Thursday, November 29, 2012

फेसबुक तनाव देता है सिब्बल एंड पार्टी को..

कल समाचार पत्र में पढ़ा कि - "फेसबुक तनाव देता है"  !

ये बात सच भी है लेकिन इससे भी बड़ा सच ये है की फेसबुक तनावमुक्त भी करता है !   ये तो आप पर है की आप मुसीबत पाल रहे हैं या खुद को तनावमुक्त कर रहे हैं लेखन के माध्यम से , जागरूकता लाकर, विसंगतियों  के खिलाफ आवाज़ उठाकर , व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों  से या फिर फेसबुक पर फ़्लर्ट कर रहे हैं !

समाचार पढ़कर मेरे एक शुभचिंतक ने मुझसे कहा मुझे फेसबुक से दूर रहना चाहिए ताकि तनाव न हो ! मैंने कहा -"मुझे तो फेसबुक कोई तनाव नहीं देता , लेकिन हाँ मेरे पाठकों को मैं ज़रूर तनाव दे देती हूँ कभी-कभी अपनी फेसबुक टिप्पणियों से !"

खैर डरने की ज़रुरत नहीं है ! फेसबुक एक वंडर-ड्रग है ! बहुत से लाइलाज रोगों का इलाज भी ! depression और frustration  जैसी परिस्थितियों का बहुत सुदर विकल्प है 'फेसबुक" !

तानाशाह और कांग्रेसियों को तनाव देता है फेसबुक , जिसका भंडाफोड़ होता है फेसबुक पर !

मुस्कुराईये की आप फेसबुक पर हैं !

Smiles...

Zeal

12 comments:

दिवस said...

फेसबुक हमे तो समाधान देता है। अपनी बात रखने का अवसर व मंच देता है। तनाव उनके लिए पैदा हम कर देते हैं जो इस धरा को अपनी दासी समझ बैठे हैं।
आप लिखती रहिये, रुकना मत। आप लिखेंगी तो तनाव पैदा होगा, किन्तु आपको नहीं। उन्हें जिन्हें आपका लिखना रास नहीं आ रहा।

लोकेन्द्र सिंह said...

अपुन तो फेसबुक पर स्माइल देते हैं... :)

रविकर said...

टेंसन देता फेसबुक, लेता सिब्बल लेट ।

यह तो है मस्ती भरा, तिकड़म तनिक समेट ।

तिकड़म तनिक समेट, तीन से बचना डेली ।

मोहन राहुल मॉम, बड़ी घुड़साल तबेली ।

सो जा चद्दर तान, भली भगवान् करेंगे ।

कर मोदी गुणगान, जिरह बिन नहीं मरेगा ।।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...


काका कुटिल तबसे कुछ ज्यादा ही तनाव में आ गए जबसे एक अल्पसंख्यक लडकी इनके बिछाए चक्रव्यूह में फंसी . चिंता में है की क्या मुह लेकर अगली बार चांदनी चौक घूमने जायेंगे :)

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

पूरण खण्डेलवाल said...

बिलकुल सही कहा है आपने !!

अशोक सलूजा said...

:=)))
तनावमुक्त रहें!

शूरवीर रावत said...

मन में चोर हो तो डर लगता ही है दिव्या जी। फिर आप खरी खरी लिखती हो। चोरों को टेन्शन होना स्वाभाविक है।

virendra sharma said...

कभी बे -सबब रहा करो ,

कभी कुछ भी न किया करो ,

कभी यूं ही कुछ किया करो ,

कभी बे -वजह फिरा करो ,

मुख चिठ्ठे पे भी दिखा करो ...


virendra sharma said...

आपातकाल लगाने का बहाना ढूंढती है शिवसेना की ताई बोले तो कोंग्रेस .अभी मुंबई ने थोड़ा सा स्वाद ही दिखाया है इस बंदिश का .

मन्टू कुमार said...

सही कहा आपने..

Internet Marketing Company said...

चीज़ जो आवश्यकता से अधिक हो तनाव देता है !!