निकट की बस्ती में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे , जो मेरे भी बच्चे हैं !
नेहा , धीरज और छोटू
मेरे बच्चों की टीम के सबसे बड़े बच्चे, इन्हें तो आप पहचानते ही हैं !
54 बच्चों के माता-पिता (दिव्या और उसके पति))
आज की तारीख में मेरे पास 54 बच्चे हो गए हैं। इनके लिए मेरे जैसे मिडिल
क्लास व्यक्ति को कुछ विशेष नहीं करना पड़ता। बस उन्हें पढ़ाती हूँ ! थोडा
देशभक्ति की बातें और चरित्र निर्माण की दिशा देती हूँ। उनके लिए यथा
सामर्थ्य (ज्यादा महँगा नहीं) , स्कूल का बैग, पेन्सिल, टिफिन बॉक्स , उनके
लिए कपडे , कभी-कभी फल आदि लाती हूँ , (शेष उनके मजदूर माता-पिता ही करते
हैं)! आजकल, चित्र में दिख रहे बच्चे 'नेहा" और धीरज तथा अन्य तीन बच्चों
के साथ एक नाटक की तैय्यारी करवा रही हूँ जो संभवतः 26 जनवरी को प्रदर्शित
होगा , township के सभी गणमान्य लोगों के सम्मुख! मेरे इस प्रयास में मेरे
पड़ोस के बहुत से अन्य लोग भी शामिल हो रहे हैं मेरे साथ , जिससे मुझे अपने
ध्येय तक पहुँचने में आसानी हो रही है !
मेरे विचार से अन्य लोग भी इस तरह से गरीब बच्चों को गोद ले सकते हैं और उनका जीवन संवार सकते हैं !
जय हिन्द !
जय भारत !
मेरे विचार से अन्य लोग भी इस तरह से गरीब बच्चों को गोद ले सकते हैं और उनका जीवन संवार सकते हैं !
जय हिन्द !
जय भारत !