Showing posts with label अन्ना. Show all posts
Showing posts with label अन्ना. Show all posts

Sunday, August 21, 2011

व्यक्ति बड़ा है या मुद्दा ?

आज जब सारा देश भ्रष्टाचार के दानव से जूझ रहा है तो ऐसे में अन्ना जैसे भारतीय इसके खिलाफ लड़ने के लिए मैदान में गए हैं। इस उम्र में इतने कड़े विरोधों को झेलना और निरंतर अपनी बात पर डटे रहने कोई मामूली बात तो नहीं आखिर वे ये कर क्यूँ रहे हैं ? वे निस्वार्थ भाव से देश के लिए ही कर रहे हैं , इसमें उनका कोई निजी स्वार्थ तो है नहीं। फिर देश के लिए लड़ी जाने वाली लडाई में कुछ लोग उनका इतना विरोध क्यूँ कर कर रहे हैं? क्या हासिल होगा इससे?

देश की जनता जो उनके साथ है वो इसलिए क्यूंकि वे जिस बात के लिए लड़ रहे हैं वह हम सभी की समस्या है। जनता मुद्दे के साथ है , किसी व्यक्ति के साथ नहीं। ही आज की जनता इतनी इतनी भोली है की गलत व्यक्ति को यूँ ही अपना समर्थन दे देगी। इसलिए अनायास ही अन्ना का विरोध करके अपनी ऊर्जा का व्यर्थ मत कीजिये ही मुद्दे से भटकाईये मुद्दा बड़ा है , व्यक्ति नहीं इसलिए अपनी ऊर्जा को एकजुट होकर समर्थन जैसे सकारात्मक कार्य में लगाइए।

अन्ना और बाबा की अनावश्यक तुलना करने से बचिए दोनों ही देश और आम जनता के लिए समर्पित हैं , दोनों ही निस्वार्थ देश के हित में लड़ाई लड़ रहे हैं। बस हर किसी के लड़ने का अपना अंदाज़ अलग होता है, इतना ही अंतर है। आज़ादी की लड़ाई में गरम दल और नरम दल में भी तो अंतर था , लेकिन लड़ तो सभी देश के लिए ही रहे थे , बस तरीके अलग थे। और सभी का नाम आज हम सम्मान के साथ वीर शहीद देशभक्तों के रूप में लेते हैं। अतः अन्ना और रामदेव में अनावश्यक भेद मत कीजिये। दोनों ही देश के लिए दो बड़ी सकारात्मक ताकतें हैं जो आम जनता के हित में ही सोच रही हैं।

इतने लोगों के समर्थन के बाद और इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने पर कोई गलत दिशा में सोच भी नहीं सकता अपने आप मन मस्तिष्क में नैतिकता और जिम्मेदारी बढ़ने लगती है। करोड़ों जोड़ी आँखें आज उन पर लगी हुयी है फिर उनके मंतव्यों पर संशय करना एक दुराग्रह जैसा लगता है। विरोध ही करना है तो उन हस्तियों की करिए जो बड़े-बड़े मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।

आखिर विरोधों से लाभ क्या है ? सरकार करे तो करे लेकिन आम जनता का कुछ प्रतिशत विरोध क्यूँ कर रहा है ? यदि अन्ना भी अन्य सामान्य व्यक्तियों की तरह अपना आन्दोलन छोड़ दें और घर बैठ कर सामान्य चर्या अपना लें तो विरोधियों को क्या हासिल होगा। कौन लडेगा इस लड़ाई को ? देश के लिए स्वयं को आहुत करने वालों का विरोध हमारी तुच्छ एवं नकारात्मक सोच को परिलक्षित करता है।

जन आन्दोलों की आंधी में हम यदि एकजुट होकर अपना समर्थन दें और अनावश्यक निंदा से बचें और सकारात्मक सोच रखें तभी यह लड़ाई जीती जा सकती है।

Unity is strength ! ( एकता में ही बल है , विरोधों में नहीं)

Zeal


Wednesday, August 17, 2011

७३ साल के सत्याग्रही से डरी सरकार

मारो , पीटो , बंदी बनाओ - यही है भारतीय सरकार की रणनीति ! कुचल दो , दमन कर दो , बुझा दो लोगों के दिलों में धधकती आग को , दबा दो जागरूक होती आवाजों को - यही है पहचान , भारतीय लोकतंत्र की !

कितने अन्ना और रामदेव को मारोगे, जिन्होंने अपने जैसे करोड़ों तैयार कर दिए हैं भारत-भूमि , देशभक्तों , सत्याग्रहियों , अहिंसावादियों , सत्यवादियों और स्पष्ट्वादियों से अभी खाली नहीं हुयी है आन्दोलन जारी रहेगा। दमन की नीति कारगर नहीं हो सकेगी लोकतंत्र सही अर्थों में बहाल होगा

गरीब जनता बढती महंगाई और भूखमरी से त्रस्त होकर आत्महत्या का विकल्प चुन रही है , जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है। हमारी सरकार तानाशाही की मिसाल कायम कर रही है। छोटे से लेकर बड़े , हर स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। ऐसे में अन्ना की मांग जायज है और बहुत जरूरी भी है। जनता की हर इकाई की यही मांग है। लोकपाल बिल के दायरे में सभी को होना चाहिए। आखिर डर किस बात का ? डर तो सिर्फ चोरों को लगना चाहिए। जो सही है उसे भय किस बात का?

