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Monday, March 21, 2011

कहीं शनि की वक्र-दृष्टि तो कहीं लक्ष्मी की अति-वृष्टि .

सरस्वती की जिन पर कृपा होती है , अक्सर लक्ष्मी उनसे दूर ही रहती हैं। बड़े-बड़े साहित्यकार जो सचमुच कलम के धनी हैं और निरंतर साहित्य की सेवा कर रहे हैं , उनसे लक्ष्मी रूठी रहती हैं , आखिर ऐसा क्यूँ होता है ?

किसी भी साहित्यकार , लेखक , विश्लेषक को धन का स्वाद चखने को कम ही मिलता है किसी संस्थान अथवा विज्ञान अथवा कार्य स्थल पर भी , असली दिमाग रखने वाले को धन तो दूर , श्रेय तक नहीं मिलता बस राजनीति करने वालों पर लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है ऐसे में सरस्वती को भी कोई सौलिड स्टैंड लेना चाहिए अपने उपासकों पर कृपा दृष्टि रखनी चाहिए।

कितने भाग्यशाली हैं वे , जिन पर सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा होती है।