सरस्वती की जिन पर कृपा होती है , अक्सर लक्ष्मी उनसे दूर ही रहती हैं। बड़े-बड़े साहित्यकार जो सचमुच कलम के धनी हैं और निरंतर साहित्य की सेवा कर रहे हैं , उनसे लक्ष्मी रूठी रहती हैं , आखिर ऐसा क्यूँ होता है ?
किसी भी साहित्यकार , लेखक , विश्लेषक को धन का स्वाद चखने को कम ही मिलता है । किसी संस्थान अथवा विज्ञान अथवा कार्य स्थल पर भी , असली दिमाग रखने वाले को धन तो दूर , श्रेय तक नहीं मिलता । बस राजनीति करने वालों पर लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है । ऐसे में सरस्वती को भी कोई सौलिड स्टैंड लेना चाहिए । अपने उपासकों पर कृपा दृष्टि रखनी चाहिए।
कितने भाग्यशाली हैं वे , जिन पर सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा होती है।
किसी भी साहित्यकार , लेखक , विश्लेषक को धन का स्वाद चखने को कम ही मिलता है । किसी संस्थान अथवा विज्ञान अथवा कार्य स्थल पर भी , असली दिमाग रखने वाले को धन तो दूर , श्रेय तक नहीं मिलता । बस राजनीति करने वालों पर लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है । ऐसे में सरस्वती को भी कोई सौलिड स्टैंड लेना चाहिए । अपने उपासकों पर कृपा दृष्टि रखनी चाहिए।
कितने भाग्यशाली हैं वे , जिन पर सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा होती है।