Showing posts with label Dr Divya Srivastava. Show all posts
Showing posts with label Dr Divya Srivastava. Show all posts

Thursday, November 29, 2012

फेसबुक तनाव देता है सिब्बल एंड पार्टी को..

कल समाचार पत्र में पढ़ा कि - "फेसबुक तनाव देता है"  !

ये बात सच भी है लेकिन इससे भी बड़ा सच ये है की फेसबुक तनावमुक्त भी करता है !   ये तो आप पर है की आप मुसीबत पाल रहे हैं या खुद को तनावमुक्त कर रहे हैं लेखन के माध्यम से , जागरूकता लाकर, विसंगतियों  के खिलाफ आवाज़ उठाकर , व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों  से या फिर फेसबुक पर फ़्लर्ट कर रहे हैं !

समाचार पढ़कर मेरे एक शुभचिंतक ने मुझसे कहा मुझे फेसबुक से दूर रहना चाहिए ताकि तनाव न हो ! मैंने कहा -"मुझे तो फेसबुक कोई तनाव नहीं देता , लेकिन हाँ मेरे पाठकों को मैं ज़रूर तनाव दे देती हूँ कभी-कभी अपनी फेसबुक टिप्पणियों से !"

खैर डरने की ज़रुरत नहीं है ! फेसबुक एक वंडर-ड्रग है ! बहुत से लाइलाज रोगों का इलाज भी ! depression और frustration  जैसी परिस्थितियों का बहुत सुदर विकल्प है 'फेसबुक" !

तानाशाह और कांग्रेसियों को तनाव देता है फेसबुक , जिसका भंडाफोड़ होता है फेसबुक पर !

मुस्कुराईये की आप फेसबुक पर हैं !

Smiles...

Zeal

Wednesday, November 28, 2012

भारतीय ज्ञान और सम्पदा की चोरी






Photo: आज जिन वैज्ञानिक शोधों पर अंग्रेजों (न्यूटन, मेंडलीफ, डार्विन) का टैग लगा है, वो सबकुछ तो हमारे भारतीय वैज्ञानिक कबका ढूंढकर उस पर ग्रन्थ लिख गए ! लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे विश्वविद्यालयों (जैसे-नालंदा आदि) को नष्ट कर दिया और पांडुलिपियों को जला दिया ताकि किसी भी भारतीय विद्वान् का नाम न हो सके ! अरे ये लोग समझेंगे हनारे ज्ञानी -ध्यानी और विद्वान् ऋषि मुनियों और वैज्ञानिकों को (जैसे आर्यभट्ट , पतंजलि, कणाद,  सी वी रमन  आदि)  ! नीचे तालिका में देखिये जो ऋषि कणाद द्वारा पूर्व में वर्णित किया जा चुका  है , उसे कितनी आसानी से न्यूटन की खोज कह दिया गया ! और भारतीय सिलेबस/ किताबों में भी न्यूटन का नाम मिलेगा आर्यभट्ट और कणाद आदि विद्वान् वैज्ञानिकों का नहीं ! गुलामी की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी !...........

 आज जिन वैज्ञानिक शोधों पर अंग्रेजों (न्यूटन, मेंडलीफ, डार्विन) का टैग लगा है, वो सबकुछ तो हमारे भारतीय वैज्ञानिक कबका ढूंढकर उस पर ग्रन्थ लिख गए ! लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे विश्वविद्यालयों (जैसे-नालंदा आदि) को  नष्ट कर दिया और पांडुलिपियों को जला दिया ताकि किसी भी भारतीय विद्वान् का नाम न हो सके ! अरे ये लोग क्या समझेंगे हमारे  ज्ञानी -ध्यानी और विद्वान् ऋषि मुनियों और वैज्ञानिकों को (जैसे आर्यभट्ट , पतंजलि, कणाद, सी वी रमन आदि) ! ऊपर  तालिका में देखिये जो ऋषि कणाद द्वारा पूर्व में वर्णित किया जा चुका है , उसे कितनी आसानी से न्यूटन की खोज कह दिया गया ! और भारतीय सिलेबस/ किताबों में भी न्यूटन का नाम मिलेगा आर्यभट्ट और कणाद आदि विद्वान् वैज्ञानिकों का नहीं ! गुलामी की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी !

Zeal

Wednesday, November 21, 2012

दिव्या श्रीवास्तव के प्यारे-प्यारे 54 बच्चे ...

 निकट की बस्ती में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे , जो मेरे भी बच्चे हैं !

 नेहा , धीरज और छोटू

 मेरे बच्चों की टीम के सबसे बड़े बच्चे, इन्हें तो आप पहचानते ही हैं !

 54 बच्चों के माता-पिता (दिव्या और उसके पति))


आज की तारीख में मेरे पास 54 बच्चे हो गए हैं। इनके लिए मेरे जैसे मिडिल क्लास व्यक्ति को कुछ विशेष नहीं करना पड़ता।  बस उन्हें पढ़ाती  हूँ ! थोडा देशभक्ति की बातें और चरित्र निर्माण की दिशा देती हूँ। उनके लिए यथा सामर्थ्य (ज्यादा महँगा नहीं) , स्कूल का बैग, पेन्सिल, टिफिन बॉक्स , उनके लिए कपडे , कभी-कभी फल आदि लाती हूँ , (शेष उनके मजदूर माता-पिता ही करते हैं)! आजकल, चित्र में दिख रहे बच्चे  'नेहा" और धीरज तथा अन्य तीन बच्चों के साथ एक नाटक की तैय्यारी करवा रही हूँ जो संभवतः 26 जनवरी को प्रदर्शित होगा , township के सभी गणमान्य लोगों के सम्मुख! मेरे इस प्रयास में मेरे पड़ोस के बहुत से अन्य लोग भी शामिल हो रहे हैं मेरे साथ , जिससे मुझे अपने ध्येय तक पहुँचने में आसानी हो रही है !