वैसे हमारी सरकार इतनी भी कमज़ोर नहीं। आजादी के ६४ वर्षों में बड़ी उस्तादी से कुर्सी बचाए हुए है। एक अरब जनता को मूर्ख बनाना कोई मामूली काम नहीं है। अन्ना , रामदेव और उनके साथ उठती लाखों आवाजों का दमन करना कोई हमारी सरकार से सीखे।

लोगों का कहना है कि सभी राजनीतिक पार्टियाँ एक सी ही हैं , सरकार बदलने से कोई लाभ नहीं यदि यह सच है तो भी तख्ता पलटना चाहिए और यह सिलसिला तब तक जारी रहना चाहिए जब तक हम पर शासन करने वाली सरकारें अपनी जनता के हित में सोचना सीख जाएँ

हमारे बेशकीमती मतों का लाभ स्वार्थी सरकार आराम से ले रही है। हमारी सरकार कमज़ोर है, डरपोक भी। स्वार्थी और अलोकतांत्रिक भी। भ्रष्ट भी और असंवेदनशील भी। जो जनता कि आवाज़ का दमन करे , वह असंवैधानिक और अनैतिक भी है।

Zeal

Saturday, April 9, 2011

शोहरत की लालच में स्त्री की अस्मिता को शर्मसार करती पूनम पांडे.

पूनम नाम की एक महिला जिसका नाम पहले कभी नहीं सुना था ने वादा किया था की वर्ल्ड कप की विजय प्राप्ति पर वो विजेता भारतीय खिलाड़ियों के लिए निर्वस्त्र होंगी।

पूनम जी से मेरे दो प्रश्न हैं --

  • क्या खिलाड़ियों को इतनी तुच्छ मानसिकता का समझा की वो इस घिनौनी पेशकश से खुश होंगे ? विश्व विजेताओं के पास एक खूबसूरत परिवार और शुभचिंतक मित्र होते हैं जिनके साथ वे अपनी खुशियाँ बांटते हैं।
  • २८ वर्षों बाद मिलने वाली जीत पर निर्वस्त्र होना गवारा है , लेकिन क्या ४२ वर्षों बाद भ्रष्टाचार से मुक्ति जो अन्ना हजारे दिलायेंगे , उसके लिए भी वो निर्वस्त्र होना पसंद करेंगी जहाँ करोड़ों देशभक्तों की भीड़ है और एक ७३ वर्षीय वृद्ध देश की खुशहाली के लिए , निस्वार्थ भाव से , अपनी सेहत के साथ समझौता करके , भूखा प्यासा , भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा है ?


ऐसी स्त्रियाँ संस्कार और सभ्यता का गला घोंटती हैं, समस्त स्त्री जाती को शर्मसार करती हैं , समाज को गलत सन्देश देती हैं , व्यभिचार और अनाचार को निमंत्रण देती हैं ।

ऐसी स्त्रियों के खिलाफ त्वरित कारवाई होनी चाहिए जो अपने संस्कार विहीन विचारों से 'वैचारिक प्रदूषण' करती हैं। इन्हें ये समझने की जरूरत है की देश की जीत सिर्फ विश्व कप में ही नहीं बल्कि और भी उपलब्धियों में है ।

जैसे--
  • संस्कारों का जीवित रहना।
  • गरीबों को रोटी मिलना और उन्हें भी मुस्कुराने का अवसर मिलना।
  • देश का भ्रष्टाचार मुक्त होना।
  • एक अरब जनता का जागरूक होना ।
  • बच्चे-बच्चे का साक्षर होना
  • दहेज़ और कन्या भ्रूण हत्या मुक्त समाज का होना ।

यदि पूनम जैसी स्त्रियों को सुन्दर काया के साथ सुन्दर बुद्धि भी मिलती तो स्त्री-उत्थान और देश का उत्थान दोनों एक साथ ही हो जाता।

और भी बहुत से गम हैं ज़माने में IPL के सिवा । खिलाड़ियों पर करोड़ों लुटाया जाता है और गरीबों के बारे में सोचने के लिए फुर्सत ही नहीं तो धन कहाँ से आएगा । कांच के घरों में रहने वाले , गरीबों के सपनों को कुचलकर नाम कमाते हैं ।

है किसी विश्व-विजेता खिलाड़ी में ये दम की वो इनाम में मिली धन-राशि को गरीबों के नाम समर्पित कर दे?

आभार