Thursday, October 4, 2012

हाय काजल लगी मदहोश तुम्हारी आखें..

बला का हुस्न गज़ब का शबाब नींद  में है
है जिस्म जैसे गुलिस्ताँ गुलाब नींद में है

उसे ज़रा सा भी पढ़ लो तो शायरी आ जाए
अभी ग़ज़ल की मुकम्मल किताब नींद में है

मचल रही है मेरे दिल में दीद की हसरत
वो डाले चेहरे पे नीला नकाब नींद में है

वो इन्कलाब उठाता है ले के अंगडाई
सवाल जागा हुआ है जवाब नींद में है

27 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
जिसने भी लिखी है बहुत अच्छी लिखी हैं ये पंक्तियाँ!
शुभसंध्या...!

रविकर said...

हुवे समर्थक छह शतक , दिव्या दिव्य कमाल ।

बढे चढ़े उत्साह नित, जियो जील के जाल ।

जियो जील के जाल, गजल का शायर बोलो ।

है रचना उत्कृष्ट, हास्य पर कुछ दिन डोलो ।

होय ईर्ष्या मोय, बताओ औषधि डाक्टर ।

शतक समर्थक पूर, करे कैसे यह रविकर ।।

kshama said...

Wah!

Aditi Poonam said...

बहुत खूबसूरत कहा है

Aditi Poonam said...

बहुत खूब

प्रवीण पाण्डेय said...

सच में बहुत अच्छी हैं।

Rakesh Kumar said...

मुझे तो लगा आपने ही लिख डाली हैं उपरोक्त
पंक्तियाँ.

बहुत ही भावपूर्ण है.

शेयर करने के लिए आभार.

Bharat Bhushan said...

दो बार पढ़ गया हूँ. दोनों बार यह ग़ज़ल अच्छी लगी.

Prabodh Kumar Govil said...

sawaal jaga hua hai, jawaab neend me hai ...shreshth!

दिवस said...

गज़ब की पंक्तियाँ हैं। दरअसल मैं भी इस ग़ज़ल को गाना चाहता हूँ।
आपको बता दूं कि ये ग़ज़ल फिल्म "एक विवाह ऐसा भी" की है, जिसने नायक (सोनू सूद) अपनी नायिका (ईशा कोप्पिकर) को ट्रेन में सोते हुए देखते समय लिखता है। असल में ये ग़ज़ल गीतकार रविन्द्र जैन ने लिखी है, संगीत भी उन्ही का है और इसे गायक शान ने अपनी शानदार आवाज़ म गाया है।
मुझे यह ग़ज़ल बहुत पसंद है।

दिवस said...

इस गीत को यहाँ देखिये
http://www.youtube.com/watch?v=0uAX9IEPV9k

ANULATA RAJ NAIR said...

एक तो इस ब्लॉग पर गज़ल देखते ही दिल निसार हो गया :-)

बहुत सुन्दर!!!
अनु

प्रतिभा सक्सेना said...

वाह !

Asha Lata Saxena said...

हमने तो सोचा था की आप ने लिखी है यह रचना |
पर है अच्छी |
आशा

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया, क्या बात


मेरे नए ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए नया लेख
http://tvstationlive.blogspot.in/2012/10/blog-post.html









Pallavi saxena said...

बहुत खूब ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Unknown said...

ग़ज़ल खूबसूरत है और अच्छी है , पढना सुखद लगा

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत ख़ूब! वाह!

कृपया इसे भी देखें-

नाहक़ ही प्यार आया

virendra sharma said...

बहुत खूब है पसंद आपकी .

लीजिए एक शैर इसी पर -उनसे छींके से कोई चीज़ उतरवाई है ,काम का काम है अंगडाई की अंगडाई है .

ram ram bhai
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शनिवार, 6 अक्तूबर 2012
चील की गुजरात यात्रा

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

मैने पहले भी इसे पढा है,
अच्छी रचना है।

Arvind Jangid said...

पसंद करने लायक हैं भी....!

मेरा मन पंछी सा said...

वाह
बहुत बढ़िया..
:-)

मेरा मन पंछी सा said...

वाह
बहुत बढ़िया..
:-)

sushmaa kumarri said...

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

sushmaa kumarri said...

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........