम कर दिए। माता-पिता नाराज़ हैं । शिक्षक को विद्यार्थियों की फंकी-स्टाइल पसंद नहीं थी । बार-बार मना करने पर भी जब विद्यार्थियों ने उनकी बात नहीं सुनी तो मजबूरन उन्हें ऐसा करना पड़ा। मेरे विचार से शिक्षक ने ठीक किया । रंग बिरंगे बाल और 'जेल' लगाकर कोई विद्यालय जाता है क्या भला? लातों के भूतों का यही उचित इलाज है। शिक्षकों को इतना अधिकार तो होना ही चाहिए की विद्याथियों को अनुशासित कैसे किया जाए।