मेरे विचार से अन्य लोग भी इस तरह से गरीब बच्चों को गोद ले सकते हैं और उनका जीवन संवार सकते हैं !

जय हिन्द !
जय भारत !

Friday, August 24, 2012

इस मनचले ब्लॉगर का आभार


कल एक मनचले ब्लॉगर की पोस्ट पर एक टिप्पणी पढ़ी। अब ये न पूछियेगा किसकी टिप्पणी थी। अरे उसी मनचले ब्लॉगर की टिप्पणी थी जिसके ब्लॉग पर लिखी थी। बस उसका शौक है की अपने ही ब्लॉग पर 'बेनामी' बनकर खुद ही टिप्पणी करता है....Smiles...

खैर टिप्पणी में लिखा क्या था ?

लिखा था-- " दिव्या ने अपने ब्लॉग पर ३० साल पुरानी तस्वीर लगा रखी है , पता नहीं किसको आकर्षित करने के लिए"

पढ़कर मन में यही ख़याल आया की ये इतना बुज़ुर्ग हो गया है, लेकिन महिलाओं की तस्वीरों में ही उलझा हुआ है अभी तक। ब्लॉगर तो बुद्धिजीवी वर्ग में आते हैं, लेकिन ये तो किसी के विचार नहीं पढता, बल्कि तसवीरें ही देखता है।

लेकिन फिर सोचा , बात तो सही कह रहा है बेचारा। इतनी पुरानी तस्वीर लगाने क्या फायदा। चलो कोई बुढापे वाली शानदार तस्वीर लगाई जाए। कुछ तो डरेगा ये मुझसे। बस फिर क्या था , ढूंढना शुरू किया एक अदद तस्वीर को , जिसने पैसठ (६५) बसंत देख लिए हों।

वो कहते हैं ना-- जहाँ चाह , वहां राह......मिल गयी ना आखिर एक अदद तस्वीर श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव की।

नोट- दोनों तस्वीरों में परिधान एक ही है (वही तीस साल पुराना), सर्फ़ एक्सेल का कमाल है !!


Hey ! Thanks Mr मनचले !

Zeal

Thursday, December 8, 2011

मधुर आवाज़ के धनी -- श्री अशोक कुमार मोहिते

छत्री , शिवपुरी , मध्य प्रदेश.


सूफी संगीत सुनते हुए श्रोताओं की एक पंक्ति


गिटार पर अपने साथियों के साथ सूफी संगीत सुनाते हुए श्री मोहिते




२६ जून १९५४ को जन्मे श्री अशोक मोहिते जी पर माँ सरस्वती की विशेष कृपा है! सुरीले कंठ का धनी होने के साथ-साथ आपने लेखन द्वारा भी साहित्य को बहुत समृद्ध किया! जिला रत्नागिरी (महाराष्ट्र) के मूल निवासी श्रीअशोक जी इस समय श्रीमंत कै. जीजा महाराज छत्री ट्रस्ट, शिवपुरी , मध्य प्रदेश में छत्री अधिकारी हैं.


आपकी कुछ रचनाएँ --

रामजी की माया (भजन संग्रह)
एक रात तुम्हारे नाम लिखी (छायावादी रचना)
मेरी अंतिम कविता (मुक्त छंद कविता संग्रह)
सहज भाव (निबंध संग्रह )
व्यवस्था के लिए (व्यंग)
पूजा के व्यवहारिक अर्थ (अध्यात्म)
वैवाहिक जीवन का अध्यात्मिक आनंद

उपलब्धियां एवं पुरस्कार--

अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संगीत रचना पुरस्कार
महावृक्ष पुरस्कार १९९६
पर्यावरण व वन विभाग मंत्रालय भारत शासन नगरपालिका शिवपुरी द्वारा सन १९८५ में सम्मानित
शिवपुरी समारोह
तानसेन समारोह
भारत पर्व समारोह में गायन-वादन


श्री अशोक जी द्वारा लिखा गया एक अंतर गीत --

जो बीत गयो सो बीत गयो , अब आये वो सुख दुःख जीतो
जीत गयो सो जीत गयो , जो बीत गयो सो बीत गयो !

सत संगत अमृत घट भरियो , पीवत प्रेम जगत से करियो ,
जनम-जनम की प्यास बुझइयो, जो अंतर संगीत गयो
जो बीत गयो सो ------

अजब गजब है जगत की माया , बची न जग में नश्वर काया
आयु का घट निसदिन छलकत , रीत गयो सो रीत गयो
जो बीत गयो सो---

सुख जानो दुःख दूर भगाओ, अंतर भजन प्रभु का गाओ,
सबसे बड़ो रस भक्ति रस को , पीत गयो सो पीत गयो
जो बीत गयो सो-----

पहला सुख निरोगी काया , दूसरा सुख है घर में माया
तीसरा सुख सुलक्षण नारी , चौथा सुख सुत आज्ञाकारी

पांचवा सुख राज में वासा छठवां सुख है वास सुवासा
सातवां सुख त्वरित वाहन बल, आठवां सुख निकट निर्मल जल

नवां सुख संतोषी जीवन ,दसवां सुख है ज्ञान संजीवन
ग्यारहवां सुख भक्तिरस अंगा, बारहवां सुख आनंद अभंगा

पात परम सुख अमृत रस को पीत गयो सो पीत गयो
जो जीत गयो सो जीत गयो

"मोहित" राग भैरवी गावत,अपने आतम को समझावत
नाद ब्रम्ह को नाद सुनावत , काल अतीत पतीत गयो
जो बीत गयो सो -----

अशोक कुमार मोहिते

---------------------------------------------